किसान नेताओं की चेतावनी, 4 जनवरी की बैठक में नहीं निकला हल तो बंद करेंगे मॉल और पेट्रोल पंप

नई दिल्ली। Farmers Protest: केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन को एक महीने से भी अधिक समय हो चुका है। इस बीच किसानों का गुस्सा बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। शुक्रवार को किसान संगठनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अगर अगर 4 जनवरी को सरकार के साथ बैठक गतिरोध खत्म करने में विफल रही तो हम हरियाणा में सभी मॉल, पेट्रोल पंप बंद करने की तारीखों की घोषणा करेंगे। वहीं स्वराज इंडिया प्रमुख योगेन्द्र यादव ने कहा कि बैठक में हल नहीं निकला तो 6 तारीख को मार्च निकाला जाएगा।

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      Farmer leaders said if the solution does not come out in the meeting will close mall and petrol pump

      शुक्रवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान नेताओं ने कहा, ऐसा लगता है कि सरकार किसानों को हल्के में ले रही है। शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों को हटाने में सरकार सक्षम थी, और वे हमारे साथ भी ऐसा ही करने की सोच रहे थे, लेकिन ऐसा कोई दिन नहीं आएगा। हरियाणा किसान नेता विकास सीसर ने कहा कि 4 जनवरी को सरकार के साथ होने वाली बैठक में कोई हल नहीं निकला तो निजी पेट्रोल पंप को छोड़कर सभी पेट्रोल पंप और मॉल बंद रहेंगे। हालांकि हरियाणा में सभी टोल प्लाजा चालू रहेंगे। भाजपा और जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के खिलाफ राज्य में विरोध प्रदर्शन करेंगे और यह तब तक जारी रहेगा जब तक उनका गठबंधन टूटता नहीं है।

      योगेन्द्र यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'किसानों का ये आंदोलन अब निर्णायक दौर में है, 30 तारीख की वार्ता के बारे में मैं इतना ही कहूंगा कि अभी तो पूंछ निकली है, हाथी निकलना अभी बाकी है। MSP को कानूनी अधिकार मिलने और तीनों कृषि कानूनों को खारिज करने पर सरकार टस से मस नहीं हुई है।' योगेन्द्र ने आगे कहा, 4 तारीख (4जनवरी) को हमारी वार्ता है, अगर परिणाम संतोषजनक नहीं निकलते हैं तो 6 तारीख को कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) राजमार्ग पर मार्च किया जाएगा। 6 तारीख से 20 तारीख तक 2 हफ्ते पूरे देश में देश जागृति अभियान चलाया जाएगा।

      योगेन्द्र यादव ने कहा, 'शाहजहांपुर में कल कुछ किसानों ने बैरिकेड तोड़ दिए और आगे बढ़ गए। यहां संयुक्ता किसान मोर्चा की सहमति के बाद मोर्चा आयोजित किया गया था, यह एक संयुक्त निर्णय था। स्थानीय और राष्ट्रीय नेतृत्व ने सहमति व्यक्त की कि मोर्चा को अभी के लिए शाहजहांपुर में रहना चाहिए। 50 प्रतिशत मुद्दों को हल करने के दावे झूठे हैं। हमारी दो मुख्य मांगें हैं- तीन कृषि बिलों को खत्म किया जाना चाहिए और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी अभी भी लंबित है।'

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