भाजपा कार्यकारिणी में पास हुआ आर्थिक प्रस्ताव, पढ़ें जरूरी बातें
इलाहाबाद। भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में देश की अर्थव्यवस्था पर भी चर्चा हुई। साथ ही यह बताया गया कि पिछली यूपीए सरकार की तुलना में एनडीए सरकार ने क्या-क्या किया और उससे भारत को कौन-कौन से लाभ पहुंचे।

एक निराशापूर्ण वैश्विक वातावरण जिसमें अधिकतर राष्ट्र धीमी पड़ती एवं गिरते विकास दर से जूझ रहे हैं उसमें भारत एक जगमगाता स्थान के रूप में उभरा है। दो वर्ष लगातार सूखा एवं वैश्विक आर्थिक मंदी के बीच विरासत में बहुत खराब अर्थव्यवस्था प्राप्त करने के बावजूद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सबसे तेज विकास दर वाली अर्थव्यवस्था बन गये हैं।
आर्थिक विशेषज्ञ, थिंक टैंक्स, बहुपक्षीय संस्थान तथा भारत तथा विश्व के प्रख्यात मीडिया ने भारत की विकास की गाथा तथा सरकार की विभिन्न योजनाओं एवं पहलों को माना है। यह ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा कि पिछले तिमाही में भारत ने 7.9 प्रतिशत का विकास दर प्राप्त किया।
संसाधनों की भयंकर संकट के बावजूद हम वित्तीय घाटा वर्ष 2014-15 तथा 2015-16 में 4.9 प्रतिशत तथा 3.9 प्रतिशत तक लाने में सफल हुए तथा 2016-17 में इसे 3.5 प्रतिशत तक लाने का अनुमान है। इसके साथ बेहतर आपूर्ति प्रबंधन तथा वित्तीय घाटे पर नियंत्रण से मुद्रास्फीति पर नियंत्रण हुआ। देश ने अभूतपूर्व रूप से विदेशी निवेश वर्ष 2015 में आकर्षित किया जिससे कैपिटल एकाउंट में भुगतान संतुलन में अधिकता प्राप्त करने में सफलता मिली।
कुप्रबंधित अर्थव्यवस्था की विरासत
यूपीए शासन में अंतरराष्ट्रीय जगत भारत को ढीली अर्थ व्यवस्था मानते हुए दरकिनार करने लगे थे। उद्योग, आधारभूत संरचना, मूल्य स्थिरिकरण (मुद्रास्फीति), बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति (बैंकों का बढ़ता कर्ज), बाह्य क्षेत्र के असंतुलन एवं वित्तीय प्रबंधन की दृष्टि से यूपीए सरकार के अंतिम दो वर्ष अत्यंत खराब थे।
2 वर्ष 2011-12 में सकल घरेलू उत्पाद का विकास दर 6.5 प्रतिशत तक गिर गया था। उस वर्ष उद्योग विकास का दर मात्र 2.9 प्रतिशत पर लुढ़क गया जो बाद में नकारात्मक हो गया। यूपीए शासन में 14 लाख करोड़ मूल्य का कोष गलत नीतियों के कारण अटका रहा। रिजर्व बैंक की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट दिसंबर 2015 ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की खस्ता हालत दर्शाती है। टेलिकाॅम हो या कोयला या अन्य क्षेत्र, हर अोर पूंजीपति निर्णयों को प्रभावित कर रहे थे और पूरी तरह नीतिगत पंगुता छाई हुई थी।
भारत-मंदी के वैश्विक माहौल में आशा की किरण
ओईसीडी के आकलन के अनुसार इस साल वैश्विक विकास दर 3 प्रतिशत से कम रहने का अनुमान है, जैसाकि 2015 में थी। अमेरिका, चीन, ब्राजील, समेत लगभग सभी देश मंदी की चपेट में हैं। न सिर्फ विकसित देश बल्कि विकासशील देशों की विकास दर कम हुई है। वैश्विक विकास को बढ़ाने और विकासशील देशों में अार्थिक गतवििधियों को तेज करने में वैश्विक व्यापार की भूमिका कम हुई है। 2015 के अंत तक वैश्विक व्यापार की विकास दर गिरकर 0.6 प्रतिशत तक हो गई थी। वास्तविक अर्थों में वैश्विक व्यापार 2014 में 19 ट्रिलियन से गिरकर 2015 में 16.5 ट्रिलियन हो गई। पिछले दो वर्षों में चीन की विकास दर काफी कम हुई है। 25 सालों में
ऐसा पहली बार हुआ है कि 2015 में चीन की विकास दर 6.9 प्रतिशत हो गई। 2016 में यह गिरावट और हुई और पहली तिमाही में विकास दर गिरकर 6.7 प्रतिशत हो गई। वहीं भारत में विकास दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और इस समय यह विश्व के सबसे तेज गति से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था है।
