फाइबर ऑप्टिक से मिलेगा भूकंप का सटीक संकेत, कितने काम की है यह रिसर्च? एक्सपर्ट से जानिए
भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में अब ऑप्टिकल फाइबर का जाल बिछ चुका है। यह लोगों को तेज से तेज इंटरनेट की सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। लेकिन, वैज्ञानिकों की एक टीम वर्षों से भूकंप की सटीक जानकारी जुटाने के लिए इसपर रिसर्च कर रही थी और उसमें उन्हें सफलता मिली है।
टेक्नोलॉजी नेटवर्क्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से जुड़े जियोफिजिक्स के एक प्रोफेसर झोंगवेन झान और उनकी टीम ने कई वर्षों तक शोध के बाद फाइबर ऑप्टिक के इस कमाल के बारे में पता लगाया है। उनकी यह रिसर्च जर्नल नेचर में प्रकाशित हुई है।

अस्थायी भूकंपमापी का काम कर सकते हैं फाइबर ऑप्टिक-रिसर्च
उनके मुताबिक भूकंप के दौरान पैदा हुई तरंगों की वजह से फाइबर ऑप्टिक केबल्स में जो कंपन पैदा होती हैं,वह अस्थायी भूकंपमापी का काम कर सकते हैं। इस शोध में 1921 में हुए खास भूकंप के डेटा का इस्तेमाल किया गया है। इसके बारे में सटीक जानकारी जुटाने के लिए उस क्षेत्र के करीब 100 किलोमीटर के दायरे में स्थिति फाइबर ऑप्टिक की मदद से भूकंप की जटिल प्रक्रिया को समझने की कोशिश की गई है।
अर्ली वॉर्निंग सिस्टम की तरह कर सकता है काम- रिसर्च
शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर फाइबर केबल ऑप्टिक का दायरा बढ़ाया जाए तो भूकंप की भौतिकी को ज्यादा सही तरीके से समझा जा सकेगा, जिससे आखिरकार यह अर्ली-वॉर्निंग सिस्टम की तरह काम कर सकता है। प्रोफेसर झान के मुताबिक, 'यदि हम भूकंपीय गतिविधि को मापने के लिए व्यापक कवरेज जुटा सकते हैं, तो हम भूकंप का अध्ययन करने और अर्ली-वॉर्निंग सिस्टम तैयार करने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं।'
बिना अतिरिक्त लागत के भूकंपमापी यंत्र का बिछ सकता है जाल
उनका कहना है कि 'हालांकि, हम भूकंप की भविष्यवाणी नहीं कर सकते, लेकिन बड़े स्तर पर ध्वनिक संवेदन से पृथ्वी के भंग होने के पूरे विवरण की बेहतर समझ विकसित हो कर सकेंगे।' यह कितने काम की रिसर्च है, यह इससे समझा जा सकता है कि अमेरिका के दक्षिण कैलिफोर्निया में करीब 56,500 वर्ग मील में लगभग 500 भूकंपमापी यंत्र लगाए गए हैं। इसमें से एक पर करीब 50,000 डॉलर की लागत आती है। लेकिन, अगर इसकी जगह वहां फाइबर ऑप्टिक से यही काम लिया गया तो वह एक साथ लाखों भूकंपमापी का काम कर सकते हैं।
आम भूकंपमापी की माप में अंतर हो सकता है-एक्सपर्ट
ओआई ने भूकंप के सटीक संकेत पकड़ने के लिए की गई इस रिसर्च के बारे में इस विषय को लंबे समय तक कवर कर चुके वरिष्ठ विश्लेषक सिद्धार्थ तिवारी से बात की है। उन्होंने कहा है कि 'भूकंपमापी (seismometer) से भूकंप की तीव्रता और उसके केंद्र का पता लगाया जाता है, लेकिन इसकी सटीकता में अक्सर गलतियां होती हैं।'
भारत को भी हो सकता है इस रिसर्च का फायदा- एक्सपर्ट
उन्होंने बताया है कि फाइबर के अंदर जो लाइट चलती है, वह भूकंप तरंगों की वजह से बाधित होती है और इस रिसर्च में उसी बाधा को भूकंप के आकलन का आधार बनाया गया है। उन्होंने कहा है कि सैद्धांतिक तौर पर यह जानकारियां पहले से थीं। लेकिन, अब इसे एक टूल की तरह इस्तेमाल किया गया है, जिसकी सटीकता बढ़िया रहेगी। उन्होंने कहा है कि इस रिसर्च के डेटा की मॉडलिंग करके भूकंप के अनुमान लगाने पर भी काम हो सकता है।
तिवारी के अनुसार, 'ये एक अच्छा टूल होगा, क्योंकि ऑप्टिकल फाइबर का नेटवर्क हर जगह पर है। तो इसका फायदा भारत जैसे देश में भी हो सकता है। उन देशों में भी हो सकता है, जो बहुत ज्यादा संशाधन नहीं खड़े कर सकते हैं। उनके लिए सटीकता को लेकर यह तकनीक एक नई दिशा देगा। '
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