राज्यपाल के संबोधन पर भड़के केटीआर ने की निंदा, कांग्रेस की विरासत पर उठाए सवाल
तेलंगाना में कांग्रेस की बंपर जीत के बाद बीआरएस नेता और पूर्व मंत्री केटी रामा राव ने कांग्रेस और उसके मंत्रियों का कड़ा विरोध किया है। इसके अलावा सदन में तेलंगाना राज्यपाल तमिलिसाई सौंदर्यराजन के संबोधन को पूर्व मंत्री और बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामा राव (केटीआर) की कड़ी निंदा की। राज्यपाल के बयान को केटीआर ने "राजनीतिक, बौद्धिक रूप से दिवालिया संबोधन" करार दिया।

राज्य में विकास और प्रगति की तुलना पूर्ववर्ती आंध्र प्रदेश में कांग्रेस सरकार के शासन से करते हुए केटीआर ने कहा राज्य ने 2014-23 के बीच बीआरएस शासन के तहत सभी क्षेत्रों में शानदार प्रगति की है।इसके अलावा केटीआर ने राज्यपाल के बयान की आलोचना करते हुए कहा राज्यपाल ने बीआरएस व्यवस्था के तहत जमा हुए कर्ज का हवाला दिया, लेकिन संपत्ति के मामले का उनके संबोधन में 'सुविधापूर्वक' उल्लेख नहीं किया गया।
इसके साथ ही केटीआर ने 2014 से पहले अभिभाजित आंध्र प्रदेश सत्ता में रहने के दौरान कांग्रेस की विरासत पर सवाल उठाया और टिप्पणी की कि यह क्षेत्र सूखे और निराश" की गंभीर परिस्थितियों में था।
केटीआर ने कांग्रेस को घेरते हए कहा कांग्रेस के 50 साल के शासन में न पीने का पानी था, न सिंचाई का पानी और न ही बिजली उपलब्ध थी, हमारी सरकार में 24 घंटे राज्य भर के लोगों को बिजली आपूर्ति की गई।
बीआरएस नेत केटीआर ने कहा अभिभाजित आंध्र प्रदेश में तेलंगाना में कांग्रेस के नेता पदो की खाति चुप रहे और तब भी जब तत्कालीन मुख्यमंत्री किरण कमार रेड्डी ने तने तेलंगाना को फंड देने से इनकार कर दिया।
वहीं तेलंगाना कांग्रेस की ओर से रेवंत रेडडी केटीआर पर पलटवार करते हुए कहा मुख्यमंत्री ने बीआरएस शासन के 10 वर्षों के दौरान कथित पारिवारिक शासन, सिंचाई परियोजनाओं के पूरा न होने, तेलंगाना राज्य के लिए अपने जीवन का बलिदान देने वालों के परिवारों की अनदेखी, प्रश्न पत्रों के लीक होने और अन्य विफलताओं का हवाला दिया।
सीएम रेवंत रेड्डी ने कहा हमारी सरकार प्रगति भवन जो कि तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के केसीआर के कैंप कार्यालय-सह-आधिकारिक निवास के लोहे के गेट तोड़ दिए। यह जनता द्वारा चुनी हुई सरकार है।
दिसंबर महीने में ही चुनाव परिणाम के बाद तेलंगाना में कांग्रेस की बंपर जीत के बाद सीएम बने रेवंत रेड्डी ने कहा
यह जनता की सरकार है। तब मंत्रियों को मुख्यमंत्री से मिलने की एंट्री नहीं थी। तेलंगाना आंदोलन को हवा देने वाले गद्दार (लोक गायक) की एंट्री नहीं हुई, लेकिन, आज, अगर अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाएं, कमजोर वर्ग कहते हैं कि हमें कोई समस्या है तो सरकार सुनने को तैयार है।












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