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सीआईएसएफ की मदद करेंगे ओसामा बिन लादेन का पता लगाने वाले खास तरह के कुत्‍ते

साल 2011 में अमेरिकी नेवी सील ने एक खास ऑपरेशन के तहत अल कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था। पाकिस्‍तान के एबट्टाबाद में चलाए गए इस ऑपरेशन में डॉग स्‍क्‍वायड की अहम भूमिका थी।

नई दिल्‍ली। साल 2011 में अमेरिकी नेवी सील ने एक खास ऑपरेशन के तहत अल कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था। पाकिस्‍तान के एबट्टाबाद में चलाए गए इस ऑपरेशन में डॉग स्‍क्‍वायड की अहम भूमिका थी। इस डॉग स्‍क्‍वायड में शामिल बेल्जियम मालिंसो, जो एक खास प्रजाति के कुत्‍ते होते हैं, भारत आने वाले हैं। ये कुत्‍ते दिल्‍ली मेट्रो की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ के जवानों की मदद करेगा ताकि किसी भी खतरनाक आत्‍मघाती हमले को रोका जा सके। ये कुत्‍ते हमलावर का पता लगाकर सीआईएसएफ के जवानों को अलर्ट करेंगे। सीआईएसएफ इन कुत्‍तों को खास तरह की ट्रेनिंग भी देगी। इंग्लिश डेली हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स की ओर से यह जानकारी दी गई है।

नेवी सील के सबसे बड़े मददगार

नेवी सील के सबसे बड़े मददगार

जब अमेरिका ने लादेन को मारने के लिए खास ऑपरेशन चलाया जो बेल्जियम मालिंसो ने सूंघकर लादेन का पता लगाया था और नेवी सील को लादेन को लोकेट करने में मदद मिली थी। अब यही बेल्जियम मालिंसो दिल्‍ली मेट्रो और इंदिरा गांधी इंटरेनशनल एयरपोर्ट (आईजीआई) पर तैनात होंगे। खास ट्रेनिंग के बाद ये कुत्‍ते किसी भी तरह के फिदायीन हमले को रोकने में सक्षम हो पाएंगे। देश की पैरामिलिट्री फोर्सेज के लिए पहला मौका होगा जब उन्‍हें इस तरह के डॉग स्‍क्‍वायड से लैस किया जाएगा। इन कुत्‍तों को सबसे पहले असम स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क में तैनात किया गया था ताकि शिकार को रोका जा सके।

सीआईएसएफ के लिए बनेंगे रीढ़ की हड्डी

सीआईएसएफ के लिए बनेंगे रीढ़ की हड्डी

इंटलीजेंस एजेंसियों की ओर से बार-बार दिल्‍ली मेट्रो और आईजीआई पर फिदायीन हमलों की चेतावनी दी जा चुकी है और इन चेतावनियों के बाद ही इस तरह के उपायों की पहल की गई है। एक सीनियर सीआईएसएफ ऑफिसर की ओर से बताया गया है कि अभी तक सीआईएसएफ लैब्राडॉर, जर्मन शेफर्ड और कॉकर स्‍पैनियल्‍स पर भरोसा करती थी। लेकिन ये सभी प्रजातियां डमी टेस्‍ट के दौरान फिदायीन हमलावर को पता लगाने में असफल रहे थे। इसके बाद बेल्जियम मालिंसो को चुना गया। सीआईएसएफ की मेट्रो यूनिट के पास फिलहाल 63 कुत्‍ते हैं।

युद्ध प्रभावित क्षेत्र में होता है प्रयोग

युद्ध प्रभावित क्षेत्र में होता है प्रयोग

हालांकि अभी तक यह फैसला नहीं लिया जा सका है कि कितने बेल्जियम मालिंसो को सीआईएसएफ खरीदेगी। सीआईएसएफ ने हाल ही में अपनी खुद की एक स्‍वाट यानी स्‍पेशल वेपंस एंड टैक्टिक्‍स टीम के गठन का फैसला किया है। माना जा रहा है कि ये कुत्‍ते इसी टीम की मदद करेंगे। मालिंसो को युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में हमलों का पता लगाने के लिए सबसे ज्‍यादा प्रयोग किया जाता है। साल 2015 में पूर्व अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत आने से पहले इन कुत्‍तों की मदद सुरक्षा से संबंधी सभी जरूरी जांच करने में ली गई थी।

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