केंद्र को फिर से घेरने की तैयारी, 4 दिनों के लिए लखीमपुर खीरी जाएंगे किसान नेता राकेश टिकैत
नई दिल्ली, 15 जनवरी। कृषि कानूनों की वापसी के बाद करीब साल भर चला किसान आंदोलन अब खत्म हो गया है, लेकिन अभी भी कई मुद्दों को लेकर किसान, किसान नेता और संगठन केंद्र सरकार को माफ कर करने के लिए राजी नहीं हुए हैं। शनिवार को किसान नेता राकेश टिकैत ने सिंघु बॉर्डर पर एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़ा ऐलान किया। राकेश टिकैत ने कहा कि वह उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी घटना को भूले नहीं है, आने वाली 21 तारीख से चार दिनों के लिए हम सभी किसान भाई वहां जा रहे हैं।

सिंघु बॉर्डर से राकेश टिकैत ने अपने बयान में कहा, 'लखीमपुर खीरी में जो घटना हुई थी, हम 21 तारीख से वहां पर 3-4 दिन के लिए जाएंगे। वहां पर पीड़ितों से मुलाकात करेंगे। जो किसान जेल में है, हम उनसे भी मिलेंगे।' भारतीय किसान संघ के नेता युद्धवीर सिंह ने एमएसपी पर हो रही देरी को लेकर सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा, 'अभी तक केंद्र ने एमएसपी पर न तो कोई समिति बनाई है और न ही इस पर हमसे संपर्क किया है। लखीमपुर खीरी कांड में शामिल होने वाले राज्यमंत्री को सरकार ने नहीं हटाया है। अगर सरकार हमारी मांगों का जवाब नहीं देती है तो हम 31 जनवरी को 'विरोध दिवस' मनाएंगे।
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3 अक्टूबर को हुआ था लखीमपुर खीरी कांड
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया गांव में कृषि कानूनों का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी किसानों को गाड़ी से कुचलने की घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। लखीमपुर खीरी मामले में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्रा उर्फ मोनू के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। इस घटना में 7 किसान, 1 पत्रकार और 3 लोगों की मौत हो गई थी।












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