द्रमुक सांसद का विवादित बयान, कहा- जब तक आप हिंदू हैं, तब तक आप अछूत
नई दिल्ली, 13 सितंबर। द्रमुक सरकार के एक वरिष्ठ नेता और सांसद ए राजा ने हिंदू धर्म को लेकर विवादित बयान दिया है। उनके इस विवाद पर तमिलनाडु में राजनीति गरमा गई है। इस बयान को लेकर भाजपा ने आपत्ति जताई है। तमिलनाडु के भाजपा अध्यक्ष, अन्नामलाई ने ट्विटर पर उनके इस वीडियो को शेयर कर हमला बोला है। अन्नामलाई ने द्रमुक सांसद पर निशाना साधते हुए कहा कि वो एक खास समुदाय को निशाना बनाकर तुष्टीकरण की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में राजनीतिक बहस की स्थिति के लिए खेद है। @arivalayam सांसद ने एक बार फिर दूसरों को खुश करने के उद्देश्य से एक समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाई है। ये राजनीतिक नेताओं की बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण मानसिकता। अगर वो सोचते हैं कि वे तमिलनाडु के मालिक हैं, तो गलत सोच रहे हैं।

ए राजा ने दिया था यह बयान
ए राजा तमिलनाडु में स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रमुक सरकार के एक वरिष्ठ नेता है। ए राजा का अतीत 2जी घोटाले जैसे विवादास्पद बयानों और भ्रष्टाचार के मामलों से भरा पड़ा है। वह पिछले हफ्ते तमिलनाडु के नमक्कल में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कथित तौर पर हिंदू धर्म में जातिवाद को लेकर हमला बोला। तमिल में बोलते हुए राजा ने कथित तौर पर कहा कि शूद्र, वर्ण व्यवस्था में सबसे निचली जाति, वेश्याओं की संतान हैं और वे तब तक बने रहेंगे जब तक वे हिंदू धर्म का पालन करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी की टिप्पणी
इसके अलावा उन्होंने कहा कि जब तक आप हिंदू नहीं हैं, तब तक आप शूद्र हैं। जब तक तुम शूद्र नहीं हो तब तक तुम वेश्या के पुत्र हो। जब तक आप हिंदू नहीं हैं, तब तक आप पंजायथु (दलित) हैं और जब तक आप हिंदू नहीं हैं, तब तक आप अछूत हैं। इस दौरान उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि यदि आप ईसाई, मुस्लिम या फारसी नहीं हैं, तो आपको हिंदू होना चाहिए। ऐसा अत्याचार किसी और देश में देखा है?''
ए राजा यही नहीं रुके, इसके बाद उन्होंने सनातन धर्म को चुनौती देने के लिए लोगों से सवाल उठाने और जाति के मुद्दों पर मुखर होने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि द्रमुक और उसके मुखपत्र मुरासोली और द्रविड़ कड़गम के मुखपत्र विदुथलाई के लिए इस मुद्दे को उठाने का समय आ गया है। द्रविड़ कड़गम एक सामाजिक आंदोलन था, जिसे पेरियार ईवी रामासामी ने मौजूदा जाति व्यवस्था और अस्पृश्यता की बुराइयों को मिटाने के लड़ा गया था।
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