तमिल और हिंदी के बीच संवादसेतु बन चुक हैं डॉ एम गोविंदराजन
दो संस्कृति और दो भाषा के बीच यह जरूरी है कि संवाद हों। तमिल और हिंदी के बीच संवादसेतु के रूप में भाषाविद् डॉ एम गोविंदराजन बीते कई दशक से काम कर रहे हैं। काशी तमिल संगगम में नमो घाट पर उनसे मुलाकात हुई और उन्होंने कई बातें साझा। कहा कि जब संचार अंतर को पाटने पर आती है, तो नए नए अविष्कार हेते हैं। हम जैसे लोगों को आगे आना पड़ता है। सालों पहले डॉ. एम गोविंदराजन ने तुलसीदासकृत रामचरित मानस (तुलसी रामायण) (गद्य) का तमिल भाषा में अनुवाद भी किया है। इसके साथ ही गोस्वामी तुलसीदास की रचना विनय पत्रिका, पार्वती मंगल, वैरागय संदीपनी जैसी पुस्तकों का तमिल अनुवाद किया है। और तो और, कवि कोकिल विद्यापति के मैथिली पदावलियों को भी तमिल में अनुवाद कार्य हो चुका है।
उसी प्रकार संत तिरूवल्लर की प्रसिद्ध कृति तिरुक्कुरल का हिंदी अनुवाद भी डॉ एम गोविंराजन द्वारा किया गया है। इस पुस्तक में कुल 133 अध्याय है। इसे तीन भाग में बांटा गया है - धर्म, अर्थ और काम। इसके माध्यम से मानव को मोझ की बात कही गई है। इस पुस्तक के संदर्भ में बताते हुए डॉ एम गोंविदराज ने कहा कि धर्म के पथ पर चलकर अर्थ का अर्जन करके सपरिवार मिलकर परोपकारिता में जीवन बिताना ही तिरुक्कुरल का संदेश है। केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान, चैन्नई द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का हिंदी अनुवाद लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

डॉ एम गोविंदराजन ने बताया कि बीते साल जब काशी तमिल संगमम का आयोजन हुआ, तो उनके लिए यह कुंभ आयोजन के समान ही रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस सोच ने दो पुरातन संस्कृतियों को जीवंत कर दिया है। नया रूप दिया है। उन्होंने बताया कि बीते साल वे काशी तमिल संगमम कार्यक्रम के तहत संगम शहर में तमिल प्रतिनिधियों के दौरे से पहले, एक एसडीएम रैंक के प्रशासनिक अधिकारी, जो तमिलनाडु से हैं, ने मुझसे संपर्क किया था और मेहमानों का स्वागत करने के साथ-साथ जानकारी देने के लिए मेरी मदद मांगी। बीते साल मैं काशी से अधिक प्रयागराज में रहा। वहां रहते हुए आगंतुकों को तमिल भाषा में प्रयागज के महत्वपूर्ण स्थलों के बारे में जानकारी दी गई।
मुझे भी तमिलनाडु से आए मेहमानों का स्वागत करने का यह एक अच्छा अवसर मिला और मैंने उन्हें पवित्र संगम - गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम के बारे में बताया। तमिलनाडु के पर्यटक संगम के बारे में और अधिक जानने के इच्छुक थे क्योंकि उन्होंने माघ मेले, कुंभ और अर्ध कुंभ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के पवित्र स्नान करने के बारे में सुना था। मैंने सभी को पवित्र संगम - गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम के बारे में बताया। तमिलनाडु के पर्यटक संगम के बारे में और अधिक जानने के इच्छुक थे क्योंकि उन्होंने माघ मेले, कुंभ और अर्ध कुंभ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के पवित्र स्नान करने के बारे में सुना था।

नमो घाट पर इस साल के आयोजन को लेकर भी डॉ एम गोविंदराजन बेहद सकारात्मक हैं। बताते हैं कि यहां बच्चों को हर दिन तमिल सिखा रहा हूं। कोशिश है कि 15 दिन के इस आयोजन में हिंदी भाषी बच्चे कम से कम 150 शब्द तमिल के सीख जाएं। यह शुरुआत है। तमिल और हिंदी के बीच संवाद बनाने के लिए सरकार काफी काम कर रही है। आने वाले दिनों में इसकी परिणति देखने को मिलेगी।












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