मासूम बेटी को खोने के बाद डॉक्टर दंपति ने जीने का नया रास्ता ढूंढा, दो बच्चों की बचाई जान
मुंबई। डॉक्टर को यूं तो लोग भगवान का दर्जा देते हैं जो मरीजों के लिए एक बड़ी उम्मीद होते हैं। हालांकि डॉक्टर इलाज के जरिए मरीजों के भीतर इस भरोसे को जीत पाए हैं, लेकिन मुंबई में डॉक्टर दंपति ने अलग तरीके से ही मासूम की मदद करके बच्चे को नया जीवन देने का काम किया है। मुंबई के रहने वाले डॉक्टर उमेश सावरकर और अश्विनी सावरकर ने दो बच्चों के ऑपरेशन का पूरा खर्च खुद उठाया, जिसके बाद दोनों बच्चों का ऑपरेशन 21 अगस्त को किया गया।

सड़क हादसे में बेटी को खोया
दरअसल दंपति ने पिछले वर्ष एक सड़क हादसे में अपनी चार साल की मासूम बच्ची मीरा को खो दिया था, तमाम कोशिशों के बाद भी वो बच्चे के अंगों को दान नहीं कर सके थे। लेकिन इस हादसे के आठ महीने बाद दंपति ने दो मासूम बच्चों के ऑपरेशन का पूरा खर्च खुद वहन करने का फैसला लिया। मीरा के माता-पिता की वजह से अमरावती के वघोली और देवगांव गांव के रहने वाले दो बच्चों की जान बच गई और दोनों वापस सामान्य जीवन जी रहे हैं।
दो बच्चों की मदद के लिए आगे आए
साढ़े चार साल की पायल पराते और पांच साल के अश्वशील धावले के दिल में छेद था। दोनों ही बच्चों को हर रोज सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, लेकिन पैसों की कमी की वजह से उनका ऑपरेशन नहीं हो पा रहा था। मीरा के पिता का कहना है कि इन बच्चों को मेरी बच्ची के अंग नया जीवन दे सकते थे, लेकिन यह ना तो हमारे भाग्य में था और ना ही हमारे हाथ में। हम अपनी बेटी को खोन के बाद उम्मीद नहीं छोड़ना चाहते थे, इसीलिए हमने फैसला लिया है कि हम जरूरतमंद लोगों का ऑपरेशन करेंगे जिन्हें इसकी सख्त जरूरत है।
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पेशे से दंपति डॉक्टर
डॉक्टर उमेश जोकि स्त्रीरोग विशेषज्ञ हैं और उनकी पत्नी अश्विनी पैथॉलोजी चलाती हैं। दोनों ही लगातार तीन महीने से यह योजना बना रहे थे कि वह ऐसे किसी बच्चे की मदद करेंगे जिसे पैसों की सख्त जरूरत होगी। जिसके बाद दोनों अमरावती के श्री संत अच्युतानंद महाराज हार्ट हॉस्पिटल पहुंचे, जहां सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि पायल और अश्वशील को इसकी बहुत जरूरत है।
जारी रखेंगे प्रयास
जिसके बाद दोनों बच्चों का ऑपरेशन किया गया। डॉक्टर उमेश ने बताया कि ऑपरेशन के बात पायल के पिता काफी खुश थे, उनका ऑपरेशन बिना किसी सरकारी योजना के तहत किया गया था। वहीं अश्वशील के ऑपरेशन के लिए आखिरी समय में सरकार की ओर से फंड को पास कर दिया गया था। डॉक्टर उमेश ने बताया कि इस राशि को किसी दूसरे जरूरतमंद के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। दोनों डॉक्टर दंपति अपने इस प्रयास को आगे भविष्य में भी जारी रखना चाहते हैं।
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