भारत के विकास के लिए नीतियां
विरासत में एक खस्ताहाल अर्थव्यवस्था प्राप्त करने, वैश्विक मंदी का माहौल और 2 सालों का लगातार सूखे के बीच प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। यह मुख्यरूप से आधारभूत संरचना के विकास में ज्यादा खर्च, कृषि और छोटे उद्योगों को बढ़ती हुई वित्तीय उपलब्धता के कारण है। इसके कारण घरेलू विकास और घरेलू खपत में वृद्धि हुई है। भारतीय उपभोक्ताओं का खर्च 2014-15 में 6.2 प्रतिशत की तुलना में 2015-16 में बढ़कर 7.2 प्रतिशत हो गया है।
2015-16 की आखिरी तिमाही में कृषि क्षेत्र ने 2.3 प्रतिशत की तीव्र विकास दर दर्ज की है। पूरे 2015 में कृषि विकास दर 1.2 प्रतिशत रही, जबकि पिछले साल यह विकास दर 0.2 प्रतिशत नकारात्मक रही। उद्योगों की विकास दर 2015-16 में 7.4 प्रतिशत रही, जबकि पिछले साल यह 5.9 प्रतिशत रही। अप्रैल 2016 में कोर सेक्टर की विकास दर 8.5 प्रतिशत 3 रही, जो अप्रैल 2015 में -0.2 प्रतिशत थी। फरवरी 2015 से सरकार ने 1.15 लाख करोड़ की अटकी हुई परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाना शुरू किया जिसने इन परियोजनाओं में फंसी पूंजी मुक्त हो गई। इसका परिणाम 2015-16 में भी सामने आया।
इस कारण नविेश में धीमी बढ़त के बावजूद सकल घरेलु उत्पाद बढ़ा है। यदि अटकी परियोजनाएं सक्रिय हुई तो विकास पर और सुदृढ़ होगी। कुशल वित्तीय प्रबंधन के चलते मुद्रास्फिति नियंत्रण में है। कर सुधार, बैकरप्सी एक्ट आदि शुरू किए गए हैं। सरकार में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व, भ्रष्टाचारमुक्त प्रशासन, कुशल वित्तीय प्रबंधन के चलते नविेशकों के विश्वास में कई गुना की वृद्धि हुई है। कुशल नीतियों के चलते ईज आॅफ डूइंग बिजिनेस में सुधार हुआ है, जिससे और अधिक नविेश हुआ है। विदेशी निवेश 2015-16 में बढ़कर 55 अरब डाॅलर हो गया, जबकि 2014-15 में यह 41 अरब डाॅलर तथा 2013-14 में 36 अरब डाॅलर था। विदेशी रिजर्व 360 अरब डाॅलर को पार कर गया है।
इसके कारण मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया जैसी पहल को वास्तविक रूप देने में मदद मिली है। जीएसटी जोकि कांग्रेस और कुछ अन्य पार्टियों के रोड़ा अटकाने की राजनीति के कारण फंसा पड़ा है, के पारित होने से कर-व्यवस्था में गुणात्मक परविर्तन की आशा है।
कल्याण एवं विकास कार्यों का सम्मिश्रण
एनडीए सरकार के सुशासन माॅडल की पहचान कल्याण एवं विकास कार्यों का समुचित सम्मिश्रण है जो पं. दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय की अवधारणा- ''गरीब, शोषित, वंचित की सेवा एवं विकास'' से प्रेरित है। नरेन्द्र मोदी सरकार के पहले दो वर्ष गरीबी मिटाने एवं वंचितों के कल्याण के लिए व्यापक कदमों, वंचित वर्गों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण तथा आर्थिक प्रगति के लिए सुदृढ़ नींव के निर्माण काे समर्पित रहा है। 'सबका साथ-सबका विकास' सरकार का मौलिक दर्शन है।
नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राजग सरकार इन सभी प्रयासों के फलस्वरूप अर्थव्यवस्था के सामने अनेक समस्याओं के बावजूद विभिन्न क्षेत्र अच्छा कार्य कर रहे हैं। विभिन्न स्तरों पर बढ़ती आर्थिक गतिविधियों से परिणामस्वरूप बेहतर विश्वास का निर्माण हुआ है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत मजबूत छाप छोड़ रहा है।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी यह विश्वास व्यक्त करती है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार के प्रयासों से देश की अर्थव्यवस्था तेजी से प्रगति के पथ पर अग्रसर होगी एवं सामाजिक समता तथा आर्थिक सशक्तिकरण से देश के गरीबों के जीवन में बदलाव होगा।












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