कोरोना से ठीक होकर भी 6 महीने तक रहती हैं ऐसी कई परेशानियां, अमेरिका में हुई रिसर्च
नई दिल्ली, 7 जून: कोरोना के बाद सेहत संबंधी होने वाली परेशानियों को लेकर अमेरिका के वॉशिंगटन यूनिर्सिटी में एक बहुत बड़ा शोध हुआ है, जिसमें यह बात सामने आई है कि कई मरीजों में कम से कम 6 महीने तक स्वास्थ्य संबंधी मामूली से लेकर गंभीर समस्याएं तक देखने को मिल सकती हैं। सबसे चिंता की बात ये है कि स्वस्थ होने के बाद लोग आमतौर पर राहत महसूस करते हुए निश्चिंत होने लगते हैं, लेकिन कई बार बाद की समस्या जानलेवा तक साबित हो जा रही हैं। इसलिए रिसर्च का नतीजा यही है कि पोस्ट-कोविड परेशानियों को बिल्कुल ही हल्के में नहीं लें और उसके लिए हर तरह का एहतियात बरतें।

पोस्ट-कोविड समस्याओं से सावधान!
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत में आज की तारीख तक कोविड संक्रमितों की कुल तादाद लगभग 2.90 करोड़ तक पहुंच चुकी। इनमें से 2.71 करोड़ के करीब लोग इससे उबर भी चुके हैं। लेकिन, हकीकत ये है कि स्वस्थ्य होने के बावजूद कुछ लोगों को कई तरह की परेशानियां देखने को मिलती हैं। कुछ की कमजोरी ही खत्म नहीं होती तो किसी को कोई भी खाना ही अच्छा नहीं लगता। उदाहरण के लिए 63 साल की हल्के लक्षणों वाली एक कोविड पॉजिटिव महिला ने 12 दिन बाद सांस में दिक्कत की शिकायत की। उसकी रिपोर्ट निगेटिव भी आगई, लेकिन हार्ट अटैक के चलते उसने दम तड़ दिया। 50 साल के एक गंभीर कोरोना मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज मिलने के बाद ब्रेन में एक क्लॉटिंग हुई और सर्जरी के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। हमें आए दिन ऐसी खबरें मिल रही हैं। पोस्ट-कोविड समस्याओं से परेशान होने वाले लोगों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अकेले अहदाबाद में ही नॉन-कोविड मरीजों के लिए उपलब्ध 70 फीसदी आईसीयू बेड और वेंटिलेटर कोरोना से ठीक हुए मरीजों के इलाज में इस्तेमाल हो रहा है।
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कोरोना के 6 महीने बाद तक रह सकती हैं परेशानियां
अब वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पोस्ट-कोविड बीमारियों को लेकर जो रिसर्च किया है, वह पूरी दुनिया को सावधान करने वाला है। इस रिसर्च का सबसे बड़ा नतीजा ये रहा है कि कई कोविड मरीजों में कम से कम 6 महीने तक स्वास्थ्य संबंधी कई गंभीर परेशानियां देखने को मिली हैं। इन समस्याओं को हम शरीर के विभिन्न हिस्सों के मुताबिक बांटकर रखने की कोशिश कर रहे हैं-
- रेस्पिरेटरी सिस्टम: खांसी की शिकायत बने रहना, सांस की कमी और खून में कम ऑक्सीजन लेवल
- नर्वस सिस्टम: स्ट्रोक, सिरदर्द, यादाश्त संबंधी दिक्कतें, गंध और स्वाद का पता नहीं चल पाना
- मेंटल हेल्थ: चिंता, अवसाद, नींद की समस्या और मादक द्रव्यों का सेवन
- मैटाबोलिज्म: डायबिटीज संबंधी दिक्कतें, मोटापा और कोलेस्ट्रोल बढ़ना
- कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम: एक्यूट कोरोनरी डिजीज, हार्ट फेल होना, घबराहट और दिल की धड़कनों में अनियमितता
- किडनी: एक्यूट किडनी इंजरी और किडनी संबंधी बीमारी
- पैरों और फेफड़ों में खून का थक्का जमना
- स्किन: चकत्ता और बाल झड़ना
- मांसपेशी संबंधी: जोड़ों का दर्द और मांसपेशियों की कमजोरी
- दूसरी परेशानियां: बेचैनी, थकान और खून की कमी

पोस्ट-कोविड मरीजों की भी गहन निगरानी जरूरी
भारत की बात करें तो कोविड से स्वस्थ हुए मरीजों की कुछ दिनों बाद या कई बार हफ्तों बाद भी मौत की खबरें सुनने को मिल रही हैं। बेंगलुरु के सक्रा वर्ल्ड हॉस्पिटल में मेडिकल सर्विसेज के चीफ डॉक्टर दीपक बलानी के मुताबिक पिछले एक हफ्ते में ही उन्होंने कोविड के बाद 3 से 4 मरीजों की मौत देखी है। अमेरिका के सेंट लुइस स्थित वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल के अंतरराष्ट्रीय शोध में यही बात सामने आई है कि कोविड से स्वस्थ हो चुके मरीजों के 6 महीने के दौरान मौत का जोखिम बढ़ गया है। नेचर में अप्रैल में प्रकाशित इस शोध में 87,000 से ज्यादा कोविड मरीजों और 50 लाख के करीब स्वस्थ मरीजों को शामिल किया गया। इस स्टडी के सीनियर ऑथर और मेडिसीन के एसिस्टेंट प्रोफेसर जियाद अल-अली ने नेचर से कहा है कि अब डॉक्टरों को उन मरीजों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है जिन्हें कोविड हो चुका है। वो कहते हैं, 'इन मरीजों को ज्यादा गहन और मल्टीडिसिप्लिनरी केयर की जरूरत पड़ेगी।'

डॉक्टरों और मरीज दोनों एहतियात बरतें
डॉक्टरों की चिंता मुख्य तौर पर इस बात को लेकर है कि लक्षण इतने ज्यादा तरह के हैं और कोविड के बाद वो जिस तरह से अलग-अलग रूप अख्तियार कर रहे हैं कि इलाज के लिए खास प्रोटोकॉल तय कर पाना बहुत ही मुश्किल है। कुल मिलाकर राहत की बात ये है कि अब देश में कोरोना की रफ्तार तो थमती दिख रही है और रविवार को नए संक्रमण के एक लाख से कुछ ज्यादा मामले ही सामने आए हैं और मौत की संख्या भी 2,427 रही है। लेकिन, पोस्ट-कोविड परेशानियां बहुत बड़ी चुनौती बनकर उभरी है, जिसे न तो मरीज और न ही डॉक्टरों को नजरअंदाज करना चाहिए।












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