यूनिक नंबर क्यों डिस्क्लोज नहीं किया? SC ने लगाई SBI को फटकार लेकिन आयोग की ये बात भी मानी
Electoral Bonds Row: इलेक्टोरल बॉन्ड मामले को लेकर चुनाव आयोग की ओर से दाखिल याचिका पर आज देश की सर्वोत्तम अदालत में सुनवाई हुई। सीजेआई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने एसबीआई को फिर से नोटिस जारी किया है और इलेक्टोरल बॉन्ड नंबर का खुलासा करने का आदेश दिया है और रजिस्ट्रार को आदेश दिया है कि सुप्रीम कोर्ट में जमा डेटा को कल यानी शनिवार शाम 5 बजे तक चुनाव आयोग को सौंप दे।

सीजीआई चंद्रचूड़ ने लगाई फटकार
यही नहीं सीजीआई चंद्रचूड़ ने सुनवाई के दौरान एसबीआई को फटकार भी लगाई है और कहा है कि 'जब हमने आपसे कहा था कि आप पूरा डेटा अपलोड कीजिए फिर आपने यूनिक नंबर क्यों डिस्क्लोज नहीं किया, क्या इसका कारण आप बताएंगे?'
मूल दस्तावेजों को आयोग को वापस दे दिया जाएगा
साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि अदाल का रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल यह सुनिश्चित करें कि दस्तावेज स्कैन और डिजिटल हैं कि नहीं और एक बार प्रक्रिया पूरी होने के बाद मूल दस्तावेजों को आयोग को वापस दे दिया जाए ताकि वह इसे 17 मार्च या उससे पहले वेबसाइट पर अपलोड कर सके।
भाजपा सबसे ज्यादा चंदा लेने वाली पार्टी है
गौरतलब है कि एक दिन पहले ही यानी कि 14 मार्च को चुनाव आयोग ने इलेक्टोरल बॉन्ड का डेटा अपनी वेबसाइट पर जारी किया था, जिसके मुताबिक भाजपा सबसे ज्यादा चंदा लेने वाली पार्टी है, जबकि इस लिस्ट में दूसरा स्थान तृणमूल कांग्रेस का है तो वहीं तीसरा नंबर कांग्रेस का है। डेटा के मुताबिक 12 अप्रैल 2019 से 11 जनवरी 2024 तक भाजपा को करीब 6,060 करोड़ रुपए मिले हैं।
आयोग ने 763 पेजों की दो लिस्ट अपलोड की
तो वहीं दूसरी ओर इसी अवधि में टीएमसी को 1,609 करोड़ और कांग्रेस को 1,421 करोड़ चंदा मिला है। आयोग ने 763 पेजों की दो लिस्ट अपलोड की है। इस लिस्ट के मुताबिक 'फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज' ने सबसे ज्यादा चंदा दिया है।
15 मार्च तक डेटा सार्वजनिक करने का आदेश था
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को 15 मार्च तक डेटा सार्वजनिक करने का आदेश दिया था। इससे पहले भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने 12 मार्च 2024 को सुप्रीम कोर्ट में डेटा सबमिट किया था, ऐसा उसने कोर्ट के आदेश पर दिया था।











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