एलसीए तेजस में ईंधन भरेगी रक्षा मंत्री पार्रिकर की बेंगलुरु यात्रा
बेंगलुरु। डीआरडीओ प्रमुख डॉक्टर अविनाश चंदर को उनके पद से हटाने के बाद और इसकी जिम्मेदारी लेने के दो दिन बाद रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर बेंगलुरु पहुंचे। शनिवार की सुबह बेंगलुरु पहुंचने के बाद रक्षा मंत्री ने यहां कई अहम प्रोजेक्ट्स के बारे में जानकारी ली। सूत्रों की मानें तो इस दौरान डीआरडीओ प्रमुख डॉक्टर अविनाश चंदर इस दौरान मौजूद नहीं रहेंगे। रक्षा मंत्री शनिवार शाम वापस लौट जाएंगे।

मीडिया से बातचीत की नहीं इजाजत
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों की ओर से वनइंडिया को जो जानकारी हासिल हुई उसके मुताबिक रक्षा मंत्रालय, जो इस समय बेहतरीन वैज्ञानिकों की कमी से जूझ रहा है, उसकी ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं कि पार्रिकर अपने इस एक दिवसीय दौरे पर किसी भी तरह से मीडिया के साथ कोई बातचीत नहीं करेंगे।
माना जा रहा है कि वह अपने एकदिवसीय दौरे पर एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) और हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) का दौरा कर सकते हैं।
तेजस के बारे में जानकारी
पार्रिकर इस समय कई अहम परियोजनाओं पर अपनी नजरें रखें हुए हैं। बेंगलुरु आने के बाद वह लाइट कॉम्बेट एयरक्राफ्ट यानी एलसीए तेजस के लिए बनाई एंपावर्ड कमेटी के साथ एक मीटिंग करेंगे। इस दौरान वह इसकी प्रगति से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं।
रक्षा मंत्री पार्रिकर रक्षा कार्यक्रम से जुड़े हर मसले को देख रहे हैं। उनका प्राथमिक लक्ष्य इस बात को देखना है कि क्या इन रक्षा परियोजनाओं को किसी तरह की अतिरिक्त मदद की जरूरत है।
रक्षा मंत्री इस बात को लेकर काफी गंभीर है कि किसी भी तरह से कोई अहम परियोजना किसी मदद के न मिल पाने की वजह से ज्यादा समय के लिए न लटक पाए।

पार्रिकर के लिए प्रजेंटेशन
वहीं दूसरी ओर एडीए में पार्रिकर को तेजस परियोजना से जुड़ी एक खास प्रजेंटेशन दी जा सकती है। तेजस की एंपावर्ड कमेटी को एयरफोर्स प्रमुख हेड करते आए हैं लेकिन इस बार इसका जिम्मा रक्षा मंत्री ने संभाला है।
इस दौरान रक्षा मंत्री अभी तक की उपलब्धियों पर एक नजर डालेंगे। साथ ही वह इसके फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस यानी एफओसी से जुड़े बिंदुओं के बारे में भी जानकारी लेंगे। इस दौरान उनके साथ वायुसेना प्रमुख अरुप राहा भी मौजूद रहेंगे।
आपको बता दें कि पार्रिकर ने पिछले माह ही बयान दिया है कि तेजस को वर्ष 2015 के अंत तक एफओसी दे दी जाएगी। उम्मीद है कि इसी मकसद से वह इस परियोजना में तेजी लाने से जुड़े अपने कुछ बिंदुओं को बेंगलुरु में साझा करेंगे।
तेजस का एक छोटा सा इवेंट
तेजस के अलावा पार्रिकर डीआरडीओ के एरो-क्लस्टर की प्रगति के बारे में भी जानकारी लेंगे। कुछ खास परियोजनाएं जैसे प्रेइंग प्लेन यानी एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम, रुस्तम यूएवी, निर्भय मिसाइल, आने वाली परियोजनाओं के लिए इंजन और एमसीएस के बारे में रक्षा मंत्री जानकारियां लेंगे।
इसके अलावा वह भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, बीईल और भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड बीईएमएल का दौरा भी करेंगे।
माना जा रहा है कि तेजस से जुड़ा भी छोटा सा इवेंट रक्षा मंत्री के इस एक दिवसीय दौरे को खास बनाएगा। पार्रिकर को इस दौरान एचएएल के हेलीकॉप्टर की मैन्यूफैक्चरिंग से जुड़ी क्षमताओं का भी प्रदर्शन किया जाएगा। वह अपने इस दौरे पर एलसीए सीरिज प्रोडक्शन (एसपी) का दौरा भी कर सकते हैं। इस मौके पर इंडियन एयरफोर्स को एसपी-1 तेजस सौंपा जा सकता है।
इंडियन एयरफोर्स के एक अधिकारी की ओर से जो जानकारी वनइंडिया को दी गई है उसके मुताबिक यह सिर्फ एक प्रतीकात्मक मौका है क्योंकि इस एयरक्राफ्ट ने अभी तक चार फ्लाइट्स को पूरा कर लिया है।
रक्षा मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट
वहीं दूसरी ओर एचएएल की ओर से रक्षा मंत्रालय को एक रिपोर्ट भेजी गई है। इस रिपोर्ट में एचएएल ने तेजस की उत्पादन क्षमता को प्रति वर्ष आठ से बढ़ाकर 16 करने का प्रस्ताव दिया गया है।
एचएएल निदेशक की ओर से बताया गया है कि एचएएल ने जो प्रस्ताव मंत्रालय को सौंपा है उस पर करीब 1200 करोड़ की लागत आएगी और उम्मीद है कि इसकी प्रक्रिया अगले 30 माह के अंदर पूरी हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि कंपनी को इसके लिए सरकार से किसी भी तरह से आर्थिक मदद की जरूरत नहीं है। बल्कि कंपनी खुद 50 प्रतिशत लागत वहन कर बाकी बची 25 प्रतिशत लागत को इंडियन एयरफोर्स और नेवी से हासिल रखने की उम्मीद करती है।
एचएएल के पेटेंट्स और उसकी उपलब्धियां
पार्रिकर के इस दौरे पर उन्हें पिछले दो वर्षों के दौरान एचएएल ने पेटेंट्स के तौर पर जितनी उपलब्धियां हासिल की हैं, उसके बारे में जानकारी भी दी जाएगी। एचएएल के निदेशक के मुताबिक वर्ष 2012-2013 में उसे 71 पेटेंट हासिल किए तो वर्ष 2013-2014 में यह 209 तक हो गया।
वहीं 2014-2015 में इसने 773 पेटेंट फाइल किए। यह आंकड़ें बताते हैं कि एचएएल कई इलाकों पर अपना ध्यान लगा रहा है। पार्रिकर को इस दौरान तेजस, ध्रुव और एलसीएच की उड़ान को देखने का मौका भी मिलेगा।












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