डीके शिवकुमार कब-कब बने संकटमोचक, कभी कांग्रेस के सबसे बड़े क्राइसिस मैनेजर का भी दूर किया था संकट
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर से संकटमोचक साबित होने की उम्मीद लगाई है। वैसे मंगलवार को जिस तरह से पार्टी हिमाचल प्रदेश राज्यसभा चुनाव में जीती हुई बाजी हार गई, उसके बाद लग रहा था कि राज्य में सरकार से भी हाथ गई!
लेकिन, बुधवार यह साफ हो गया है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार फिलहाल के लिए तो बच गई है। कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके ने खुद इस बात की पुष्टि की थी कि कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें हिमाचल प्रदेश जाने को कहा था।

कांग्रेस ने शिवकुमार को हिमाचल जाने को कहा
शिवकुमार के मुताबिक, 'कांग्रेस पार्टी ने निर्देश जारी किया है कि मुझे वहां होना चाहिए। मैं नहीं जानता कि बीजेपी इतनी जल्दी में क्यों है। इस तरह का खरीद-फरोख्त, किसी दिन दांव उल्टा पड़ सकता है....मुझे विश्वास है कि हमारे विधायक पार्टी के प्रति वफादार बने रहेंगे।'
यूं कहें कि आज कांग्रेस आलाकमान या गांधी-नेहरू परिवार के सामने आए हर सियासी संकट के समय डीके शिवकुमार पेनकिलर का काम करते हैं तो गलत नहीं होगा।
एग्जिट पोल आते ही तेलंगाना में संभाला था मोर्चा
पिछले साल दिसंबर में जब तेलंगाना चुनाव के बाद एग्जिट पोल में कांग्रेस की जीत की भविष्यवाणी की जा रही थी तो भी पार्टी ने उन्हें नेताओं को एकजुट रखने के लिए हैदराबाद भेज दिया था।
अहमद पटेल का भी किया था संकट दूर
गुजरात के भरूच से आने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता दिवंगत अहमद पटेल को करीब दो दशकों तक पार्टी का सबसे बड़ा क्राइसिस मैनेजर माना जाता था।
सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव के तौर पर पार्टी में उनका कद राष्ट्रीय अध्यक्ष के बाद सबसे ताकतवर होता था। लेकिन, जहां दूसरे दलों के साथ भी किसी तरह का संकट फंसता था तो वह सोनिया की परेशानी दूर करने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते थे।
लेकिन, 2017 में अहमद पटेल खुद एक बड़े राजनीतिक संकट में फंस गए। वह गुजरात से राज्यसभा चुनाव लड़ रहे थे। आशंका थी कि कांग्रेस के कुछ विधायक क्रॉस-वोटिंग कर सकते हैं।
आलाकमान ने पटेल का चुनाव बचाने की जिम्मेदारी डीके को सौंपी और उन्होंने उन विधायकों को बेंगलुरु के एक रिसॉर्ट में रखकर खूब खातिरदारी की, लेकिन एक को भी टूटने नहीं दिया। अहमद पटेल चुनाव जीत गए।
महाराष्ट्र में भी कांग्रेस सरकार बचाने के आ चुके हैं काम
शिवकुमार अपनी संकटमोचक वाली यह भूमिका कुछ वर्षों से नहीं निभा रहे हैं। इसमें उन्हें दो दशक से भी ज्यादा हो चुके हैं। समर्थकों के बीच 'चट्टान' जैसी छवि रखने वाले कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री को 2002 में ही महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार को बचाने की चुनौती दी गई थी।
कांग्रेस के एक नेता ने उस घटना को याद कर बताया था कि महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख को विश्वासमत प्राप्त करना था। उन्होंने शिवकुमार से संपर्क किया।
उन्होंने राज्य के कांग्रेस विधायकों को बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित अपने रिसॉर्ट में करीब एक हफ्ते तक रखा। विश्वासमत वाले दिन सारे विधायक मुंबई पहुंचा दिए गए और देशमुख सरकार बच गई।
तीन दशकों में अक्खड़ नेता से मंजे हुए संकटमोचक बन गए
डीके करीब तीन दशकों से राजनीति में हैं। इन वर्षों में उन्होंने खुद को एक अक्खड़ नेता से पहले सभ्य राजनेता में तब्दील किया और फिर मंजे हुए संकटमोचक बन गए। आज की तारीख में कांग्रेस में कैसा भी संकट आए शिवकुमार 'येस बॉस' वाले रोल निभाने के लिए तैयार रहते हैं।
पार्टी के बड़े 'फंड मैनेजर' भी माने जाते हैं शिवकुमार
अगर मान लें कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी में इतना बड़ा ओहदा पा लिया है तो इसके पीछे सिर्फ उनका राजनीतिक कौशल है तो शायद यह सही नहीं होगा। वे राजनीति के चतुर खिलाड़ी होने के साथ-साथ पार्टी के बड़े 'फंड मैनेजर' भी माने जाते हैं।
एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कर्नाटक विधानसभा चुनाव में वे राज्य के तीसरे सबसे अमीर उम्मीदवार थे। उन्होंने अपने पास कुल 1,413 करोड़ रुपए की संपत्ति घोषित की थी।
राजनीतिक विज्ञान में पोस्ट-ग्रैजुएट शिवकुमार राजनीति के अलावा विभिन्न तरह के कारोबार में भी शामिल हैं। उनके शिक्षण संस्थान भी चलते हैं और ग्रेनाइट का भी कारोबार है। साथ ही साथ रियल एस्टेट से लेकर सिनेमा के भी बिजनेस में हाथ आजमाते रहे हैं।
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने उन्हें कर्नाटक जिताने की जिम्मेदारी सौंपी थी। चुनाव परिणाम आने के बाद उन्होंने कहा था, 'मैंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से कहा था कि हम आपको कर्नाटक डिलिवर करके देंगे।'












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