कोविड से हुई मौतों में अनुग्रह मुआवजे का भुगतान किया जाए भले ही मृत्यु प्रमाण पत्र में इसका उल्लेख न हो- SC
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा कि कोरोना से हुई मौत के मामले में उसके परिजन को 50 हजार रुपए का भुगतान किया जाए, भले की मृत्यु प्रमाण पत्र में मृत्यु का कारण कोरोना दर्ज हो या न हो।
नई दिल्ली, 4 अक्टूबर। सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को कोरोना से हुई मौतों के लिए अनुग्रह मुआवजे के भुगतान को नियंत्रित करने के आदेश पारित किए। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच ने केंद्र की इस दलील को स्वीकार कर लिया कि मृतक के अगले परिजनों को 50,000 रुपए का भुगतान किया जाएगा। कोर्ट ने कहा, 'मृतक के अगले परिजनों को 50,000 रुपये की राशि का भुगतान किया जाएगा और यह विभिन्न परोपकारी योजनाओं के तहत केंद्र और राज्य द्वारा भुगतान की गई राशि से अधिक होगी।'

कोर्ट ने कहा कि राज्य को इस आधार पर व्यक्ति को लाभ देने से इनकार नहीं करना चाहिए कि मृत्यु प्रमाण पत्र में मृत्यु के कारण का उल्लेख कोरोना के रूप में नहीं किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुआवजे के लिए कोरोना का मामला वह है जिसमें मरीज का आरटीपीसीआर टेस्ट का निदान किसी बाहरी क्लीनिक या रोगी सुविधा केंद्र में किया गया था। यह परीक्षण मृ्त्यु की तारीख के 30 दिनों के भीतर होना चाहिए। इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि कोरोना के ऐसे मामले जिनका समाधान नहीं हुआ है और जहां व्यक्ति की घर या अस्पताल में मृत्यु हो जाती है, वह भी कोरोना से हुई मौत का मामला होगा।
अदालत ने रेखांकित किया कि यदि मृतक के परिवार का सदस्य संबंधित अधिकारी को इस बात की संतुष्टि दे देता है कि व्यक्ति की मौत कोरोना से ही हुई है तो कोई भी राज्य 50 हजार का अनुग्र मुआवजा देने से इंकार नहीं कर सकता। भले की मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत का कारण कोरोना अंकित हो या नहीं।
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यह आदेश एक याचिका पर पारित किया गया था जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों को उन लोगों के परिवार के सदस्यों को अनुग्रह मुआवजा देने का निर्देश देने की मांग की गई थी, जिन्होंने कोरोना के बाद और कोविड जटिलताओं के बाद दम तोड़ दिया।
कोर्ट ने कहा मौत का कारण कोरोना के रूप में प्रमाणित होने के 30 दिन के भीतर इस राशि का भुगतान राज्य आपदा राहत कोष से करना होगा। कोर्ट ने अनुग्रह सहायता के रूप में दी जाने वाली राशि पर निर्णय लेने का अधिकार एनडीएमए के विवेक पर छोड़ दिया था, जिसने अनुग्रह राशि के रूप में 50 हजार रुपए की राशि तय की थी।












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