पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 के बारे में वो हर जानकारी जो आपके लिए ज़रूरी है
पंजाब में अब सभी की निगाहें 2022 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं.
क्या अमरिंदर सिंह के हटने से कांग्रेस को नुक़सान होगा या पार्टी एक बार फिर सत्ता में लौटेगी?
क्या शिरोमणि अकाली दल इस बार अपनी खोई हुई राजनीतिक ज़मीन पर फिर से दबदबा कायम कर पाएगा?
क्या इस बार राज्य में आम आदमी पार्टी का कोई जादू चलने वाला है या फिर से ये राजनीतिक टकराव बस कांग्रेस और अकाली दल के बीच ही रह जाएगा?
ऐसे कई सवाल आपके मन में होंगे. लेकिन इन पर चर्चा करने से पहले ये ज़रूरी है कि हम पंजाब विधानसभा चुनाव के पूरे समीकरण को समझ लें.
इसलिए, हम इस रिपोर्ट में ऐसे ही कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देने जा रहे हैं, जो आपके लिए बेहद अहम हो सकते हैं.
पंजाब विधानसभा चुनाव कब होंगे?
पंजाब विधानसभा चुनाव, साल 2022 के फ़रवरी और मार्च महीनों हो सकते हैं. ये चुनाव, 16वीं पंजाब विधानसभा के लिए 117 सीटों पर होंगे.
पिछले विधानसभा चुनाव 2017 में हुए थे जिसकी सीमा 17 मार्च, 2022 को समाप्त होने वाली है (कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 17 मार्च, 2017 को पंजाब के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी).
देश के अन्य राज्यों की तरह पंजाब में भी हर पांच साल में चुनाव होते हैं.
कितने हैं चुनाव क्षेत्र और क्या है बहुमत का आंकड़ा?
पंजाब विधानसभा में 117 विधानसभा चुनाव क्षेत्र हैं.
विधानसभा चुनाव जीतने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को 59 का आंकड़ा हासिल करना होता है.
इस तरह जो भी पार्टी चुनाव में 59 या इससे अधिक सीटें जीत लेती है, वो पंजाब में अपनी सरकार बनाती है.
- पंजाब: चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस की नैया संभलेगी या डूबेगी?
- पंजाब: बीजेपी में जाएंगे या नई पार्टी बनाएंगे? अब क्या करेंगे कैप्टन अमरिंदर सिंह?
कौन हो सकते हैं मुख्य उम्मीदवार?
कांग्रेस
अमरिंदर सिंह - पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री रहे. अमरिंदर पटियाला के शहरी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ते हैं. वो पिछले साढ़े 4 साल से पंजाब की सत्ता संभाल रहे थे और कुछ दिन पहले ही बड़े फेरबदल के चलते उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया. फ़िलहाल कैप्टन का अगला क़दम क्या होगा इस पर सभी की नज़रें बनी हुई हैं.
नवजोत सिंह सिद्धू - पंजाब कांग्रेस की बागडोर संभालने के बाद से सिद्धू का क़द और बढ़ गया है और अब अमरिंदर सिंह भी मुख्यमंत्री पद से हट चुके हैं. अगर कांग्रेस सरकार वापस आती है तो सिद्धू को एक बड़ी भूमिका में देखने की उम्मीद की जा सकती है.
चरणजीत सिंह चन्नी - पंजाब में कांग्रेस ने नए मुख्यमंत्री के तौर पर चरणजीत सिंह चन्नी को चुना है और इसके साथ ही कांग्रेस ने राज्य में अपने लिए दलित वोट बैंक मज़बूत करने की ओर क़दम बढ़ा लिए हैं. ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में भी चन्नी की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है.
परगट सिंह - ओलंपियन परगट सिंह को अभी तक पंजाब सरकार में कोई अहम पद नहीं मिला था, लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू से उनकी नज़दीकियों के चलते उन्हें पंजाब कांग्रेस का महासचिव नियुक्त किया गया है. इसी तरह आगे भी उन्हें अहम भूमिका मिलने की उम्मीद की जा सकती है.
