क्या गृह मंत्री रहते चिदम्बरम ने पाकिस्तान के इशारे पर किया था काम? किसने लगाया ये आरोप?

पटना। क्या पूर्व गृह मंत्री पी चिदम्बरम ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आएसआइ की मदद की थी ? बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने आरोप लगाया है कि इशरत जहां केस में तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदम्बरम ने पाकिस्तान के इशारे पर अपने अवर सचिव मणि के जरिये कोर्ट में दायर हलफनामा को बदलवा दिया था ताकि इशरत जहां और उसके साथी आतंकी साबित नहीं हो सकें। ऐसा कर के चिदम्बरम गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को हत्या के केस में फंसाना चाहते थे। इतना ही नहीं सुशील मोदी ने कहा है कि चिदम्बरम ने गृहमंत्री रहते आइएसआइ की मदद की थी जिसकी वजह से उस दौर में कई जगह आतंकी घटनाएं हुईं थीं और नकली नोटों की आमद भी बढ़ी थी। सुशील मोदी ने आखिर चिदम्बरम पर क्यों यह आरोप लगाया ? उस वक्त ऐसा क्या किय़ा था चिदम्बरम ने?

क्या गृह मंत्री रहते चिदम्बरम ने पाक के इशारे पर किया काम?

चिदम्बरम के इशारे पर बदला गया था हलफनामा

पी चिदम्बरम नवम्बर 2008 से जुलाई 2012 तक भारत के गृह मंत्री थे। उनके कार्यकाल में ही गृह मंत्रालय के अवर सचिव आरवीएस मणि ने इशरतजहां केस में दो एफिडेविट दाखिल किये थे। पहले एफिडेविट में इशरत और उसके तीन साथियों को लश्कर का आतंकी बताया गया था। लेकिन मणि को यह हलफनामा दाखिल करने पर प्रताडित किया गया। इस हलफनामा को बदलने के लिए उन पर दबाव बनाया गया। 2009 में जब मणि ने दूसरा हलफनामा दाखिल किया तो उसमें कहा गया कि इशरत और उसके साथियों को आतंकी साबित करने लायक पुष्ट सबूत नहीं हैं। बाद में मणि ने खुलासा किया था कि चिदम्बरम के इशारे पर दूसरा हलफनामा दाखिल किया गया था।

सिगरेट से दागा गया था मणि को

मणि के मुताबिक, एफिडेविट बदलने के लिए एसआइटी के एक बड़े अफसर ने मुझे डराया था। सिगरेट से दागा गया था। इशरत और उसके तीन साथियों को आतंकी नहीं बताने के लिए खास तौर पर एफिडेविट ड्राफ्ट किया गया था। किसी दूसरे के लिखे-लिखाये हलफनामा पर मुझ से जबरन दस्तखत ले लिया गया था। मणि के मुताबिक, इन सब के पीछे चिदम्बरम ही थे। उस समय के गृह सचिव जीके पिल्लई ने भी कहा था कि 2009 में गृह मंत्री चिदम्बरम ने इशरतजहां केस की फाइल अपने पास मंगायी थी और केन्द्र सरकार के हलफनामा को बदलवाया था ताकि इशरत जहां का लश्कर कनेक्शन सामने न आ सके।

इशरत जहां इनकाउंटर

15 जून 2004 को अहमदाबाद में गुजरात पुलिस ने इशरत जहां, जावेद गुलाम शेख, अहमद अली राणा और जिशान जौहर को एक इनकांउटर में मार गिराया था। इस इनकांउंटर की अगुआइ डीआइजी, डीजी बंजारा कर रहे थे। गुजरात पुलिस ने इशरत और उसके साथियों को आतंकी बताया था और कहा थे कि वे गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेन्द्र मोदी की हत्या के फिराक में थे। ये मामला गुजरात हाईकोर्ट में गया। हाइकोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए एसआइटी गठित की थी। एसआइटी ने इस मुठभेड़ को फर्जी बता दिया। तब कोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआइ को सौंप दी। बाद में सीबीई जांच पर भी कई सवाल उठे।

मोदी शाह की गिरफ्तारी की थी तैयारी

इस मामले में इनकाउंटर करने वाली टीम के हेड डीजी बंजारा गिरफ्तार हुए थे। तब इंटेलिजेंस ब्यूरो के तत्कालीन संयुक्त निदेशक राजेन्द्र कुमार ने कहा था कि पूछताछ में बंजारा ने कबूल किया था कि उन्हें काली दाढ़ी और सफेद दाढ़ी वाले शख्स से इनकाउंटर का आदेश मिला था। यहां काली दाढ़ी से मतलब गृह राज्य मंत्री अमित शाह और सफेद दाढ़ी से मतलब सीएम नरेन्द्र मोदी थे। लेकिन सीबीआइ या आइबी इस मामले में मोदी-शाह का कोई डायरेक्ट लिंक नहीं खोज सकी। बाद में बंजारा ने खुलासा किया था कि सीबीआइ इस मामले में नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को गिरफ्तार करने की तैयारी में थी लेकिन चाह कर भी वह ठोस सबूत इकट्ठा नहीं कर पायी। कहा जाता है कि तत्कालीन यूपीए सरकार इशरत जहां और उसके साथियों के एनकाउंटर को इस लिए फर्जी बताने के लिए दांव पेंच खेल रही थी ताकि मोदी, शाह और पुलिस वालों को इस मामले में फंसाया जा सके।

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