बड़ा फैसला: अब हिंसक मरीजों के इलाज से मना कर सकते हैं डॉक्टर, RMP के लिए जारी किए गए नए नियम

देश के अलग-अलग हिस्सों से डॉक्टरों की उपर हिंसा की खबरें लगातार आती रहती हैं। अब डॉक्टरों के संघ ने इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए बड़ा फैसला किया है।

नेशनल मेडिकल कमीशन रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर ने ऐलान किया है कि, डॉक्टर अब "अपमानजनक, अनियंत्रित और हिंसक मरीजों या फिर रिश्तेदारों" का इलाज करने से इनकार कर सकते हैं।

Doctors Can Now Refuse To Treat Abusive, Violent Patients

हिंसक मरीजों के उपचार से मना कर सकते हैं डॉक्टर

डॉक्टरों के ऊपर हो रहीं हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन ने नोटिफिकेशन जारी किया है। रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिसनर्स (आरएमपी) उन मरीजों या रिश्तेदारों का इलाज करने से इनकार कर सकते हैं, जो डॉक्टरों के साथ गाली-गलौज, मारपीट व हिंसा करने पर उतारू हो जाते हैं।

रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिसनर्स की ओर से जारी नॉटिफिकेशन में कहा गया है कि, रोगी की देखभाल करने वाला आरएमपी अपने कार्यों के लिए पूरी तरह से जवाबदेह होगा और उचित शुल्क का हकदार होगा।

अधिसूचना में कहा गया है कि, अपमानजनक, अनियंत्रित और हिंसक रोगियों या रिश्तेदारों के मामले में आरएमपी उनके व्यवहार का दस्तावेजीकरण और रिपोर्ट कर सकता है और रोगी का इलाज करने से इनकार कर सकता है। ऐसे मरीजों को आगे के इलाज के लिए कहीं और रेफर किया जाएगा।

नोटिफिकेशन में कहा गया है कि इमरजेंसी केस को छोड़कर ड़ॉक्टर ये तय करने के लिए स्वतंत्र है कि वह किस मरीज का इलाज करें। लेकिन डॉक्टर को यह जरूर देखना होगा कि ऐसा करने से कहीं उस मरीज की जान का जोखिम तो नहीं बढ़ जाएगा।

ये नए नियम मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के मेडिकल एथिक्स कोड 2002 की जगह लेंगे। यह पहली बार है कि डॉक्टरों को अनियंत्रित और हिंसक मरीजों का इलाज करने से इनकार करने का अधिकार होगा। इस कदम का उद्देश्य डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा को हतोत्साहित करना है।

अब सर्जरी और उपचार को लेकर मरीज को देनी होगी पूरी जानकारी

नए नियमों के मुताबिक, सर्जरी या उपचार की लागत के बारे में पूरी जानकारी मरीज को देनी जरूरी है। यहां तक कि मरीज की जांच करने या इलाज शुरू करने से पहले उसे परामर्श शुल्क के बारे में बताना होगा। इसके बाद भी अगर कोई मरीज शुल्क नहीं देता है तो डॉक्टर के पास यह अधिकार है कि वह उपचार के लिए इनकार कर सकता है।

अधिसूचना में कहा गया है कि, आरएमपी को मरीज की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए और न ही मरीज और उसके परिवार को पर्याप्त नोटिस दिए बिना मामले से हटना चाहिए। यदि आरएमपी में बदलाव की आवश्यकता है सहमति स्वयं रोगी या अभिभावक से प्राप्त की जानी चाहिए।

डॉक्टर नहीं कर सकेंगे दवा के विज्ञापन

नए नियमों के अनुसार, अगर किसी डॉक्टर या उनके परिवार को कोई उपहार, यात्रा सुविधाएं, नकद अनुदान देता है तो उस डॉक्टर का लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है। इसके अलावा पंजीकृत डॉक्टर सेमिनार, कार्यशाला, संगोष्ठी या फिर सम्मेलन जैसे किसी भी तीसरे पक्ष की उन शैक्षिक गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकेंगे, जिनका किसी फार्मा कंपनी का संबंध हो। अधिसूचना में साफ तौर पर कहा है कि किसी भी स्थिति में डॉक्टर उपहार नहीं ले सकते। वह दवाओं के विज्ञापन देने के लिए भी प्रतिबंधित होगा।

अब 5 दिनों के भीतर मरीज को देने होंगे मेडिकल रिकॉर्ड

अगर किसी अस्पताल में उपचार कराने वाले मरीज को अपने दस्तावेज की जानकारी चाहिए तो उक्त अस्पताल में संबंधित डॉक्टर को यह कार्य अधिकतम पांच दिन में करना होगा। अभी 72 दिन का समय दिया जाता है। चिकित्सा आपात स्थिति के मामले में, मेडिकल रिकॉर्ड जल्द से जल्द उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाना चाहिए।

डॉक्टर अब मनचाही डिग्री नहीं लिख सकते हैं

नई अधिसूचना के मुताबिक, पंजीकृत डॉक्टर अपने नाम के आगे मनचाही डिग्री या कोर्स का नाम नहीं लिख सकता है। वह अपने नाम के आगे केवल एनएमसी की ओर से मान्यता प्राप्त या फिर मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री/डिप्लोमा का नाम लिखना ही लिख सकेगा।

आरएमपी डॉक्टर कौन होता है?
आरएमपी का पू रा नाम रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिसनर्स होता है। भारत में रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिसनर्स एक ऐसे व्यक्ति को कहा जाता है जिसके पास एक प्रोफेशनल मेडिकल डिग्री हो। जो मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा पंजीकृत हो। मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक चिकित्सा कोर्स (जैसे एमबीबीएस और बीडीएस) पूरा करने के बाद राज्य चिकित्सा परिषद या मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के साथ पंजीकृत होकर कोई भी आरएमपी डॉक्टर बन सकता है।

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