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एक पुल ने बदली खूंखार माओवादी जोड़े की जिंदगी, 10 साल जंगल में बिताने के बाद छोड़े हथियार

By Kamal Kumar
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    नई दिल्ली: ओडिशा के माओवाद प्रभावित जिले मलकानपुरी में बने एक पुल ने लोगों की जिंदगियों को बदलने का काम किया है। इस जिले में एक पुल का उद्घाटन 26 जुलाई को हुआ था। इस पुल ने उन 151 गांवों को जोड़ने का काम किया है जिनका संपर्क एक हाइडिल प्रॉजेक्ट के कारण पिछले 50 सालों से मलकानगिरी से टूटा हुआ था। दूसरी ओर, इस पुल ने एक मोस्ट वॉन्टेड माओवादी जोड़े को भी मुख्यधारा में वापस लाने का काम किया है।

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    माओवादी जोड़े ने छोड़ा हथियार

    माओवादी जोड़े ने छोड़ा हथियार

    वागा उर्ममि और उसकी 20 वर्षीय पत्नी मुड़े मधि ने ये माना कि जंतापाई में पुल की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैंप और उद्घाटन के बाद बढ़ रहे कॉम्बिंग ऑपरेशन ने उन्हें हथियार छोड़ने के लिए मजबूर किया। 29 जुलाई को हथियार छोड़ने से पहले पति-पत्नी दोनों ही मोस्ट वॉन्टेड माओवादी थे जिनके ऊपर 5 लाख का इनाम रखा गया था। 26 वर्षीय वागा उर्ममि की तलाश लंबे समय से की जा रही थी और उसके खिलाफ 7 हत्या के मामले सहित कुल 26 केस थे। जबकि मधि के खिलाफ भी 15 मामले थे जिनमें पुलिस को उसकी तलाश थी।

    10 साल बिताए जंगलों में

    10 साल बिताए जंगलों में

    इन दोनों ने अपनी जिंदगी के 10 साल जंगलों में गुजारे और अब हथियार छोड़ने के बाद बाहर की दुनिया में सामंजस्य स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। मलकानगिरी-कोरापुट-विशाखापत्तनम बॉर्डर (एमकेवीबी) के पूर्व एरिया मेंबर रहे उर्ममि को अपनी पिछली जिंदगी पर अफसोस हो रहा है और वो कहता है कि उसने अपनी जिंदगी के 10 साल इस गलत सोच में बिता दिये कि वो गरीबों के लिए लड़ाई लड़ रहा है।

    आत्मसम्मान की जिंदगी जीना चाहता है जोड़ा

    आत्मसम्मान की जिंदगी जीना चाहता है जोड़ा

    उर्ममि ने 2008 में पार्टी जॉइन की थी, उसने बताया कि गांव में अक्सर माओवादी आते रहते थे और उनके कहने पर सीपीआई(एम) में शामिल हो गया। महज 16 साल की उम्र में उर्ममि ने कलिमेला लोकल गुरिल्ला स्क्वॉड (एलजीएस) जॉइन किया। एलजीएस में 8 साल रहने वाले उर्ममि ने बताया कि वो जिंदगी बहुत कठिन थी और सुबह 4 बजे उठना होता था। उसे 2016 में एमकेवीबी भेज दिया गया जहां उसे एरिया कमेटी मेंबर बना दिया गया। जंगल में ही मधि के रूप में उसे अपनी जीवन साथी मिली। मधि 15 साल की उम्र में माओवादियों के साथ आ गई थी। उसने बताया कि वो दोनों कई महीने से सरेंडर करना चाहते थे और गांव जाने के बहाने उनको ये मौका मिल गया। अब ये दोनों आत्मसम्मान और इज्जत की जिंदगी जीना चाहते हैं।

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    English summary
    dreaded maoist couple bid farewell to arms in odisha

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