ओमिक्रॉन: विशेषज्ञों ने बूस्टर डोज को बताया जरूरी, कहा- 2 डोज का असर 3-6 महीनों में कम होने लगता है
जिगर और पित्त विज्ञान संस्थान (आईएलबीएस) दिल्ली के डायरेक्टर डॉक्टर एस के सरीन ने कोरोना पर प्रहार करने के लिए बूस्टर डोज को अहम बताया है।
नई दिल्ली, 22 दिसंबर। जिगर और पित्त विज्ञान संस्थान (आईएलबीएस) दिल्ली के डायरेक्टर डॉक्टर एस के सरीन ने कोरोना पर प्रहार करने के लिए बूस्टर डोज को अहम बताया है। डॉ. सरीन ने कहा कि मेरी राय में बूस्टर डोज जरूरी है। जब आप किसी वैक्सीन कि दो डोज लगवाते हो तो आपकी सुरक्षा का स्तर 3-6 महीनों में कम होने लगता है, लेकिन जब आप बूस्टर या तीसरी डोज लगवा लेते हैं तो फिर गंभीर संक्रमण से ग्रसित होने या अस्पताल में भर्ती होने के अवसर कम हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में जिस तरह से ओमिक्रॉन के मामले बढ़ रहे हैं, हमें बूस्टर डोज पर विचार करना होगा। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों और फ्रंट लाइन वर्करों को बूस्टर डोज मिलना चाहिए, इसके अलावा एक से ज्यादा बीमारियों से जूझ रहे लोगों को भी इसे लगाया जाना चाहिए।
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बता दें कि तेजी से फैलने वाले कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट के मामले भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में तमाम देशों के स्वास्थ्य विशेषज्ञ कोरोना वैक्सीन की तीसरी डोज या बूस्टर डोज पर विचार कर रहे हैं।
अब तक देश के 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ओमिक्रॉन के 213 केस मिल चुके हैं, जिनमें से 90 लोग या तो ठीक हो चुके हैं या पलायन कर चुके हैं। राजधानी दिल्ली में ओमिक्रॉन के सर्वाधिक मामले (57) सामने आए हैं। दिल्ली के बाद महाराष्ट्र का नंबर है जहां ओमिक्रॉन के 54 मामले सामने आ चुके हैं। तेलंगाना में 24, कर्नाटक में 19, राजस्थान में 18, केरल मे 15 और गुजरात में 14 ओमिक्रॉन के मामले अभी तक सामने आए हैं। देश में ओमिक्रॉन वेरिएंट के बढ़ते मामलों के मद्देनजर पीएम मोदी ने गुरुवार को एक आपात बैठक बुलाई है।












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