सोशल डिस्टेंसिंग उपायों के साथ संसद का मानसून सत्र चलाने की कवायद, जानिए क्या है योजना?
नयी दिल्ली। कोरोनावायरस महामारी के संचरण के लिए महत्वपूर्ण सोशल डिस्टेंसिंग उपायों का प्रमुख भूमिका है। जल्द ही संसद भवन का मानसूत्र सत्र का समय निकट आ रहा है, ऐसे में मानसून सत्र के लिए संसदीय कार्रवाई शुरू करने के लिए राज्यसभा के पदेन सभापति और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इसके आयोजन को लेकर सोमवार को एक बैठक में आभासी यानी ई-संसद की संभावना जैसे विषयों व विकल्पों के बारे में गहन चर्चा की गई।

दोनों उच्च और निचले सदन के अध्यक्षों ने बैठक में माना कि ऐसी स्थिति में जब नियमित बैठकें संभव नहीं हैं, इसलिए तब तक संसद के सत्र को सुगम बनाने के लिए प्रौद्योगिकी को अपनाने की जरूरत है। हालांकि यह विचार भी व्यक्त किया कि आभासी बैठकें आयोजित करने के मुद्दे को दोनों सदनों के संसद की नियमों से संबंधित समिति को विचारार्थ भेजा जाना जरूरी होगा, क्योंकि चर्चा की गोपनीयता जरूरी होती है।

हालांकि लोकसभा की बैठक राज्यसभा के साथ केंद्रीय कक्ष में आयोजित करने सहित कई विकल्पों पर विचार किया गया। इस विकल्प पर भी विचार किया गया कि दोनों सदनों की बैठक एक दिन छोड़ कर आयोजित की जा सकती है। उनका मानना था कि चूंकि संसद की कार्यवाही का आम लोगों के लिए सीधा प्रसारण किया जाता है, अत: गोपनीयता बनाए रखने की कोई ऐसी जरूरत नहीं है। ऐसे में दीर्घावधि में आभासी संसद एक विकल्प हो सकता है।

गौरतलब है आमतौर पर संसद का मानसून सत्र जुलाई-अगस्त में आयोजित किया जाता है। बजट सत्र 24 मार्च को Covid-19 का संक्रमण फैलने के कारण अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। सोमवार को आयोजित की गई यह बैठे उपराष्ट्रपति नायडू ने अपने आधिकारिक आवास पर बैठक बुलाई थी, जिसमें दोनों सदनों के महासचिवों ने हिस्सा लिया।

हालांकि उपराष्ट्रपति नायडू और लोकसभा अध्यक्ष बिरला का विचार था कि आभासी बैठकें आयोजित करने के विषय को दोनों सदनों की नियमों से जुड़ी समिति को विचारार्थ भेजना जरूरी है। दोनों महासचिवों ने सभापति और स्पीकर को संसद की विभिन्न समितियों की बैठक आभासी माध्यम से आयोजित करने से जुड़े विविध पहलुओं के बारे में जानकारी दी, जिसमें सुरक्षित प्रौद्योगिकी प्लेटफार्म, ऐसी बैठकों से जुड़ी गोपनीयता व अन्य विषय शामिल हैं।
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