पूर्वी सेना के कमांडर ने चीनी सेना की गतिविधियों पर जताई चिंता, बोले- हम भी बढ़ा रहे मुस्तैदी
लद्दाख, 19 अक्टूबर: भारत-चीन सीमा पर लगातार बने तनाव के बीच पूर्वी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे ने चीन की बढ़ती गतिविधियों को लेकर चिंता जाहिर की है। मंगलवार को उन्होंने कहा है कि चीनी सेना सीमा पर अपनी हरकतें जिस तरह से बढ़ा रही है, उसको देखते हुए हमने भी सर्विलांस को बढ़ाया है। चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एक रणनीतिक मॉडल के तहत सीमा के पास आई है, जिसकी वजह से भारत की सेना भी ज्यादा सतर्कता बरत रही है।

लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे ने कहा कि किसी भी खतरे से निपटने के लिए हमने अब निगरानी ड्रोन और यूएवी को शामिल करने का फैसला लिया है। साथ ही रात में निगरानी के लिए रडार और संचार प्रणाली लाई गई है। ये इसलिए किया गया है कि क्योंकि पीएलए की तरफ से वास्तविक नियंत्रण रेखा के गहरे इलाकों में गतिविधियों में इजाफा हुआ है।
उन्होंने बताया है कि पीएलए जो अपना वार्षिक अभ्यास करती है, उसमें कुछ इजाफा हुआ है। पीएलए रणनीतिक मॉडल के अनुसार, गांव सीमा के करीब आ गए हैं। यह चिंता कि बात है कि उसका इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। हमने हमारी योजनाओं में इस पर संज्ञान लिया है। दोनों ही पक्ष एलएसी के पास इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके चलते कई बार तनाव भी हुआ है।
भारत ने भी निगरानी बढ़ाई
लेफ्टिनेंट जनरल पांडे ने बताया कि भारत ने भी एलएसी और गहरे इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। किसी भी मुश्किल हालात से निपटने के लिए हमारे पास हर सेक्टर में पर्याप्त बल मौजूद है। लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे पूर्वी सेना कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ हैं। यह कमान पूर्वोत्तर राज्यों सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश क्षेत्रों में चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की रक्षा के लिए तैनात है।
बता दें कि भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर करीब डेढ़ साल से टकराव की स्थिति है। कई बार ये कम हो जाता है तो कई बार हालात तनावपूर्ण हो जाते हैं। बीते साल जून में तो गलवान घाटी में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुए एक टकराव के बाद युद्ध जैसे हालात हो गए थे।












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