चुनाव आयोग ने नहीं मानी राहुल गांधी की मांग! पोलिंग स्टेशन के वीडियो जारी करने से किया इनकार, क्या है मामला
Election Commission: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा की गई महाराष्ट्र चुनाव के मतदान केंद्रों की वेबकास्टिंग फुटेज सार्वजनिक करने की मांग को चुनाव आयोग (EC) ने सिरे से खारिज कर दिया है। चुनाव आयोग ने साफ कहा कि यह न केवल गोपनीयता का उल्लंघन होगा, बल्कि इससे मतदाताओं को सामाजिक दबाव, भेदभाव और डर-धमकी का सामना भी करना पड़ सकता है।
EC के सूत्रों के मुताबिक, "अगर किसी समूह या व्यक्ति को यह फुटेज दे दी जाए, तो वह आसानी से जान सकता है कि किस मतदाता ने वोट डाला और किसने नहीं। इससे वे मतदाता जो मतदान करने नहीं आए, वे भी निशाने पर आ सकते हैं। यह आयोग के अनुसार, "गैर-सामाजिक तत्वों" के लिए एक टूल बन सकता है।''

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के नए नियम पर फिर से साधा निशाना
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के इस नए नियम पर सवाल उठाते हुए 21 जून को एक्स पोस्ट पर कहा,
''वोटर लिस्ट? Machine-readable फॉ र्मेट नहीं देंगे। CCTV फुटेज? कानून बदलकर छिपा दी। चुनाव की फोटो-वीडियो? अब 1 साल नहीं, 45 दिनों में ही मिटा देंगे। जिससे जवाब चाहिए था - वही सबूत मिटा रहा है। साफ दिख रहा है- मैच फिक्स है। और फिक्स किया गया चुनाव, लोकतंत्र के लिए जहर है।''
चुनाव आयोग ने कानूनी अड़चनें और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला
चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि वेबकास्टिंग फुटेज सार्वजनिक करना "जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of People Act)" का उल्लंघन होगा। सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि वोट न देना भी एक निजी अधिकार है, और इसे गोपनीय रखना उतना ही जरूरी है जितना वोट किसे दिया।
EC ने उदाहरण देते हुए कहा कि वेबकैम फुटेज Form 17A जैसा ही संवेदनशील दस्तावेज है। यह फॉर्म बताता है कि किसने वोट डाला और इसे कानूनी आदेश के बिना सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, "बिना अधिकृत अनुमति के किसी मतदाता की पहचान उजागर करना अपराध है -जिसमें जेल और जुर्माने दोनों की सजा हो सकती है।"
45 दिनों में होता है वीडियो का नष्टिकरण
चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी चुनाव के परिणाम को 45 दिनों के भीतर अदालत में चुनौती नहीं दी जाती है, तो उस वेबकास्टिंग/वीडियो फुटेज को नष्ट कर दिया जाता है -यह नियम सभी राज्यों पर समान रूप से लागू होता है।
राहुल गांधी की मांग क्या थी?
- महाराष्ट्र चुनाव की शाम 5 बजे के बाद की सभी CCTV फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की थी।
- साथ ही उन्होंने 2024 लोकसभा और सभी राज्य चुनावों की डिजिटल वोटर लिस्ट प्रकाशित करने का आग्रह किया था।
- चुनाव आयोग ने इन सभी बिंदुओं पर बिंदुवार जवाब देकर साफ किया कि उसकी प्राथमिकता मतदाता की सुरक्षा और गोपनीयता है, न कि राजनीतिक मांगों को पूरा करना।
चुनाव आयोग ने अपने जवाब से यह स्पष्ट कर दिया है कि मतदाता की पहचान, उसकी सहभागिता या अनुपस्थिति -सब कुछ संवेदनशील सूचना है और लोकतंत्र में नागरिक की स्वतंत्रता की रक्षा करना सबसे महत्वपूर्ण है।












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