'आईसीयू के गार्ड ने मेरी बात मानी होती, तो मां जिंदा होतीं'
आग के वक्त आईसीयू वार्ड के सामने मौजूद रहे अमोल ने बताई आंखों देखी।
भुवनेश्वर। सोमवार शाम ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के एसयूएम अस्पताल में आग से 20 लोगों की मौत हो गई थी। इस आग को सबसे पहले जिस युवक ने देखा था, उसने आईसीयू के बाहर खड़े गार्ड की भूमिका पर कई सवाल उठाए हैं।
खुर्दा जिले के कन्हैयापुर गांव की रजनी को ब्रेन ट्यूमर की वजह से पिछली हफ्ते ही एसयूएम के आईसीयू में भर्ती कराया गया था।

सोमवार की शाम जब अस्पताल में आग लगी तो रजनी का 22 साल का बेटा अमोल पात्रा आई अस्पताल में था। अमोल आईसीयू के बाहर खड़े गार्ड से अपनी मां से मिलने देने की गुहार लगा रहा था, उसके साथ उसका भाई भी था। अमोल और उसका भाई वहीं खड़े थे। कि उन्होंने वहां धुआं देखा और किसी अनहोनी होने की आशंका की बात गार्ड और नर्स को बताई।
जब तक स्टाफ को अनहोनी का अहसास हुआ बहुत देर हो गई थी
अमोल ने वहां मौजूद गार्ड से डॉक्टर को बुला देने की बात कही लेकिन नहीं मानी गई। अमोल कहता रहा कि आईसीयू में सब ठीक नहीं है, उसकी एक ना सुनी गई और जब तक वहां मौजूद स्टाफ को दुर्घटना का अहसास होता तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

दो घंटे बाद रजनी को निकाला गया, उसको दूसरे असप्ताल भेजा गया। जहां डॉक्टरों ने रजनी को मृत घोषित कर दिया। अमोल के भाई संतोष भी कहते हैं कि स्टाफ ने हमारी एक ना सुनी, हमने बहुत विनती की कि एक बार अंदर जाने दो।
आपको बता दें कि ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के एसयूएम अस्पताल में सोमवार शाम आग लग गई थी। आग में 20 मरीजों की मौत हो गई थी जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं।
बताया जा रहा है कि आग पहली मंजिल पर बने डायलिसिस वॉर्ड में शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी, जो आईसीयू तक तेजी से फैल गई। इसके बाद अस्पताल की स्थिति भयावह हो गई।












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