फारूख अब्दुल्ला बोले-'j&K आतंकी हमलों के पीछे एजेंसियों का हाथ तो नहीं? उमर सरकार को अस्थिर करने की कोशिश'
Farooq Abdullah on Budgam Terror Attack: जम्मू कश्मीर में नई सरकार बनने के बाद से आतंकी घटनाएं बढ़ गई हैं। आए दिन आतंकी हमले हो रहे हैं। बीते 24 घटें में बडगाम, बांदीपुरा और श्रीनगर में आतंकी घटना हुई है। जम्मू कश्मीर में बढ़ते आतंकवाद पर नेशनल कॉन्फ्रेंस चीफ फारूख अब्दुल्ला का बड़ा बयान आया है। फारूख अब्दुल्ला ने बडगाम समेत अन्य आतंकी हमलों पर संदेह जताया है।

बडगाम में मजदूरों पर हुए आतंकी हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए फारूख अब्दुल्ला ने कहा कि "इसकी जांच होनी चाहिए। कैसे यहां सरकार बन गई है और ये हो रहा है। मुझे तो शक है कि यह वो लोग तो नहीं कर रहे हैं जो इस सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं? पहले क्यों बंद थे ये हमले और अभी ही क्यों हो रहे हैं...? यह सब एक संकट पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। कश्मीर को अस्थिर करने की कोशिश है... क्या कोई एजेंसिया तो नहीं है इन हमलों के पीछे जो उमर अब्दुल्ला सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं"

फारूख अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि जम्मू कश्मीर में आतंकी हमलों से क्राइसिस पैदा करने की कोशिश हो रही है। हमलावरों को पकड़ना चाहिए तब पता चलेगा कि इन आतंकियों के पीछे कौन है? इनको मारना नहीं चाहिए। आतंकियों को पकड़ो और पूछो कि आखिर उनसे हमले कौन करवा रहा है? अभी ही ये घटनाएं क्यों हो रही है .. पहले क्यों बंद थे ये हमले और अभी ही क्यों हो रहे हैं?

जम्मू कश्मीर के बडगाम जिले के मागाम इलाके में आतंकवादियों द्वारा दो गैर-स्थानीय लोगों को निशाना बनाए जाने की घटना के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति फिर से गहन जांच के दायरे में आ गई है। पीड़ितों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई है। जवाब में, सुरक्षा बलों ने हमलावरों को पकड़ने के लिए तेजी से इलाके को घेर लिया। यह घटना हमलों की एक श्रृंखला का हिस्सा है जिसने क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के बारे में व्यापक चिंता पैदा कर दी है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री कविंदर गुप्ता ने इस हमले की निंदा करते हुए इसे कायराना बताया, खास तौर पर त्योहारों के समय में हुआ। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के भीतर कुछ तत्व पाकिस्तान के प्रभाव में काम कर रहे हैं, जो शांति और सुरक्षा को कमजोर कर रहे हैं। गुप्ता ने इस तरह के कृत्यों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और उनसे निपटने के महत्व पर जोर दिया, जिसमें शत्रुतापूर्ण संस्थाओं के लिए भूमिगत और भूमिगत कार्यकर्ता के रूप में काम करने वाले लोग भी शामिल हैं। यह दृष्टिकोण जम्मू-कश्मीर के सामने मौजूद आंतरिक और बाहरी खतरों से निपटने के सर्वोत्तम तरीके पर चल रहे विमर्श को और मजबूत करता है।
क्या बोली भाजपा?
उधर, भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, "सरकार उचित जांच कर रही है, लेकिन अगर उन्हें ऐसा कुछ लग रहा है, अगर उनके पास ऐसी कोई जानकारी है तो वे अब विपक्ष में नहीं हैं, उन्हें इसे साझा करना चाहिए। जब उनकी सरकार को अस्थिर करने की बात आती है, तो क्या यह वही शक्ति नहीं है, जिससे उन्होंने सत्ता में आने के लिए दोस्ती की थी? शायद अब आपको उसी शक्ति से निपटना होगा। उन्होंने कहा था कि हमें पाकिस्तान से बात करने की जरूरत है...या तो यह आपका डर है या फिर अगर आपके पास कोई जानकारी है, तो कृपया इसे केंद्र सरकार और एलजी के साथ साझा करें।"












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