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डीयू प्रोफेसर साईबाबा को बरी किए जाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

माओवादियों से लिंक के मामले 2014 में गिरफ्तार किए गए डीयू के पूर्व प्रोफेसर साईबाबा को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने शुक्रवार को बरी कर दिया था। लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट के इस फैसले को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसपर आज सुबह 11 बजे सुनवाई होगी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एमआर शाह और बेला एम त्रिवेदी की पीठ करेगी।

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    बॉम्बे हाईकोर्ट ने 5 अन्य को भी बरी करने का आदेश दिया था
    बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने शुक्रवार को साईबाबा को बरी करने का फैसला सुनाया था। साथ ही पीठ ने 5 अन्य आरोपियों को भी बरी किया था। कोर्ट का कहना था कि यूएपीए की धारा 45 के अनुसार मुकदमा बिना वैध मंजूरी के दर्ज किया गया था। हाईकोर्ट ने आरोपी साईबाबा, महेश तिर्की, हेम केशवदत्त मिश्रा, प्रशांत राही और विजय नान तिर्की को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया था। वहीं, एक आरोपी पांडु पोरा नरोटे की अगस्त 2022 में जेल में ही मौत हो गई थी।

    बता दें कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा रिहाई देने के खिलाफ कई दलीलें दी थी। उन्होंने कहा कि डीयू के पूर्व प्रोफेसर ने राष्ट्र के खिलाफ अपराध किया था। वहीं, इससे पहले उनकी रिहाई को जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और हेमा कोहली की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने ठुकरा दिया था। ऐसे में पीठ ने महाराष्ट्र पुलिस की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल को सलाह दी थी कि वे सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में अर्जी डाल सकते हैं। जिसके बाद सरकार की तरफ से अर्जी दायर की गई, जिसपर आज सुनवाई होगी।

    2014 में हुई थी गिरफ्तारी
    साईबाबा फिलहाल नागपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। उन्हें मई 2014 में माओवादियों के साथ कथित संबंधों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी से पहले व्हीलचेयर से चलने वाले प्रोफेसर दिल्ली विश्वविद्यालय के राम लाल आनंद कॉलेज में प्रोफेसर थे। वह वहां पर अंग्रेजी पढ़ाते थे। साईबाबा को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र हेमंत मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद अरेस्ट किया गया था। हेमंत ने जांच एजेंसियों को पूछताछ में बताया था कि वह छत्तीसगढ़ के अबुजमाड के जंगलों के माओवादियों और एक प्रोफेसर बीच कूरियर का काम कर रहे थे। साथ ही साईबाबा पर 2012 में नक्सलियों के एक सम्मेलन में भाषण देने का भी आरोप लगा था।

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