शाबाश वृंदा ! सरकारी स्कूल की छात्रा को Engineering में स्कोर 200 / 200, छह साल पहले हुआ पिता का निधन
क्या इंजीनियरिंग जैसी परीक्षा में 100 फीसद नंबर लाना संभव है ? अगर आपका जवाब ना है तो ये खबर पढ़ें, आपकी धारणा बदल जाएगी। engineering exam 200 marks b vrinda tamil nadu
चेन्नई, 18 अगस्त : 16 वर्षीय बी वृंदा इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा में 200 में 200 नंबर स्कोर किए हैं। महज 16 साल की एज में प्रतिभा का लोहा मनवाने वाली बच्ची कई लोगों की प्रेरणा हैं। रिपोर्ट के मुताबिक किसी सरकारी स्कूल की छात्रा ने पहली बार 200 / 200 कट ऑफ स्कोर किया है। यह कोई मामूली उपलब्धि नहीं है ! छह साल पहले अपने पिता को खोने वाली वृंदा ने भावनात्मक चोट को अपनी ताकत बनाया और संकल्प से सिद्धि हासिल की। पढ़िए कामयाबी की इंस्पायरिंग स्टोरी

इंजीनियरिंग की परीक्षा में पूरे नंबर
तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले में रहने वाली बी वृंदा सरकारी स्कूल में पढ़ने के बावजूद 200 / 200 का स्कोर हासिल किया है। इंजीनियरिंग की परीक्षा में पूरे नंबर लाने वाली 16 साल की छात्रा की सक्सेस उसके परिवार और उसके शिक्षकों के लिए बहुत मायने रखती है। तमिलनाडु में शिक्षा सूचकांक में विल्लुपुरम सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले जिलों में से एक गिना गया, लेकिन इसी जिले के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली वृंदा इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा में 200 में 200 नंबर लाई हैं।

पिता के निधन के बाद भी हौसला नहीं खोया
तमिलनाडु इंजीनियरिंग एडमिशन (TNEA) में 200/200 कट-ऑफ अंक हासिल करने वाली एकमात्र छात्रा बी वृंदा 2016 में हुई एक सड़क दुर्घटना में अपने पिता को खो दिया। वृंदा एसआर गवर्नमेंट गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल, वलवनूर की छात्रा हैं।

सफलता का श्रेय एलीट स्कूल में अपने शिक्षकों को
अक्टूबर 2021 में गरीब परिवारों से आने वाले मेधावी बच्चों के लिए विशेष कोचिंग का इंतजाम किया गया था। जिला प्रशासन की ओर से 'एलीट स्कूल प्रोग्राम' के लिए चुनी गईं वृंदा और उसके शिक्षकों ने 200 / 200 नंबर लाने वाले प्रदर्शन पर प्रशंसा की है। वृंदा ने कहा, मैं अपनी सफलता का श्रेय एलीट स्कूल में अपने शिक्षकों को दूंगी क्योंकि वे मेरी मदद के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहे। उन्होंने कहा, यह गलत धारणा है कि सरकारी स्कूल के शिक्षक ठीक से पढ़ाते नहीं हैं। मुझे लगता है कि एलीट स्कूल प्रोग्राम मेरे जैसे छात्रों के लिए एक आशीर्वाद है।

पिता होते तो गर्व होता
छह साल पहले अपने पिता को खोने वाली वृंदा अपने पिता को याद कर भावुक भी हुईं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताहिक वृंदा ने कहा, "अगर मेरे पिता आज जीवित होते, तो उन्हें मुझ पर गर्व होता। वह चाहते थे कि मैं और मेरी दोनों बहनें अच्छी तरह से शिक्षित हों।" उसने यह भी कहा कि उसे अब ताने से नहीं डरना होगा कि उसे सरकारी स्कूल के छात्र आरक्षण के तहत सीट मिली है।

बच्चो को सपोर्ट करना जरूरी
वृंदा की सफलता पर शिक्षाविद के सुंदरेश्वर का मानना है कि वृंदा की उपलब्धि स्कूली शिक्षा विभाग के लिए एक सबक है। उन्होंने कहा, हमारे सरकारी स्कूल के छात्रों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है; हमें केवल अच्छा बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराकर बच्चों को सपोर्ट करने की जरूरत है। स्कूल शिक्षा विभाग को सभी जिलों में एलीट स्कूल कार्यक्रम शुरू करना चाहिए।












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