Bengal: पश्चिम बंगाल में ED का बड़ा एक्शन, इन 9 ठिकानों पर रेड से मचा हड़कंप, क्या अब खुलेंगे बड़े राज?
पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को बड़ा एक्शन लिया है। ईडी ने राज्य में 9 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। राज्य में कथित राशन घोटाले (PDS Scam) से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत यह तलाशी अभियान चलाया गया।
PTI के अनुसार, कोलकाता, बर्धमान और हाबरा सहित लगभग नौ परिसरों में तलाशी जारी रही। ये ठिकाने मुख्य रूप से आपूर्तिकर्ताओं और निर्यातकों से जुड़े हैं, जिनमें निरंजन चंद्र साहा का परिसर भी शामिल है। यह पूरी कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की जा रही है। आइए जानतें हैं केंद्रीय एजेंसी की इस कार्रवाई के पीछे की मुख्य वजह क्या है?

क्या है पूरा राशन घोटाला मामला?
ED के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला अक्टूबर 2020 में बशीरहाट पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक FIR से उपजा है। यह FIR घोड़ाडांगा लैंड कस्टम स्टेशन पर तैनात डिप्टी कमिश्नर की शिकायत पर आधारित थी। शिकायत में गरीबों के लिए आने वाले सरकारी गेहूं के बड़े पैमाने पर डायवर्जन (हेराफेरी) का आरोप लगाया गया था।
जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे
जांचकर्ताओं का आरोप है कि सरकारी राशन के गेहूं को आपूर्तिकर्ताओं, लाइसेंस प्राप्त वितरकों, डीलरों और बिचौलियों की मिलीभगत से गायब किया गया। इसके बाद इसे अवैध रूप से कई गोदामों में जमा कर दिया गया।
धोखाधड़ी का तरीका:
- पहचान छिपाना: आरोपियों ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य सरकार की मुहर लगे सरकारी बोरे बदल दिए।
- खुले बाजार में बिक्री: गेहूं को दूसरे थैलों में भरकर उसे प्राइवेट स्टॉक बताकर खुले बाजार में बेचने या एक्सपोर्ट करने की तैयारी की गई थी।
पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी और चुनाव का माहौल
इस मामले में केंद्रीय एजेंसी पहले भी बड़ी कार्रवाई कर चुकी है। ED ने पश्चिम बंगाल के पूर्व खाद्य मंत्री ज्योति प्रिय मलिक और अन्य लोगों को इसी घोटाले के सिलसिले में पहले ही गिरफ्तार किया है। यह छापेमारी ऐसे समय में हो रही है जब बंगाल में चुनावी सरगर्मी तेज है। राज्य में 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान हो चुका है, जबकि 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग होनी है।















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