सुखपाल सिंह खैरा - आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाले सुखपाल खैरा एक अच्छे वक्ता हैं, लेकिन उन्हें काफ़ी आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ रहा है.
सुनील जाखड़ - पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और 2019 के लोकसभा चुनाव में गुरदासपुर निर्वाचन क्षेत्र से बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने वाले सुनील जाखड़ भी कांग्रेस का एक महत्वपूर्ण चेहरा हैं.
शिरोमणि अकाली दल
प्रकाश सिंह बादल - 5 बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके प्रकाश सिंह बादल अगर इस बार भी चुनावी मैदान में उतरते हैं तो उन्हें प्रमुख उम्मीदवारों की सूची में शामिल किया जाएगा.
सुखबीर सिंह बादल - शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल भले ही वर्तमान में सांसद हैं, लेकिन वो राज्य विधानसभा चुनावों के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और अकाली दल का प्रमुख चेहरा हैं.
हरसिमरत कौर बादल - वो केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे चुकी हैं. हो सकता है कि वो भी पंजाब विधानसभा चुनावी क्षेत्र का हिस्सा हों. हालांकि उन्हें लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है.
बिक्रमजीत सिंह मजीठिया - सुखबीर सिंह बादल के साले और हरसिमरत कौर बादल के भाई बिक्रमजीत सिंह मजीठिया पर भी नज़रें रहेंगी.
आम आदमी पार्टी
भगवंत मान - भगवंत मान आम आदमी पार्टी के अकेले सांसद हैं, लेकिन पूरी उम्मीद की जा सकती है कि वो इस विधानसभा चुनाव में बतौर उम्मीदवार उतरेंगे.
कुंवर विजय प्रताप सिंह - पंजाब पुलिस के पूर्व आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह, पुलिस से समय से पहले सेवानिवृत्ति के बाद आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए हैं. बेअदबी मामले की जांच में उनकी अहम भूमिका रही है.
हरपाल सिंह चीमा - केजरीवाल ने सुखपाल सिंह खैरा से विरोधी पक्ष के नेता की पदवी लेकर हरपाल सिंह चीमा को सौंप दी थी.
बलजिंदर कौर - आम आदमी पार्टी में महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने वाली बलजिंदर कौर भी पार्टी का अहम चेहरा हैं.
अनमोल गगन मान - जानी-मानी पंजाबी गायिका अनमोल गगन मान वर्तमान में पंजाब की राजनीति में एक नया लेकिन बहुत सक्रिय चेहरा हैं. पार्टी आलाकमान पहले ही उन्हें खरड़ से उम्मीदवार घोषित कर चुकी है.
मुख्य विधानसभा क्षेत्र कौन से होंगे?
• पटियाला (शहरी) - कैप्टन अमरिंदर सिंह का निर्वाचन क्षेत्र
• लाम्बी - प्रकाश सिंह बादल का निर्वाचन क्षेत्र
• जलालाबाद - सुखबीर सिंह बादल का निर्वाचन क्षेत्र
• अमृतसर (पूर्व) - नवजोत सिंह सिद्धू का निर्वाचन क्षेत्र
• डेरा बाबा नानक - सुखजिंदर सिंह रंधावा का निर्वाचन क्षेत्र
पंजाब विधानसभा चुनाव में क्या होंगे मुख्य मुद्दे?
कृषि क़ानूनों का विरोध - केंद्र सरकार की ओर से बनाए गए तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ विरोध कर रहे किसानों को दिल्ली की सीमा पर बैठे हुए अब नौ महीने से भी ज़्यादा का समय हो चुका है. इन्हीं क़ानूनों की वजह से अकाली दल ने बीजेपी से अपना दशकों पुराना गठबंधन तोड़ा है.
बेअदमी मामले में न्याय न मिलना - बेअदबी मामले में अभी भी न्याय का इंतज़ार है. नवजोत सिंह सिद्धू ने इस मुद्दे पर अपनी ही सरकार को घेरा और नतीजा सबके सामने है.
बेरोज़गारी - कैप्टन का 'घर-घर नौकरी' का वादा कई बार पंजाब की राजनीति में भूचाल ला चुका है.
