राफेल की तुलना बोफोर्स से नहीं हो सकती: रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण
आपको बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षामंत्री निर्मला सीतरमण पर करारा हमला बोला था
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि राफेल डील की तुलना बोफोर्स से ना करें क्योंकि इसमें कोई घोटाला नहीं हुआ है। राफेल डील को लेकर विपक्ष की तरफ से उठाए जा रहे सवालों के बीच रक्षा मंत्री ने कहा कि राफेल डील में किसी तरह का घोटाला नहीं हुआ है लिहाजा इसकी तुलना बोफोर्स से नहीं की जा सकती। इससे पहले पिछले महीने रक्षा मंत्री ने कहा था कि 'भाजपा की भ्रष्टाचार पर साफ-सुथरी छवि से कांग्रेस परेशान है, इसलिए वह रोज हमारे खिलाफ नए-नए घोटाले ढूंढ कर ला रही है।

आपको बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षामंत्री निर्मला सीतरमण पर करारा हमला बोला था। राहुल ने राफेल सौदे में कथित घोटाले के मसले पर तीन सवाल पूछे हैं। बता दें कि कांग्रेस का आरोप है कि जहाजों की कीमत 526 करोड़ रुपए हैं लेकिन सौदा 1571 करोड़ रुपयों का हुआ है। बता दें कि राफेल डील की शुरूआत यूपीए सरकार के दौरान ही हुई थी। कांग्रेस ने कहा कि यूपीए सरकार ने भारत और फ्रांस के बीच 126 राफेल जहाजों का सौदा किया था। इसमें सिर्फ 16 जहाज खरीदे जाने थे। शेष के लिए फ्रांस भारत की सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को राफेल बनाने की तकनीक देती। इसी मुद्दे पर राहुल ने आज तीन सवाल किए हैं। उन्होंने लिखा है कि - प्रिय रक्षा मंत्री, क्या शर्मिंदगी है कि आपके बॉस आपको चुप करा रहे हैं। कृप्या हमें यह बताएं-
1- हर राफेल जेट की फाइल प्राइस।
2- क्या प्रधानमंत्री ने पेरिस में खरीदारी की घोषणा करने से पहले सीसीएस की अनुमति ली?
3- क्यों पीएम ने अनुभवी एचएएल को नजरअंदाज कर दिया और जिसके पास रक्षा का कोई अनुभव नहीं है उस AA रेटेड बिजनेसमैन को डील क्यों दिया?
वहीं केंद्र की मोदी सरकार ने फ्रांस के साथ राफेल डील में बड़ी बचत करने का दावा किया है। राफेल सौदे में एनडीए के कार्यकाल के दौरान कीमतें बढ़ने के यूपीए के आरोप का जवाब देते हुए सरकार की ओर से यह दावा किया गया है कि फ्रांस के साथ राफेल डील में एनडीए सरकार ने 12,600 करोड़ रुपये की बचत की है। कांग्रेस पार्टी के आरोपों को खारिज करते हुए सरकारी सूत्रों ने कहा कि इन एयरक्राफ्ट्स को उड़ने की स्थिति में खरीदा गया है। इस डील में 12,600 करोड़ रुपये बचे हैं। यही नहीं सरकारी सूत्रों ने दावा किया कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में इस संबंध में कोई डील हुई ही नहीं थी।












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