ED ने 193 में से केवल 2 केस में सजा करवाई, सक्सेस रेट 1%, कौन हैं वो 2 दोषी? क्या यह सिर्फ राजनीतिक हथियार?
ED Conviction Rate: पिछले 10 वर्षों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राजनीतिक नेताओं के खिलाफ 193 मामले दर्ज किए, लेकिन सिर्फ 2 मामलों में ही दोषसिद्धि हुई। यह आंकड़ा बताता है कि ED की सजा दर महज 1% है। विपक्ष इसे राजनीतिक हथियार बता रहा है, तो सरकार इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम बता रही है।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के राज्यसभा में पेश किए गए डेटा के मुताबिक, मौजूदा और पूर्व सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों और राजनीतिक नेताओं के खिलाफ ED ने कुल 193 मामले दर्ज किए हैं, जिनकी जांच अभी जारी है। हालांकि, कार्रवाई सिर्फ दो मामले में हुई है। ईडी ने 2014 से 2024 तक धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कार्रवाई की। आइए नजर डालते हैं विस्तार से?

कौन हैं वे दो नेता जिन्हें सजा हुई?
ED द्वारा जिन दो मामलों में सजा हुई, वे दोनों झारखंड के पूर्व मंत्री थे...
- हरि नारायण राय (Hari Narayan Rai)- 2017 में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 7 साल की सजा और ₹5 लाख जुर्माना
- अनोश एक्का (Anosh Ekka)- 2020 में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 7 साल की सजा और ₹2 करोड़ जुर्माना
इन दोनों मामलों में ED ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के खिलाफ जांच के दौरान कार्रवाई की थी।
ED की सफलता दर इतनी कम क्यों?
ED की 1% की सफलता दर सवाल खड़े करती है...
- क्या ED की जांच कमजोर है?
- क्या यह एजेंसी राजनीतिक प्रतिशोध का हथियार बन गई है?
- क्या साक्ष्य पर्याप्त नहीं होते, जिससे अदालत में मामले टिक नहीं पाते?
विपक्ष ने ED की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि ED का इस्तेमाल सिर्फ राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। उनका कहना है कि हर बार चुनाव से पहले विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच तेज हो जाती है।
कांग्रेस का कहना है कि ED की 193 में से 191 मामलों में कोई सजा न होना यह साबित करता है कि एजेंसी को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
सरकार का बचाव - ED पर क्यों किया भरोसा?
- केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय ने संसद में कहा, 'ED केवल विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर जांच करता है।'
- 'एजेंसी की सभी कार्रवाइयाँ न्यायिक समीक्षा के अधीन होती हैं।'
- 'राजनीतिक आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता।'
सुप्रीम कोर्ट की चिंता क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने भी मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में ED की कम सजा दर पर चिंता व्यक्त की है और गुणवत्तापूर्ण अभियोजन पर जोर देने की सलाह दी है।
2019-2024 के बीच ED मामलों में जबरदस्त बढ़ोतरी
- 2019-2024 के बीच 4,467 नए मामले दर्ज हुए।
- 2023-2024 में 32 नए केस दर्ज हुए - सबसे ज्यादा किसी भी साल में।
- अब तक 5,297 कुल मामले दर्ज किए गए, लेकिन सिर्फ 40 मामलों में सजा हुई।
क्या ED का इस्तेमाल सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए हो रहा है?
अगर आंकड़ों को देखें तो ED के राजनीतिक मामलों में सफलता दर बहुत कम है, लेकिन आम मामलों में 40 मामलों में सजा हुई है। यह इंगित करता है कि राजनीतिक मामलों में या तो साक्ष्य पर्याप्त नहीं होते या फिर जांच में खामियां रहती हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या ED अपनी जांच प्रणाली में सुधार करेगा और राजनीतिक मामलों में भी सजा दर बढ़ाने में सक्षम होगा, या फिर यह सिर्फ एक राजनीतिक बहस का मुद्दा बनकर रह जाएगा?












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