सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सरकार तय करे, जम्मू-कश्मीर में मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं कि नहीं?
कोर्ट की ओर से कहा गया है कि केंद्र और जम्मू कश्मीर सरकार आपस में बैठ कर तय करें कि क्या जम्मू-कश्मीर में रह रहे मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं या नहीं?
नई दिल्ली। क्या जम्मू कश्मीर में रहने वाले मुस्लिमों को अल्पसंख्यक दर्जा दिया जाना चाहिए? इस सवाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार से कहा है कि वो इस मुद्दे पर बैठ कर बात करें और इसको लेकर आखिरी फैसला लें। सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी जम्मू-कश्मीर में रह रहे अल्पसंख्यक हिन्दुओं को केंद्र और राज्य की सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली सुविधाओं को देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान की है।

जम्मू-कश्मीर में हिंदू अल्पसंख्यक या मुस्लिम?
मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर, न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने दोनों सरकारों को चार हफ्ते का समय दिया है। कोर्ट की ओर से कहा गया है कि ये अहम मुद्दा है, जिस पर तय समय में फैसला लिया जाना चाहिए। कोर्ट की ओर से कहा गया है कि केंद्र और जम्मू कश्मीर सरकार आपस में बैठ कर तय करें कि क्या जम्मू-कश्मीर में रह रहे मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं या नहीं? केंद्र सरकार ने कहा है कि जल्द ही इस मुद्दे पर राज्य से चर्चा करके इस पर आखिरी फैसला लिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला अंकुश शर्मा की याचिका पर आया है। अंकुर शर्मा ने याचिका में कहा था कि जम्मू कश्मीर में कुल आबादी की 68 फीसदी मुस्लिम आबादी है, बावजूद इसके वो राज्य में अल्पसंख्यक बने हुए हैं और इससे जुड़ी सुविधाएं ले रहे हैं। याचिका में कहा गया कि जम्मू-कश्मीर में हिंदू अल्पसंख्यक हैं। ऐसे में मुस्लिम आबादी को अल्पसंख्यक दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए। यहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं और उन्हें अल्पसंख्यक दर्जा दिया जाना चाहिए, जिससे वो केंद्र और राज्य की सरकारी सुविधाएं हासिल कर सकें।












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