कांग्रेस या भाजपा? EVM के मामले पर किसके साथ है BSP, जान लीजिए जवाब
Assembly election results: मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार हो चुकी है और जैसा कि रिजल्ट के साथ ही सोशल मीडिया पर यूजर्स कयास लगाने लगे थे, कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने हार का ठीकरा ईवीएम के ऊपर फोड़ दिया है।
कांग्रेस की तरफ से पहले यूपी के एक पार्टी प्रवक्ता और इसके बाद मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने सीधे तौर पर ईवीएम को अपनी पार्टी की हार के लिए जिम्मेदार ठहराया। इसके बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के सांसद संजय राउत ने भी ईवीएम पर सवाल उठा दिए।

इस बीच सवाल उठ रहा है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में कांग्रेस से अलग होकर चुनाव लड़ने वाली मायावती की बीएसपी का ईवीएम पर क्या रुख है? इस सवाल की चर्चा इसलिए ज्यादा हो रही है, क्योंकि जिन चुनावों में बीएसपी को भारतीय जनता पार्टी से सीधे तौर पर हार मिली, वहां खुद मायावती ने भी ईवीएम को हार के लिए दोषी बताया। अब पांच राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद ईवीएम पर बीएसपी सांसद की तरफ से बयान आ गया है।
'चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाने चाहिए'
ईवीएम को लेकर कांग्रेस के रुख का समर्थन करते हुए बीएसपी के सांसद कुंवर दानिश अली ने मंगलवार को कहा, 'हम शुरुआत से ही ईवीएम के खिलाफ रहे हैं। हमारा मानना है कि चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाने चाहिए। ईवीएम का विरोध सबसे पहले भाजपा के ही वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने किया था। भाजपा सांसद जीवीएल नरसिम्हा राव ने ईवीएम को लेकर किताब तक लिखी है। कोई पार्टी पोस्टल बैलेट पर जीत रही है, ईवीएम पर हार रही है, ऐसा कैसे हो रहा है। हमने ये मुद्दा कई बार संसद में उठाया है और हम आगे भी ईवीएम का विरोध करते रहेंगे। चुनाव बैलेट पेपर से ही होने चाहिए।'
'एक पार्टी के पक्ष में एकतरफा नतीजों पर शंकित'
आपको बता दें कि इससे पहले बीएसपी की मुखिया मायावती ने भी चुनाव नतीजों पर शक जताया था। मायावती ने अपने ट्वीट में लिखा था, 'देश के चार राज्यों में अभी हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के आए परिणाम एक पार्टी के पक्ष में एकतरफा होने से सभी लोगों का शंकित, अचंभित और चिंतित होना स्वाभाविक, क्योंकि चुनाव के पूरे माहौल को देखते हुए ऐसा विचित्र परिणाम लोगों के गले के नीचे उतर पाना बहुत मुश्किल।'
'रहस्यात्मक है चुनाव परिणाम'
मायावती ने आगे लिखा, 'पूरे चुनाव के दौरान माहौल एकदम अलग और कांटे के संघर्ष जैसा दिलचस्प, लेकिन चुनाव परिणाम उससे बिल्कुल अलग होकर पूरी तरह से एकतरफा हो जाना, यह ऐसा रहस्यात्मक मामला है, जिसपर गंभीर चिंतन व उसका समाधान जरूरी है। लोगों की नब्ज पहचानने में भयंकर 'भूल-चूक' चुनावी चर्चा का नया विषय।'












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