विशेष: इमरजेंसी की दर्दनाक कहानी तवलीन सिंह की जुबानी
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। ये आकाशवाणी है और अब आप प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का राष्ट्र के नाम संदेश सुनिए... भाइयों और बहनो, राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है। इससे आतंकित होने का कोई कारण नहीं है। (The president has declared a state of Emergency. There is no need to panic.") मगर ऐसा हुआ नहीं।

आकाशवाणी पर इस ऐलान के तुरंत बाद देश गुलामी के साए में इस कदर आया कि एक काला अध्याय बन गया। 40 साल पहले आज ही के दिन भारत फिर से गुलामी की जंजीर में जकड़ गया था। इस दिन जब इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाया था तो जुल्म का दौर चल पड़ा था।
क्या आम और क्या खास, जिसने भी इमरजेंसी को देखा और जिया था, वह आपातकाल को गुलामी से भी बदतर ठहराने को तैयार हुआ। तो आईए आज इस राष्ट्रीय विपदा 'इमरजेंसी' की कहानी देश की जानी-मानी पत्रकार और लेखक तवलीन सिंह की जुबानी आपको बताते हैं।
वनइंडिया से खास बातचीत में तवलीन सिंह ने बताया कि उस दिन वो सो रही थी जब उनकी मां ने उनको इमरजेंसी की खबर दी। उन्होंने इमरजेंसी के कारणों को बताते हुए कहा कि इंदिरा को इस बात का अहसास हो चुका था कि आने वाला चुनाव वो हार जाएंगी।












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