इंजीनियर्स डे 2020: पीएम मोदी समेत इन नेताओं ने एम विश्वेश्वरैया को किया याद, जानें क्यों कहलाए कर्नाटक के भगीरथ
इंजीनियर्स डे 2020: पीएम मोदी समेत इन नेताओं ने सर एम विश्वेश्वरैया को श्रद्धांजलि अर्पित की
बेंगलुरु। प्रत्येक वर्ष 15 सितंबर को इंजीनियर्स दिवस के रुप में मनाया जाता है। हर वर्ष इसी दिन भारत के महान अभियन्ता एवं भारतरत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती को इंजीनियरिंग दिवस के रुप में मनाया जाता है। भारत के प्रारंभिक इन्फ्रास्टकचर डेवलेपमेंट, शिक्षा और सामाजिक कल्याण में उनके अपार योगदान के लिए उन्हें 1955 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। कृष्णराज सागर बांध, मैसूर विश्वविद्यालय और बैंक ऑफ मैसूर की शुरुआत करने का श्रेय इन्हें ही जाता है। विश्वेश्वरैया ने 32 वर्ष की उम्र में सिंधु नदी के पानी को एक कस्बे तक पहुंचाया और कर्नाटक के भागीरथ कहलाए।
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डाक्टर एविश्वेश्वरैया का जन्म मैसूर (कर्नाटक) के कोलार जिले के चिक्काबल्लापुर तालुक में 15 सितंबर 1861 को एक तेलुगु परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम श्रीनिवास शास्त्री तथा माता का नाम वेंकाचम्मा था। उनके माता-पिता दोनों संस्कृत के प्रसिद्ध विद्वान थे। एम विश्वेश्वरैया ने अपनी प्राथमिक शिक्षा अपने गृहनगर में की लेकिन बाद में उच्च शिक्षा के लिए बेंगलुरु चले गए। आर्ट्स में अपनी स्नातक की डिग्री पूरी करने के बाद, एम विश्वेश्वरैया ने ट्रैक बदला और पुणे में कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग से सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की आज इंजीनियर्स डे के अवसर पर देश कें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत अन्य नेताओं ने सर एम विश्वेश्वरैया को श्रद्धांजलि अर्पित की।
पीएम मोदी और अमित शाह ने विश्वेश्वरैया को श्रद्धांजलि अर्पित की
नरेंद्र मोदी कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्रियों ने आज सर एम विश्वेश्वरैया को श्रद्धांजलि दी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें एक महान इंजीनियर और राजनेता बताया। अभियंता दिवस पर, शाह ने भारत के "प्रतिभाशाली और कुशल इंजीनियरों को बधाई दी जिन्होंने राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है"
पीयूष गोयल बोले- सर विश्वेशरैया ने रेवले लाइनों के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
वहीं रेलवे और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ट्विटर पर लिखा, "भारत रत्न सर एम को विश्वेश्वरैया को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और एक अनुकरणीय इंजीनियर और एक महान राष्ट्र निर्माता बताया। पीयूष गोयल ने कहा कि उन्होंने दक्षिणी भारत के कुछ हिस्सों में रेलवे लाइनों के विस्तार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सीतारमण और जावेड़कर ने ऐसे किया याद
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एम विश्वेश्वरैया को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, "भारत रत्न एम विश्वेश्वरैया को उनके जन्मदिन पर इंजीनियर के योगदान को याद किया। सीतारमन ने कहा उनका बुनियादी ढांचे के निर्माण में असाधारण योगदान महत्वपूर्ण है। प्रकाश जावड़ेकर ने एम विश्वेश्वरैया के प्रति सम्मान व्यक्त किया और "इंजीनियरिंग चमत्कारों में से एक" का एक वीडियो पोस्ट किया - भारत का पहला ऊर्ध्वाधर लिफ्ट रेलवे सी ब्रिज। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर लिखा, "महान इंजीनियर, भारत रत्न, एम विश्वेश्वरैया को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि और अभियंता दिवस पर सभी इंजीनियरों को शुभकामनाएं।"
कर्नाटक के भगीरथ एम विश्वेश्वरैया
एम विश्वेश्वरैया सिंचाई तकनीकों और बाढ़ आपदा प्रबंधन के बारे में सोचने वाले भारत के पहले इंजीनियर थे। वह बाढ़ नियंत्रण उपायों में अपने अग्रणी कार्य के लिए प्रसिद्ध हुए। मैसूर के दीवान के रूप में, एम विश्वेश्वरैया ने मैसूर साबुन फैक्टरी, बैंगलोर कृषि विश्वविद्यालय, स्टेट बैंक ऑफ़ मैसूर और मैसूर आयरन एंड स्टील वर्क्स की स्थापना की। कंपनियों ने हजारों लोगों को रोजगार दिया। उन्होंने गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज की भी स्थापना की, जिसे अब यूनिवर्सिटी विश्वेश्वरैया इंजीनियरिंग कॉलेज कहा जाता है।












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