इस सभी मुद्दों के अलावा नशा, खनन और बिजली के मुद्दे भी इस विधानसभा चुनाव में अहम होंगे.
2017 के चुनावी परिणाम क्या कहते हैं?
वर्तमान में राज्य सरकार का नेतृत्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी कर रहे हैं. इससे पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री पद पर आसीन थे.
2017 के विधानसभा चुनावों में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पंजाब के 117 विधानसभा क्षेत्रों में से 77 पर जीत हासिल की थी.
जबकि पंजाब चुनावों में पहली बार उतरी आम आदमी पार्टी 20 सीटें जीतकर राज्य की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई थी.
कांग्रेस की इस बड़ी जीत ने पंजाब की पारंपरिक पार्टी शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन को राज्य में तीसरे स्थान पर ला कर खड़ा कर दिया था. शिरोमणि अकाली दल को 15 और बीजेपी को 3 सीटें मिली थीं.
लोक इंसाफ़ पार्टी ने दो सीटों पर जीत हासिल की थी.
लगभग तीन दशकों से बीजेपी की सहयोगी रही शिरोमणि अकाली दल ने, साल 2020 में केंद्र सरकार की ओर से पारित तीन कृषि क़ानूनों के विरोध में बीजेपी से अलग होने का फ़ैसला किया.
इसके बाद शिरोमणि अकाली दल ने बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया.
आम आदमी पार्टी ने 2017 में लोक इंसाफ पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था, लेकिन बाद में गठबंधन टूट गया था.
• 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को 38.5 फ़ीसदी (59,24,995) वोट मिले थे.
• शिरोमणि अकाली दल को 25.3 फ़ीसदी (38,98,161) वोट मिले थे.
• आम आदमी पार्टी को 23.8 फ़ीसदी (36,59,266) वोट मिले थे.
• बीजेपी को 5.3 प्रतिशत (8,19,927) वोट मिले थे.
यदि पंजाब में 2017 के चुनाव परिणाम के दौरान मालवा, माझा और दोआबा के समीकरण को समझना हो तो आंकड़े इस प्रकार हैं:
• मालवा - कांग्रेस (40), आम आदमी पार्टी (18), शिरोमणि अकाली दल (8), भारतीय जनता पार्टी (1), लोक इंसाफ़ पार्टी (2)
• माझा - कांग्रेस (22), शिरोमणि अकाली दल (2), भारतीय जनता पार्टी (1)
• दोआबा - कांग्रेस (15), शिरोमणि अकाली दल (5), आम आदमी पार्टी (2), भारतीय जनता पार्टी (1)
पिछले विधानसभा चुनाव के मुक़ाबले इस बार अलग क्या होगा?
चुनावों से महज़ कुछ समय पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़े और चरणजीत सिंह चन्नी के मुख्यमंत्री चुने जाने से कांग्रेस पार्टी में हलचल का माहौल है. कांग्रेस ने दलित मुख्यमंत्री चुनकर दलित वोट बैंक को रिझाने की कोशिश की है. फ़िलहाल कैप्टन के भी अगले क़दम का इंतज़ार हो रहा है.
दूसरी तरफ़, अकाली दल इस बार अपनी दशकों पुरानी सहयोगी पार्टी बीजेपी से अलग हो गया है और वो बहुजन समाज पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगा. अकाली दल ने घोषणा की है कि अगर पार्टी 2022 के विधानसभा चुनाव जीतती है, तो उपमुख्यमंत्री एक दलित होगा. हालांकि कांग्रेस पहले ही इससे बड़ा दांव खेल चुकी है.
पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप का साथ आम आदमी पार्टी के लिए वरदान साबित हो सकता है.
ये भी पढ़ें:क्या कांग्रेस को चुनौती दे पाएगा पंजाब में अकाली दल-बसपा गठजोड़?
EVM और VVPAT क्या है?
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) एक ऐसी मशीन है जिस पर उम्मीदवारों के नाम और पार्टी के चुनाव चिह्न बने होते हैं.
उम्मीदवारों के नाम उन भाषाओं में लिखे जाते हैं जो निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक बोली जाती हैं.
