DRDO चीफ ने वायुसेना को कहा थैंक्‍यू, बोले-IAF के बिना हथियारों का परीक्षण नामुमकिन

नई दिल्‍ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के मुखिया जी सतीश रेड्डी ने हथियारों के परीक्षण में मदद करने के लिए भारतीय वायुसेना (आईएएफ) का शुक्रिया अदा किया है। उन्‍होंने कहा कि कम समय में भी आईएएफ हमेशा रेडी थी और इस वजह से कई अहम हथियारों का परीक्षण हो सका। साथ ही डीआरडीओ चेयरमैन ने एंटी-कोविड-19 उपकरणों को एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाने के लिए भी वायुसेना का आभार जताया है।

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    हर समय मौजूद थी वायुसेना

    डीआरडीरओ चीफ जी सतीश रेड्डी ने कहा, 'भारतीय वायुसेना ने हमें हमारे ट्रायल्‍स के लिए सक्रिय तौर पर मदद दी और एंटी-कोविड-19 उपकरणों में भी वायुसेना की मदद मिली। उनकी मदद के बिना यह संभव नहीं था कि हम कई हथियारों का ट्रायल कर पाते और अपने कर्मियों को कोविड-19 से लड़ने के लिए उपकरण मुहैया करा पाते।' रेड्डी ने न्‍यूज एजेंसी एएनआई से यह बात उस समय कही जब उनसे हाल के समय में वायुसेना की तरफ से डीआरडीओ को मिलने वाली मदद से जुड़ा सवाल पूछा गया था। पिछले छह से सात हफ्तों के अंदर डीआरडीओ ने एक दर्जन से ज्‍यादा हथियार प्रणालियों का परीक्षण्‍र किया है जिसमें शौर्य स्‍ट्रैटेजिक मिसाइल, नाग एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, हाइपरसोनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी डेमॉन्‍स्‍ट्रेशन व्‍हीकल और रुद्रम-1 एंटी-रेडिएशन मिसाइल सिस्‍टम का सफल परीक्षण शामिल है। वहीं डीआरडीओ की मदद के लिए एयरफोर्स ने 160 घंटे की उड़ान को अलग-अलग ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्‍टर के जरिए अंजाम दिया। वहीं कोविड-19 की राहत सामग्री को मुहैया कराने के लिए करीब 100 घंटे की उड़ान को अंजाम दिया गया।

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