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जानिए सुकमा में कैसे मिली सफलता, तुमलपाड़ा जंगल में मुठभेड़, 5-5 लाख के 3 नक्सली ढेर — बस्तर IG का बड़ा खुलासा

Encounter in Sukma News: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के तुमलपाड़ा गांव के पास सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में तीन कुख्यात नक्सली मारे गए। बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज ने बताया कि मारे गए तीनों नक्सलियों पर प्रत्येक के सिर पर 5 लाख रुपये का इनाम था।

यह ऑपरेशन छत्तीसगढ़ पुलिस की डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) और कोबरा कमांडो की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया, जो नक्सलियों की खुफिया जानकारी पर आधारित था। मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों ने भारी गोलीबारी का सामना किया, लेकिन कोई जवान घायल नहीं हुआ।

Encounter in Sukma s Tumalpada forest 3 Naxalites worth Rs 5 lakh each killed - Bastar IG reveals

घटनास्थल से हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए हैं। यह 2025 की 15वीं बड़ी सफलता है, जो केंद्र सरकार के 'नक्सल उन्मूलन अभियान' को मजबूती दे रही है। लेकिन सवाल यह है कि नक्सलवाद की जड़ें इतनी गहरी क्यों हैं, और क्या यह अंतहीन संघर्ष कभी खत्म होगा? आइए, इस एक्सप्लेनर में समझते हैं पूरी घटना, नक्सल समस्या की पृष्ठभूमि और सरकार की रणनीति।

मुठभेड़ का पूरा घटनाक्रम: खुफिया जानकारी से शुरू हुई कार्रवाई

सुकमा जिला, जो बस्तर के घने जंगलों से घिरा है, लंबे समय से नक्सलियों का गढ़ रहा है। 15 नवंबर की सुबह करीब 6 बजे, DRG और कोबरा (कमांडो बटालियन फॉर रिसल्यूशन एंड अलाइड फोर्सेस) की 50 सदस्यीय संयुक्त टीम तुमलपाड़ा गांव के पास जंगल में सर्च ऑपरेशन पर थी। खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, कोंटा और किस्टाराम एरिया कमिटी के 10-12 हार्डकोर नक्सली वहां छिपे हुए थे, जो हाल ही में बीजापुर मुठभेड़ (11 नवंबर) से बचे हुए थे।

जैसे ही टीम ने जंगल में घुसपैठ की, नक्सलियों ने अचानक AK-47, SLB और IED से हमला बोल दिया। 2 घंटे तक चली गोलीबारी में तीन नक्सली मारे गए - दो पुरुष और एक महिला। आईजी सुंदरराज ने बताया, "मारे गए नक्सलियों में हिड़मा डिवीजन के कमांडर हिड़मा, महिला कमांडर मलती और पुरुष कैडर सोमरू शामिल हैं। प्रत्येक पर 5 लाख का इनाम था।" घटनास्थल से एक AK-47, दो SLB, ग्रेनेड और IED बरामद हुए। सर्च ऑपरेशन जारी है, क्योंकि बाकी नक्सली भाग चुके हैं।

यह मुठभेड़ बस्तर में 2025 की सबसे सफल कार्रवाइयों में शुमार है। जनवरी से अब तक बस्तर डिवीजन (सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा आदि) में 207 नक्सली मारे गए हैं। लेकिन सुरक्षा बलों को भी नुकसान हुआ - 45 जवान शहीद।

नक्सलवाद क्या है? जड़ें और फैलाव - एक सरल व्याख्या

नक्सलवाद भारत की सबसे लंबी चल रही आंतरिक सुरक्षा समस्या है, जो 1967 के नक्सलबाड़ी (पश्चिम बengal) विद्रोह से शुरू हुई। यह माओवादी विचारधारा पर आधारित है, जो ग्रामीण गरीबों, आदिवासियों और मजदूरों के लिए 'क्रांति' की बात करता है। नक्सली संगठन CPI (माओइस्ट) 2004 में बना, जो 10 राज्यों के 'रेड कॉरिडोर' (लाल गलियारा) में सक्रिय है।

जड़ें क्यों गहरी?

  • आर्थिक असमानता: बस्तर जैसे क्षेत्रों में खनिज संपदा (कोयला, लोहा) है, लेकिन आदिवासी गरीबी में जी रहे। नक्सली विकास के नाम पर शोषण का आरोप लगाते हैं।
  • भूमि विवाद: वन अधिकार अधिनियम 2006 के बावजूद आदिवासियों की जमीनें कंपनियों को दी जा रही। नक्सली इसे 'कॉरपोरेट हमला' कहते हैं।
  • सुरक्षा बलों का दबाव: ऑपरेशन ग्रीन हंट (2009) से अब तक हजारों नक्सली मारे गए, लेकिन नए कैडर भर्ती हो जाते हैं।
  • फैलाव: छत्तीसगढ़ में 90% नक्सली घटनाएं बस्तर में। 2025 में 150+ हमले, 100+ नागरिक मौतें।
  • नक्सली अब शहरी नक्सल और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे। लेकिन सरेंडर पॉलिसी से 1,500+ नक्सली मुख्यधारा में लौटे।

'समर्पण-सुरक्षा-विकास' का त्रिशूल

केंद्र सरकार का लक्ष्य: 31 मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "नक्सलवाद विकास का सबसे बड़ा दुश्मन है।" छत्तीसगढ़ CM विष्णु देव साय ने बस्तर को 'शांति का क्षेत्र' घोषित किया।

मुख्य रणनीतियां:

  1. सुरक्षा अभियान: DRG (स्थानीय आदिवासी जवान), कोबरा, CRPF की संयुक्त टीमें। 2025 में 200+ कैंप स्थापित।
  2. विकास का दांव: 10,000 करोड़ का बस्तर पैकेज - सड़कें, स्कूल, अस्पताल। नरवा, गरवा, घुरवा, बारी (NGGB) योजना से सिंचाई बढ़ी।
  3. समर्पण नीति: सरेंडर करने पर 2.5 लाख + नौकरी। 2025 में 800+ सरेंडर।
  4. तकनीक का सहारा: ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी से नक्सली कैंप ट्रैक।

यह मुठभेड़ स्थानीय आदिवासियों के लिए राहत है - नक्सली लेवी वसूलते थे। लेकिन चुनौतियां बरकरार:

  • मानवाधिकार: CRPF पर 'अधिक बल प्रयोग' के आरोप।
  • विकास असमान: बस्तर में 70% गरीबी दर।
  • नक्सली जवाबी हमले: IED ब्लास्ट से 20+ जवान शहीद 2025 में।

CM विष्णु देव साय: "बस्तर में शांति लौट आई। सुरक्षा बलों को सलाम।"

  • गृह मंत्री अमित शाह: "नक्सल उन्मूलन की दिशा में बड़ा कदम। 2026 तक समाप्त।"
  • कांग्रेस नेता भूपेश बघेल: "सफलता तो है, लेकिन आदिवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।"
  • नक्सली संगठन: कोई बयान नहीं, लेकिन पोस्टरों में 'बदले' की धमकी।
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