अयोध्या फैसले पर आया सलमान के पिता का बयान, मुस्लिमों को दी सलाह, पीएम के लिए कही ये बात

मुंबई। दशकों से लंबित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने शनिवार को फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 2.77 एकड़ जमीन का मालिकाना हक रामलला विराजमान को दे दिया है। पीठ ने 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस फैसले के बाद सलमान खान के पिता और पटकथा लेखक सलीम खान का बयान आया है।

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सलीम खान ने अयोध्या फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में मुस्लिमों को दी जाने वाली पांच एकड़ जमीन पर स्कूल बनाया जाना चाहिए। सलीम खान ने मुस्लिम समुदाय से अपील करते हुए कहा कि मोहब्बत जाहिर करिए और माफ करिए। अब इस मुद्दे को फिर से मत कुरेदिए, यहां से आगे बढ़िए।

मुस्लिमों को दी सलाह

मुस्लिमों को दी सलाह

सलीम खान ने मुस्लिमों को सलाह देते हुए कहा कि अब इस मामले पर बात ना कर बुनियादी समस्याओं पर चर्चा करनी चाहिए। मुस्लमानों को स्कूल और अस्पताल की जरूरत है। उन्होंने अयोध्या में मिली पांच एकड़ जमीन पर कॉलेज बनाने की बात भी कही। सलीम खान ने कहा कि नमाज तो ट्रेन, प्लेन कहीं भी पढ़ी जा सकती है। अगर 22 करोड़ मुस्लिमों को अच्छी शिक्षा मिलेगी तो इस देश की बहुत सी कमियां खत्म हो जाएंगी।

प्रधानमंत्री के लिए क्या कहा

प्रधानमंत्री के लिए क्या कहा

सलीम खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात पर सहमति जताते हुए कहा कि अयोध्या विवाद को खत्म कर हमें नई शुरुआत करनी चाहिए। अब हमें शांति की जरुरत है। हमें अपने प्रमुख मुद्दों पर ध्यान देकर भविष्य के बारे में सोचना चाहिए।

रामलला की है विवादित जमीन

रामलला की है विवादित जमीन

बता दें मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित स्थल पर 1856-57 तक नमाज पढ़ने के सबूत नहीं हैं। हिंदू इससे पहले अंदरूनी हिस्से में भी पूजा करते थे। हिंदू बाहर सदियों से पूजा करते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 2.77 एकड़ जमीन का मालिकाना हक रामलला विराजमान को दे दिया है। कोर्ट ने आगे कहा कि हर मजहब के लोगों को संविधान में बराबर का सम्मान दिया गया है।

40 दिनों तक चली सुनवाई

40 दिनों तक चली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने 40 दिनों तक मामले पर सुनवाई करने के बाद 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अयोध्या पर हुई सुनवाई सबसे लंबी चलने के मामले में दूसरे नंबर पर है। इससे पहले केशवानंद भारती मामले की सुनवाई 68 दिनों तक चली थी। अयोध्या पर फैसला लेने वाली बेंच में गोगोई के अलावा जस्टिस एसए बोबडे, डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और अब्दुल नजीर हैं।

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