'फासीवाद और ध्रुवीकरण पर अब तो संसद भी प्रभावी नहीं', BJP पर राहुल गांधी का बड़ा हमला

राहुल गांधी ने एक इंटरव्यू में बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि देश में पहले से ही फासीवाद मौजूद है, हद तो इस बात की है कि अब तो पार्लियामेंट पर भी इसका असर दिख रहा है।

Rahul Gandhi

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने देश में ध्रवीकरण की राजनीति पर एक सवाल के जवाब में कहा कि फासीवाद तो पहले से ही मौजूद था, लेकिन अभ देश की संसद भी इस खिलाफ एक्शन नहीं ले पा रही। राहुल गांधी ने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच ध्रुवीकरण को स्वीकार किया। लेकिन ये भी कहा कि पहले स्थिति इतनी भयानक नहीं थी जितना कि अब मीडिया के माध्यम से इसे दिखाया जाता है।

राहुल गांधी ने इटली के एक दैनिक न्यूज प्लेटफार्म के इंटरव्यू में भाजपा का नाम लिए बिना बड़े आरोप लगाए। उन्होंने के कहा कि देश में पहले से फासीवाद मौजूद था। लेकिन लेकिन अब चिंता की बात ये है कि संसद भी इस इन सबके खिलाफ कदन नहीं उठा पा रही। राहुल गांधी ने इटली के एक दैनिक समाचर पत्र 'कोरिरे डेला सेरा' को दिए साक्षात्कार में ये बात कही। कांग्रेस नेता ने 'भारत जोड़ो यात्रा' के अपने अपने अनुभवों पर खुलकर बात की। उन्होंने इस आगामी आम चुनाव में कांग्रेस भाजपा को कैसे हराएगी इस बात का भी जिक्र किया। इसके साथ ही राहुल गांधी ने अपने निजी जीवन से जुड़े कुछ अहम पहलुओं को लेकर भी बात की।

राहुल गांधी ने इतावली समाचार पत्र ने अपनी दादी इंदिरा की कुछ सुखद यादों को जिक्र किया और उन्होंने इस सवाल का भी जवाब किया कि 52 साल की उम्र में भी उन्होंने शादी क्यों नहीं की। भारत और फासीवाद के बारे में एक सवाल पर गांधी ने कहा, "फासीवाद पहले से ही है। इससे लोकतंत्रिक ढांचे पर बुरा असर होता है। संसद अब काम नहीं कर रही है। मैं दो साल से बोल नहीं पा रहा हूं। जैसे ही मैं बोलता हूं वे मेरा माइक्रोफोन बंद कर देते हैं। शक्तियों का संतुलन बंद है। न्याय स्वतंत्र नहीं है। केंद्रवाद निरपेक्ष है"।

ध्रुवीकरण को लेकर एक सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि हिंदुओं और मुसलमानों के बीच ध्रुवीकरण मौजूद है, गांधी ने इस तथ्य को स्वीकार किया था। उन्होंने मीडिया पर भी सवाल खड़े किए। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि सरकार का मीडिया के प्रति ऐसा व्यवहार कभी नहीं था। देश के वास्तवित मुद्दे गरीबी, अशिक्षा, महंगाई, छोटे कर्जदार उद्यमियों और भूमिहीन किसानों के कोविड के बाद संकट जैसी समस्याओं से ध्यान भटकाने का कार्य किया गया। उन्होंने कहा कि अब तो प्रेस भी अब स्वतंत्र नहीं है।

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