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Exclusive: धर्म परिवर्तन पर हर साल खर्च होते हैं 10,500 करोड़!

नई दिल्‍ली। आगरा में जबसे 200 मुसलमानों के धर्मांतरण, जिसे कुछ लोग 'घर वापसी' भी कह रहे हैं, की खबर आई है, देश में हंगामा मचा हुआ है। संसद में दो दिनों से यही बहस का मुद्दा बना हुआ है। इस बीच हम आपको एक ऐसे सच से रूबरू करवाने जा रहे हैं जिसे सुनने के बाद आपके होश उड़ जाएंगे। क्रिश्चियन मिशनरीज हर साल 10,500 करोड़ रुपए सिर्फ धर्मांतरण पर खर्च करती हैं।

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सरकार के पास पूरी जानकारी

सरकार के पास कुछ ऐसी रिपोर्ट्स हैं जिनके मुताबिक भारत में कुछ एनजीओ को दान देने में मिशनरीज का नाम सबसे ऊपर है। चार एनजीओ को पूरे देश से धर्मांतरण के नाम पर करीब 10500 करोड़ रुपए तक दिए जाते हैं।

यह पैसा अमेरिका, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड्स, स्‍पेन और इटली से आता है। अमेरिकन वेद के लेखक फिलिप गोल्‍डबर्ग की मानें तो इसे धर्मांतरण नहीं बल्कि जबर्दस्‍ती कहना चाहिए। उनके मुताबिक इससे साफ होता है कि कैसे लोगों पर उनके विश्‍वास के बजाय सिर्फ संख्‍या बढ़ाने के लिए दबाव डाला जाता है।

1,000 लोगों का धर्म परिवर्तन और सिर्फ एक कंप्‍लेंट

इंटेलीजेंस ब्‍यूरो की मानें तो रिपोर्ट पर पिछली सभी सरकारों ने आंखें बंद रखीं। इन मिशनरीज के पास राजनेताओं का मुंह बंद करने का भी पैसा है। वहीं इस बात से यह भी पता चलता है कि यह सारा काम कानून को ताक पर रख किया गया।

इससे साफ होता है कि लोगों को जबरर्दस्‍ती धर्मांतरण के लिए मजबूर किया गया और जिसके लिए उन्‍हें सजा मिलनी चाहिए। वहीं इतने ज्‍यादा पैसे का लालच उन्‍हें दिया गया कि कोई भी आगे आकर शिकायत नहीं करेगा।

आईबी के अधिकारी के मुताबिक हर वर्ष करीब 1,000 लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जाता है लेकिन सिर्फ एक ही शिकायत दर्ज होती है। मिशनरीज लोगों को लालच देकर उनकी मजबूरी का फायदा उठाती हैं और उनके भरोसे के साथ खेलती हैं।

एनजीओ को भेजे जाते हैं पैसे

वर्ष 2011 में कई एजेंसियों की ओर से की गई पड़ताल में पता लगा कि भारत में गलत तरीके से पैसा भेजा जा रहा है जिसका मकसद सिर्फ धर्मांतरण कराना है। कई एनजीओ के लिए इस रकम को भेजा जा रहा था।

इस रकम में काफी बड़ा हिस्‍सा ऐसा था जिसका कोई अकाउंट ही नहीं था। जब इसकी पड़ताल की गई तो पता चला कि कई तरह से इस रकम को भेजा गया था। जब एनजीओ से सवाल किए गए तो उनके पास कोई सही जवाब ही नहीं था।

उनकी ओर से कई तरह के विरोध तो किए गए लेकिन इस बात का जवाब नहीं दिया गया कि उन्‍हें यह पैसा कहां से मिला। वह इस बात को लेकर एजेंसियों को संतुष्‍ट नहीं कर सके कि इस रकम का उपयोग धर्मांतरण, विरोध प्रदर्शन या फिर मनी लॉड्रिंग के लिए नहीं किया गया था।

बेंगलुर इनीशिएटिव फॉर रिलीजियस डायलाग यानी बर्ड की ओर से एक सर्वे कराया गया जो इस तरह के धर्मांतरणों पर आधारित था। इस सर्वे में जो सच सामने आया उसके मुताबिक ईसाई धर्म का प्रचार करने वालों की ओर से इस बड़े स्‍तर पर धर्मांतरण की मार्केटिंग स्‍ट्रैटेजी को आगे बढ़ाया गया।

सर्वे के मुताबिक कुछ मिशनरीज की ओर से काफी आक्रामक तरीके से मार्केटिंग की गई थी। यह मिशनरीज धर्मांतरण के लिए गलत तरीकों का प्रयोग कर रही थीं।

वह लोगों को धर्मांतरण के लिए लालच देती और फिर जबर्दस्‍ती इस काम को अंजाम देती। ये मिशनरीज धर्म के लिए नहीं बल्कि अपने फायदे के लिए यह काम कर रही थीं।

भोले भाले लोगों को फंसाना

कई रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई कि अपनी इस चाल से इन मिशनरीज ने सीधे सादे लोगों को अपना शिकार बनाया। गोल्‍डबर्ग के मुताबिक इस तरह के कट्टरपंथियों को अमेरिका की ओर से समर्थन मिल रहा था।

उन्‍होंने इस ओर भी ध्‍यान दिलाया कि नौकरी के नाम तक पर कुछ लोगों का धर्म परिवर्तन कराया गया। अगर वह इसससे मना करते तो उन्‍हें धमकी दी जाती कि उनकी नौकरी चली जाएगी।

वहीं इस बात के भी सुबूत मिले हैं कि कुछ लोग साधुओं का भेष धरते फिर सीधे लोगों के पास जाकर उनसे बोलते कि हिंदु भगवान जीसस क्राइस्‍ट का बिगड़ा हुआ स्‍वरूप हैं।

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