ताकि इस बार मुंबई और पुणे में हर कोई वोट दे सके
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) चुनाव आयोग की लोकसभा चुनाव के दौरान काफी आलोचना हुई थी क्योंकि महाराष्ट्र में महाराष्ट्र के दो प्रमुख शहरों मुंबई और पुणे में मतदाता सूचियों से सैकड़ों नाम गायब थे।

आगामी विधान सभा चुनावों में लोकसभा चुनाव वाले हालात फिर पैदा न हो, इस बात को ध्यान में रखते हुए निर्वाचन आयोग ने राज्य में नागरिकों के पंजीकरण के लिए व्यापक उपाय किये हैं।
जानकारी के अनुसार, दो दिनों के प्रत्येक दो विशेष अभियानों सहित विगत 9 जून से 30 जून के दौरान पूरे राज्य में एक विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का संचालन किया गया।
इस पुनरीक्षण के दौरान सभी मतदान केन्द्रों और मतदाता पंजीकरण अधिकारियों के नोटिस बोर्डों पर मतदाता सूची के मसौदे को दर्शाया गया था।
इस सूची को खोज सुविधा के साथ मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर भी दर्शाया गया।
मतदाता सूची से हटे नाम
यही नहीं, मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को मसौदा और अंतिम मतदाता सूचियों की प्रतियां उपलब्ध कराई गई । उन लोगों को विशेष रियायत दी गई , जिनके नाम तो मतदाता सूची से हटा दिये गये थे, किन्तु उनके
पास मतदाता पहचान पत्र मौजूद थे। उनके दावे को केवल मतदाता पहचान पत्र की छायाप्रति के साथ स्वीकार किया गया था और कोई अतिरिक्त प्रमाण नहीं मांगा गया था। अपने आप ही नाम हटाये जाने पर सख्त प्रतिबंध था।
नए मतदाताओं का पंजीकरण
ऐसे व्यापक प्रयासों के परिणामस्वरूप मुम्बई में 1.94 लाख और पुणे में 2.66 लाख मतदाताओं सहित महाराष्ट्र में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के दौरान लगभग 20.3 लाख मतदाताओं का पंजीकरण किया गया।
इनमें से मुम्बई में केवल 16614 मामले और पुणे में 27542 मामले ही ऐसे थे जिन नामों को पहले हटा दिये गये थे।
मतदाता सूची के अंतिम रूप को मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और सभी मतदाता पंजीकरण अधिकारियों की वेबसाइट पर प्रस्तुत किया गया है।
पक्के मुंबईकर और पूर्व आईएएस अधिकारी जफर इकबाल ने बताया कि पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान वे यकीन नहीं कर पाए थे जब उनका नाम साउथ मुंबई की मतदाता सूची से गायब था। वे मुंबई में बीते दशकों से वोट दे रहे हैं।












Click it and Unblock the Notifications