तीन राज्यों में भाजपा को 180 सीटों का नुकसान, एससी/एसटी सीटों पर एक दशक का सबसे खराब प्रदर्शन
नई दिल्ली। मंगलवार को पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आए हैं। तेलंगाना और मिजोरम के अलावा हिन्दीभाषी मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ पर पूरे देश की निगाहें लगी थीं। इन तीनों राज्यों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला था। तीनों ही जगह भाजपा की हार और कांग्रेस की जीत हुई है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 15-15 साल से भाजपा की सरकार थी तो राजस्थान में पांच साल बाद कांग्रेस वापस आई है। तीनों राज्यों में बीते चुनाव के मुकाबले भाजपा को 180 सीटों की नुकसान और कांग्रेस को 162 सीटों का फायदा हुआ है।

2013 के चुनाव में इन तीनों राज्यों में भाजपा ने 377 सीटें जीती थीं, वहीं कांग्रेस को 118 सीट मिली थीं। इस चुनाव में भाजपा ने 2013 में जीती 48 फीसदी सीटें हारी हैं और कांग्रेस को 137 प्रतिशत का फायदा हुआ है। इंडियास्पेंड के विश्वेषण के मुताबिक, राजस्थान और मध्य प्रदेश में दोनों पार्टियों के वोट शेयर में बहुत ज्यादा फर्क नहीं रहा है।
एमपी में कांग्रेस को 41 और भाजपा को 40.9 फीसदी वोट मिले। 2013 में भाजपा को 45 और कांग्रेस को 36 प्रतिशत वोट मिले थे। राजस्थान में इस चुनाव में कांग्रेस को 39.3, भाजपा को 38.8 फीसदी वोट मिले हैं। 2013 में भाजपा को 45 और कांग्रेस को 23 प्रतिशत वोट मिले थे। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को 43, भाजपा को 33 फीसदी वोट मिले हैं। 2013 में भाजपा को 45, कांग्रेस को 33 फीसदी वोट मिले थे।
राजस्थान, छत्तीसगढ़, एमपी, मिजोरम और तेलंगाना में देश की 15.2 फीसदी जनसंख्या रहती है, पांचों राज्यों में कांग्रेस को 305 और भाजपा को 199 सीटें मिली हैं। तेलंगाना में टीआरएस तो मिजोरम में एमएनएफ ने जीत हासिल की है। बाकी तीनों राज्यों में कांग्रेस जीती है।
छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश की एससी/एसटी सीटों पर भाजपा का प्रदर्शन काफी खराब रहा है। तीनों राज्यों में एससी/एसटी के लिए 180 सीटें रिजर्व हैं, भाजपा इनमें से 120 सीटें हारी है। जबकि 2013 में भाजपा इनमें से 77 फीसदी सीटें जीती थीं।












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