डॉक्टरों ने ऑपरेशन करते हुए पेट में छोड़ा सर्जिकल मॉप, चार साल बाद महिला ने जीती ये लड़ाई
डॉक्टरों ने ऑपरेशन करते हुए पेट में छोड़ा सर्जिकल मॉप, चार साल बाद महिला ने जीती ये लड़ाई
Medical Negligence Case: डॉक्टर जिन्हें भगवान का रूप कहा जाता है, जिन पर मरीज आंख बंद करके विश्वास करते हैं, लेकिन कई बार चिकित्सकों की लापरवाही के ऐसे मामले आते हैं, जिनके बाद मरीजों का डॉक्टरों पर विश्वास डगमगा जाता है। ऐसा ही घोर चिकित्सीय लापरवाही के एक चौंकाने वाला मामला कर्नाटक के उडुपी शहर के एक अस्पताल में हुआ। जिसमें सर्जन ने ऑपरेशन के दौरान बेंगलुरु की एक 31 वर्षीय महिला के पेट में एक सर्जिकल मॉप छोड़ दिया। इतना ही नहीं महिला के असहनीय दर्द की शिकायत के बाद अन्य वजहें बता कर और दो बार और ऑपरेशन तक कर डाला लेकिन वो सर्जिकल मॉप नहीं निकाला।

ऑपरेशन के दौरान छोड़ा सर्जिकल मॉप
बेंगलुरू की यहलंका की रहने वाली इस 31 वर्षीय महिला का उडुपी के अस्पताल में ऑपरेशन करते समय उसके पेट में मॉप छोड़ दिया जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। महिला के बार-बार दर्द होने की शिकायत के बाद उसी अस्पताल के डॉक्टरों ने मॉप होने की बात छिपाए रखी।

गर्भवस्था में दर्द होने के बाद करवाया गया था भर्ती
ये मामला 29 जुलाई 2018 का है जब बेंगलुरू महिला उडुपी गई हुई थी। उसे अचानक से लेबर पेन शुरू हो गया। आनन-फानन में महिला को उडुपी के टीएमसी पाई अस्पताल में भर्ती करवाया। प्रेग्नेंसी में नॉरमल डिलीवरी होने में समस्या होने के कारण डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन किया और उसकी बेटी का जन्म करवाया। इसके बाद महिला को पेट में लगातार दर्द और अन्य समस्या हो रही थी तब उसने ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों से बताया तो उन्होंने कहा ये सी-सेक्शन के कारण हो रहा है और दवाइयां देकर उसे डिस्चार्ज कर दिया।

महिला का डॉक्टरों ने दूसरा किया ऑपरेशन
22 सितंबर 2018 को महिला का उसकी हालत बिगड़ी और भयंकर दर्द होने पर उसने डॉक्टर को दिखाया जिसके बाद अल्ट्रासाउंन में महिला की बाई तरफ की ओवरी नजर नहीं आ रही थी। तब महिला ने कुछ बाहरी चीज उसके पेट में होने की शिकायत की लेकिन डॉक्टरों ने अनदेखा कर दिया। लगातार दर्द होने के कारण 24 सितंबर 2018 का महिला का डॉक्टरों ने एक ऑपरेशन किया और कुछ दिन में उसे अस्पताल से 6 अक्टूबर को डिस्चार्ज कर दिया।

डॉक्टरों ने असली वजह छिपा कर फिर कर डाला ऑपरेशन
घर आने पर बच्चे को दूध पिलाते समय असहनीय दर्द हो रहा था। जिसके बाद उसने दोबारा डॉक्टर को हर दूसरे दिन दिखाने पहुंची तो मॉप की बात छिपाकर दूसरी समस्या बताकर डॉक्टरों ने फिर से तीसरी बार उसका ऑपरेशन किया। उसने डॉक्टर से शिकायत की कि टीएमसी पाई अस्पताल के डॉक्टरों ने उसके शरीर के साथ कुछ गलत किया है।

एआरआई में हुआ खुलासा, दूसरे अस्पताल के डॉक्टरों ने निकाला मॉप
पति ने पत्नी के दर्द से परेशान होकर आयुर्वेदिक डॉक्टर को दिखाया जिसने एमआरआई करवाई। जिसे देखकर हर कोई हैरान हो गया क्योंकि डॉक्टरों को उसके पेट में सर्जिकल मॉप नजर आया। इसके बाद महिला को मनीपाल के कस्तूरबा अस्पताल में परिवार वालों ने भर्ती करवाया और उसका ऑपरेशन कर वो मॉप को बाहर निकाला। इस सर्जरी के बाद उसका दर्द खत्म हुआ। ये मॉप उसके पेट में मिला वो टीएमसी पाई अस्पताल में उसका ऑपरेशन करते हुए डॉक्टरों ने छोड़ दिया था।

महिला को उपभोक्ता कोर्ट से 4 साल बाद मिला न्याय
महिला ने अपनी सभी रिपोर्ट के साथ बेंगलुरू उपभोक्ता फोरम में उड़ुपी के उक्त अस्पताल के खिलाफ केस दर्ज करवाया। 11 डॉक्टरों के पैनल ने मामले की जांच की और जिसमें पाया कि अस्पताल के सर्जरी करने वाले डॉक्टरों ने गलती से महिला के पेट में ऑपरेशन के दौरान वो सर्जिकल मॉप छोड़ा था। कोर्ट ने अस्पताल पर जुर्माना लगाते हुए 20 लाख रुपये महिला को देन का आदेश दिया है।












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