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Emergency 50 Yrs: क्या इंदिरा गांधी ने वाकई में एक स्टेनोग्राफर के कहने पर पढ़ी थी नमाज? Fact Check

Emergency 50 Yrs: भारत के लोकतंत्र में आपातकाल को एक काला अध्याय माना जाता है। 25 जून 2025 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया था। इमरजेंसी के दौरान देश में नागरिकों के यॉसंवैधानिक अधिकार सीमित कर दिए गए थे। इतना ही नहीं लोकतांत्रिक संस्थाओं की शक्तियां घटाने से लेकर विपक्षी नेताओं को जेल में डालने का काम भी इसी दौरान किया गया था।

इंदिरा के बारे में कहा जाता है कि वह काफी अंधविश्वासी भी थीं और तरह-तरह के बाबा, तंत्र-मंत्र और मौलवियों के पास जाती थीं। एक दावा यहां तक किया जाता है कि एक स्टेनोग्राफर की वजह से इंदिरा गांधी नमाज पढ़ने लगी थीं।

Emergency 50 Yrs

Emergency 50 Yrs: क्या वाकई में इंदिरा नमाज पढ़ती थीं?

कांग्रेस को आजादी के बाद से ही बड़ी संख्या में मुस्लिम वर्ग से समर्थन मिला था और चुनावी जीत में उनकी अहम भूमिका होती थी। नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी के दौर तक भारत की विदेश नीति पर भी इस्लामिक देशों के लिए झुकाव नजर आता था। फिलिस्तीन के नेता यासिर अराफात तो इंदिरा को अपनी बहन बताते थे और उनकी अंतिम यात्रा में भी शामिल हुए थे। इंदिरा के बारे में दावा किया जाता है कि अपने करीबी सहयोगी के कहने पर उन्होंने नमाज पढ़नी शुरू की थी, जानें पूरा सच।

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- इंदिरा के सबसे करीबी आरके धवन जो पेशे से पहले एक स्टेनोग्राफर थे और फिर उनके साथ संपर्क में आने के बाद वह साये की तरह उनके साथ रहने लगे थे। यहां तक कि जब पूर्व पीएम की हत्या हुई थी, तब भी वह उनके साथ ही थे। ऐसा दावा किया जाता है कि उनके कहने पर वह नमाज पढ़ने लगी थीं।

- वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई ने अपनी किताब में लिखा है कि आपातकाल हटाने के बाद हुए आम चुनाव में इंदिरा गांधी को बुरी हार का सामना करना पड़ा था। हार से मायूस इंदिरा ज्योतिषियों और बाबाओं के पास जाने लगी थीं। इसी दौरान उनके करीबी सहयोगी आरके धवन उन्हें मौलाना जमील इलयासी के पास लेकर गए थे। इलियासी ने इंदिरा से कहा था कि अगले चुनाव में वह 350 से ज्यादा सीटें जीतेंगी। उन्होंने इंदिरा के बेडरूम में एक गंडा बांधा था और फिर चुनाव हुए, तो इंदिरा की पार्टी ने 352 सीटें जीती थीं।

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- किदवई ने अपनी किताब में लिखा है कि संजय गांधी की विमान दुर्घटना में हुई मौत के बाद इलियासी और इंदिरा गांधी की फिर मुलाकात हुई, तब इलियासी ने कहा था कि गंडा कमरे से नहीं उतारने की वजह से यह अनिष्ट हादसा हुआ है। इलियासी ने कहा था कि चुनाव में 350 से ज्यादा सीटें जीतने के बाद गंडा उतार दिया जाना चाहिए था। कमरे से गंडा उतारा गया और शांति के लि इंदिरा ने वहां बैठकर नमाज पढ़ी थी।

- स्टेनोग्राफर के कहने पर नमाज पढ़ने का दावा दरअसल अर्धसत्य है। धवन 1980 में इंदिरा के सबसे करीबी सहयोगी थे और वह महज स्टेनोग्राफर नहीं थे। उनकी पावर सर्कल में अच्छी खासी धमक थी और इंदिरा ही नहीं राजीव गांधी भी उन पर विश्वास करते थे।

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