PM मोदी ने 3 राज्य जीतकर हरे कर दिए कांग्रेस के 25 साल पुराने जख्म, जानिए 1998 में क्या हुआ था?
Assembly election results: लोकसभा चुनाव में महज चंद महीनों का वक्त बचा है और ऐसे में हिंदी पट्टी के तीन राज्यों की हार ने कांग्रेस को बहुत बड़ा झटका दे दिया है। कांग्रेस ने ना केवल छत्तीसगढ़ और राजस्थान गंवा दिए, बल्कि मध्य प्रदेश में लौटने की उसकी उम्मीद भी टूट गई।
तीन राज्यों में हार के साथ ही कांग्रेस अब केवल हिमाचल प्रदेश को छोड़कर उत्तर भारत के राज्यों से बाहर हो गई है। भाजपा ने अपनी प्रचंड जीत से कांग्रेस को फिर से 25 साल पुरानी उस स्थिति में पहुंचा दिया है, जब उत्तर भारत के केवल एक राज्य में पार्टी की सरकार बची थी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आखिरी बार साल 1998 में ऐसा हुआ था, जब देश के महज तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बची थी। और, ये तीन राज्य थे- मध्य प्रदेश, ओडिशा और मिजोरम। मतलब, उत्तर भारत में केवल मध्य प्रदेश अकेला राज्य था, जहां कांग्रेस टिक पाई। इसके बाद सोनिया गांधी ने पार्टी की कमान अपने हाथ में ली थी। रविवार को आए नतीजों ने फिर से कांग्रेस के 25 साल पुराने जख्म हरे कर दिए है, जब उसके पास केवल तीन राज्य हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना बचे हैं।
नहीं चल पाया कांग्रेस का गारंटी कार्ड
3 राज्यों में विधानसभा चुनाव की ये हार इसलिए भी कांग्रेस को एक बड़ा झटका है, क्योंकि इन चुनावों में पार्टी की तरफ से कई गारंटियों के ऐलान किया गया था। हाल ही में कांग्रेस का ये प्रयोग पहले हिमाचल प्रदेश और फिर कर्नाटक में कामयाब रहा, लेकिन राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में ये कार्ड नहीं चल पाया। तेलंगाना की जीत से कांग्रेस को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन हिंदी भाषी राज्यों की हार ने पार्टी के लिए लोकसभा चुनाव की चुनौतियों को बहुत मुश्किल कर दिया है।
'इंडिया' में घटेगी कांग्रेस की भूमिका?
भाजपा की इस जीत ने विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' में भी कांग्रेस का कद घटा दिया है। पहले हिमाचल प्रदेश और फिर कर्नाटक जीतने के बाद कांग्रेस के इरादे बुलंद थे और पार्टी विपक्षी दलों के बीच ड्राइविंग सीट पर थी। लेकिन, तीन प्रमुख राज्यों में हार के बाद अब कांग्रेस बैकफुट पर होगी। इस हार का असर ना केवल 'इंडिया' में उसकी भूमिका घटाएगा बल्कि सीट शेयरिंग पर भी सीधा असर पड़ेगा।












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