10 बातें जिनकी वजह से पाकिस्तान को युद्ध के लिए नहीं ललकार रहे नरेंद्र मोदी
नई दिल्ली। [ऋचा बाजपेई] पाकिस्तान की ओर से लगातार भारतीय सीमा पर बरसती गोलियां जिनकी वजह से कभी निर्दोष गांव वालों की मौत तो कभी हमारे सैनिकों को मिलती शहादत।

पिछले करीब एक माह से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है। इस तनाव की वजह से अब लोग इस बात पर यकीन करने लगे हैं कि शायद वर्ष 1999 के बाद अब भारत और पाकिस्तान दोनों फिर से मैदान-ए-जंग में आमने सामने आ सकते हैं।
वहीं दूसरी ओर से भारत और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से एक अजीब सी चुप्पी भी लोगों को बेचैन कर रही है।
मोदी की खामोशी के हैं कई राज
चुनावों से पहले अपनी हर रैली में पाक के खिलाफ भड़कने वाले मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद खामोश हैं और लोग हैरान हैं। विशेषज्ञों की मानें तो मोदी खामोश जरूर है लेकिन ऐसा भी नहीं हैं कि वह पाक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। लेकिन यह बात साफ है कि मोदी कहीं न कहीं पाक के साथ युद्ध से बचना चाहते हैं। आइए आपको बताते हैं उन 10 वजहों के बारे में कि आखिर क्यों प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी पाक को सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दे रहे हैं।
- बतौर प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी इस बात से वाकिफ हो चुके हैं कि भारत फिलहाल युद्ध के लिए तैयार नहीं है। उसके पास पर्याप्त हथियारों की कमी तो है ही साथ ही सेना में आफिसरों की कमी भी उन्हें सता रही है।
- विशेषज्ञों के मुताबिक दोनों देशों के पास न्यूक्लियर वेपेंस मौजूद हैं और भारत, पाक से इस लिहाज से काफी कमजोर है। इस बात की संभावनाएं कई बार जताई जा चुकी हैं कि अगर अब युद्ध हुआ तो पाक हो सकता है कि न्यूक्लियर वेपेंस का प्रयोग भारत के खिलाफ कर सकता है।
- सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार की ओर से सेना और पैरामिलिट्री फोर्सेज को आदेश दिए जा चुके हैं कि वह पाक पर पहले फायरिंग हरगिज नहीं करेंगे लेकिन अगर पाक की ओर से गोलीबारी होगी तो उसका तगड़ा जवाब देंगे।
- वर्ष 1999 में जब भारत-पाकिस्तान के बीच कारगिल वॉर हुआ था तो करीब 2,000 करोड़ रुपए का नुकसान भारतीय अर्थव्यवस्था को हुआ था। नरेंद्र मोदी इस बात से काफी बेहतरी से वाकिफ हैं कि आज अगर युद्ध हुआ तो भारत की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना उनके एजेंडे में सबसे ऊपर है और इसलिए वह युद्ध जैसी स्थिति से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
- नरेंद्र मोदी फिलहाल देश की आतंरिक सुरक्षा के मद्देनजर सेनाओं को एक नए ढांचे में ढालने की तैयारी में लगे हुए हैं। इसलिए फिलहाल वह युद्ध की स्थिति नहीं चाहते हैं।
- नरेंद्र मोदी की छवि एक कट्टर हिंदु नेता की है। वह अब अपनी इस छवि को भी बदलना चाहते हैं। वह देश के मुसलमान समुदाय को एक संदेश देना चाहते हैं कि चाहे पाक कितनी ही नापाक हरकतें कर ले मगर भारत की ओर से युद्ध की पहल कभी नहीं होगी।
- जिस समय नरेंद्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को निमंत्रण दिया तो उन्होंने अपनी एक नई छवि दुनिया के सामने पेश की। दुनिया के बीच एक नया संदेश गया कि प्रधानमंत्री बनने के बाद कट्टर सोच वाले मोदी और बीजेपी में शायद परिवर्तन आया है। अब मोदी उसी संदेश को बरकरार रहना चाहते हैं।
- भारत हमेशा से एक सभ्य देश रहा है और विशेषज्ञों के मुताबिक कोई भी सभ्य देश पहले लड़ाई की शुरुआत नहीं करता है। नरेंद्र मोदी भी इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हैं कि अगर भारत युद्ध की पहल करेगा तो अतंराष्ट्रीय समुदाय में भारत के लिए एक नकारात्मक छवि बन सकती है।
- पिछले दिनों जब भारत सरकार की ओर से पाक से होने वाली बातचीत को कैंसिल करने का फैसला लिया गया तो इसे पाक को दी गई कड़ी चेतावनी के तौर पर देखा गया। मोदी आने वाले कुछ दिनों के अंदर पाक को इस तरह की कड़ी चेतावनी देकर देशवासियों को यह संदेश दे सकते है कि पाक की ओर से होने वाली किसी भी नापाक हरकत पर वह खामोश नहीं बैठने वाले हैं।
- अफगानिस्तान से अगले कुछ माह के अंदर अमेरिकी फौज का एक बड़ा हिस्सा चला जाएगा, उसके बाद देश के सामने चुनौतियां दोगुनी हो जाएंगी। नरेंद्र मोदी शायद सेनाओं और पैरमिलिट्री फोर्सेज को उन चुनौतियों से निबटने के लिए मजबूत बनाने की रणनीतियों पर ध्यान देना चाहते हैं।












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