Farm Bills:किसानों के मुद्दे पर कैसे बंट गया किसान नेता चौधरी देवीलाल का परिवार

नई दिल्ली- इस समय देश में किसानों से जुड़े कानूनों को लेकर सियासत गर्माई हुई है। हरियाणा में तो पूर्व किसान नेता चौधरी देवीलाल के घर में ही इसको लेकर दंगल मच गया है। उनका परिवार किसानों की ही राजनीति करता रहा है और उन्हीं के सियासी विरासत को संभालने का दावा भी करता है। लेकिन, नए कानूनों ने राजनीतिक तौर पर पहले से ही दूर देवीलाल के परिवार को एक-दूसरे से और भी दूर कर दिया है। वजह ये है कि एक के पास सत्ता में रहने का मौका है तो दूसरा सत्ता से कोसों दूर है। एक वजह और भी है कि कुछ ही दिनों बाद देवीलाल की जयंती आने वाली है, जिसमें दोनों ओर से एक-दूसरे पर भारी पड़ने की होड़ लग चुकी है।

किसानों के मुद्दे पर बंट गया 'किसान नेता' का परिवार

किसानों के मुद्दे पर बंट गया 'किसान नेता' का परिवार

हरियाणा में सियासी तौर पर सशक्त चौटाला परिवार पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल के किसानों में कायम प्रभाव की विरासत पर ही अबतक राजनीति करता रहा है। लेकिन, अबकी बार किसानों से जुड़े मुद्दे पर ही चौटाला परिवार घर के अंदर ही बंट गया है। दोनों ओर से यही दावा है कि वह जो कर रहे हैं, असल में वही किसानों से जुड़े देवीलाल की असल विरासत संभालने का मतलब है। इसकी वजह ये है कि परिवार का एक धरा सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी सरकार के विधेयक के साथ है तो दूसरा उसके खिलाफ प्रदेश के किसानों को गोलबंद कर रहा है। एक धरा दूसरे पर दबाव बना रहा है कि हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर सरकार से समर्थन वापस ले ले, वहीं दूसरे का कहना है कि वह किसानों के हित में ही सरकार के साथ डटी हुई है।

आईएनएलडी कर रहा है जेजेपी से समर्थन वापसी की मांग

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देवीलाल के पोते और इंडियन नेशनल लोकदल के नेता अभय चौटाला का कहना है कि उनके बड़े भाई अजय चौटाला हरियाणा में बीजेपी सरकार सरकार से समर्थन वापस नहीं लेकर चौधरी देवीलाल की विरासत का अपमान कर रहे हैं। दरअसल, अजय चौटाला की पार्टी जननायक जनता पार्टी हरियाणा में भाजपा सरकार के साथ है और उनके बेटे दुष्यंत चौटाला खट्टर सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं। अभय चौटाला ने ईटी से कहा है, 'अजय और दुष्यंत ने बीजेपी सरकार को समर्थन देने के लिए एक समझौता किया और सत्ता हासिल कर ली और अब उससे बाहर निकलने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। वह अपने फायदे के लिए स्वार्थ की राजनीति कर रहे हैं, किसानों के हित में नहीं। इस तरह की राजनीति हमारे दादा चौधरी देवीवाव की विरासत नहीं हो सकती।'

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    न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पीएम-सीएम से मिला है भरोसा-दुष्यंत

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    जबकि, दूसरी तरफ दुष्यंत चौटाला ने सरकार से बाहर निकलने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि उनकी प्राथमिकता किसानों को उनकी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाना है, और 'उसके लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री मनोहर लाल दोनों प्रतिबद्ध हैं।' दूसरी तरह अभय चौटाला का कहना है कि, 'अगर नया कानून सही था तो किसान विरोध क्यों कर रहे हैं? सरकार ने किसान संगठनों से कोई बात नहीं की है। अगर जेजेपी चौधरी देवीवाल की विरासत का पालन करने का दावा करती है तो उसे बीजेपी से गठबंधन तोड़कर बाहर आ जाना चाहिए, क्योंकि अब वो किसानों के सामने पूरी तरह से बेनकाब हो गई है।' वैसे दुष्यंत चौटाला की सत्ताधारी पार्टी की मुश्किल ये है कि उसके 10 विधायकों में से कम से कम दो मसलन, राम करण काला और देवेंदर सिंह बबली ने अब ये कहना शुरू कर दिया है कि नए कानून ने किसानों को नाराज किया है। ऐसे ही विधायकों को शांत करने के लिए दुष्यंत ने ऐलान किया है कि अगर न्यूनतम समर्थन मूल्य को कोई खतरा होगा तो मैं उसी दिन अपना पद छोड़ दूंगा।

    हरियाणा में कई जगह किसान कर रहे हैं विरोध

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    गौरतलब है कि हरियाणा और पंजाब में किसान नए कृषि विधेयकों का विरोध कर रहे हैं और प्रदेश के सिरसा, जींद, हिसार और चंडीगढ़ के पास सड़कें भी जाम की हैं। उधर, चौटाला परिवार में दादा देवीलाल के नाम के असली हकदार होने को लेकर जो संग्राम मचा हुआ है, उसके पीछे एक वजह और है। चार दिन बाद यानी 25 सितंबर को चौधरी देवीलाल की 107वीं जयंती मनाने की तैयारियां चल रही हैं। जाहिर है कि इस दौरान किसानों से जुड़े इस मुद्दे को दोनों ही दल जेजेपी और आईएनएलडी अपने-अपने हिसाब से भुनाना चाहती हैं।

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