निरक्षर मतदाताओं के लिए प्रत्येक उम्मीदवार की पहचान के लिए चुनाव चिन्ह भी होते हैं. जैसे कि कमल बीजेपी का चुनाव चिन्ह है और हाथ कांग्रेस का.
जब आप वोट देने के लिए तैयार हों, तो अपने पसंदीदा उम्मीदवार के नाम के आगे वाले नीले बटन को दबाएं.
थोड़ी देर रुकिए, केवल बटन दबाने का मतलब ये नहीं है कि आपका वोट दर्ज हो गया है.
ये तभी होगा जब आप एक बीप की आवाज़ सुनेंगे और कंट्रोल यूनिट की लाइट बंद हो जाएगी.
अब आपने अपना वोट दे दिया है! वोट देने के बाद मतदान अधिकारी की ओर से ईवीएम के "क्लोज़" बटन को दबाने के बाद, मशीन वोटों को रिकॉर्ड करना बंद कर देती है ताकि उसके साथ कोई छेड़छाड़ न की जा सके.
इसे मोम और सुरक्षात्मक पट्टी से सील कर दिया जाता है और चुनाव आयोग की ओर से सीरियल नंबर दिया जाता है.
मतगणना शुरू होने पर ही इसे खोला जाता है.
मतगणना शुरू होने से पहले मतगणना कर्मचारी और उम्मीदवार एजेंट इसकी जांच करते हैं. ये सारा कार्य "रिटर्निंग ऑफ़सर" की देखरेख में होता है.
जब रिटर्निंग अफ़सर पुष्टि कर लेता है कि वोटिंग मशीन से छेड़छाड़ नहीं की गई है, तो वह "रिज़ल्ट" बटन को दबा देता है.
कंट्रोल यूनिट पर दिखाई दे रहे, प्रत्येक उम्मीदवार के लिए डाले गए वोटों की समीक्षा अफ़सर द्वारा की जाती है.
पुष्टि के बाद, रिटर्निंग अफ़सर परिणाम वाले पत्र पर हस्ताक्षर करता है और उसे चुनाव आयोग को सौंप देता है.
चुनाव आयोग तुरंत इस परिणाम को अपनी वेबसाइट पर भी प्रदर्शित करता है.
VVPAT (वोटर वेरिफ़ाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) सिस्टम के तहत वोट देने के तुरंत बाद कागज़ की एक पर्ची बनाई जाती है. जिस पर, उस उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिन्ह होता है जिसे वोट दिया गया है.
ये व्यवस्था इसलिए है ताकि किसी भी विवाद की स्थिति में ईवीएम के वोट के साथ पर्ची का मिलान किया जा सके.
ये पर्ची ईवीएम से जुड़ी ग्लास स्क्रीन (शीशे की स्क्रीन) पर 7 सेकेंड तक दिखाई देती है.
इस मशीन को साल 2013 में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड द्वारा डिज़ाइन किया गया था.
कौन है योग्य मतदाता और आप कैसे मतदान कर सकते हैं?
मतदान करने के लिए आपकी आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए.
मतदान केंद्र पर पहुंचने के बाद आपको छोटे-छोटे समूहों में अंदर भेजा जाएगा. आपकी बारी आने पर मतदान अधिकारी आपके पहचान पत्र की जांच करेगा.
एक दूसरा अधिकारी आपकी उंगली पर न मिट सकने वाली स्याही लगाएगा. इसके बाद आप मतदाता रजिस्टर पर हस्ताक्षर करेंगे.
तीसरा मतदान अधिकारी आपकी मतदाता पर्ची लेगा और ईवीएम के कंट्रोल यूनिट पर बटन दबाएगा जिस पर "बैलट" लिखा होता है.
अब आप मतदान के लिए तैयार हैं.
आपको वोटिंग कंपार्टमेंट की तरफ़ भेजा जाएगा, जहां आपको ईवीएम मशीन दिखाई देगी जो आपके वोट को रिकॉर्ड करेगी.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












Click it and Unblock the Notifications