Fact Check: क्या अकबरूद्दीन ओवैसी को प्रोटेम स्पीकर बनाने में कांग्रेस का हाथ? जानिए राजा सिंह के दावे का सच
Akbaruddin Owaisi: पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद तेलंगाना और मिजोरम में सीएम और मंत्रियों का शपथ ग्रहण हो चुका है। वहीं, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में अभी भी सीएम के नाम को लेकर माथापच्ची जारी है।
इस बीच तेलंगाना में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, तेलंगाना विधानसभा में एआईएमआईएम के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया है, जिसे लेकर भाजपा ने विरोध जताया और पार्टी के विधायकों ने शपथ ग्रहण का बहिष्कार किया।

भाजपा विधायक राजा सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'ये बहुत ही दुर्भाग्य की बात है। रेवंत रेड्डी के मुख्यमंत्री बनने के बाद कांग्रेस की सरकार का असली चेहरा सामने आ गया है। रेवंत रेड्डी हर बार ये कहते थे कि भाजपा, एआईएमआईएम और बीआरएस एक ही हैं। लेकिन, आज सबको पता चल गया कि कौन, किससे मिला हुआ है।'
राजा सिंह ने आगे कहा, 'आज एआईएमआईएम के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया है। ऐसे व्यक्ति के सामने हम शपथ नहीं लेंगे, जो 15 मिनट में 100 करोड़ हिंदुओं को मारने की बात करता है। रेवंत रेड्डी ने अल्पसंख्यकों और एआईएमआईएम के नेताओं को खुश करने के लिए ऐसा किया है। हम विधानसभा में शपथ ग्रहण का बहिष्कार करेंगे और अगले दिन जब स्पीकर का चयन हो जाएगा तो हम उनके चैंबर में जाकर विधायक के तौर पर शपथ लेंगे।'
BJP विधायक राजा सिंह का दावा कितना सही?
ऐसे में एक सवाल उठ रहा है कि क्या अकबरुद्दीन ओवैसी को कांग्रेस की सरकार ने प्रोटेम स्पीकर बनाया है? जैसा कि भाजपा के विधायक राजा सिंह दावा कर रहे हैं। तो इस सवाल का जवाब है- नहीं। दरअसल प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति राज्यपाल के द्वारा की जाती है और विधानसभा में उस विधायक को ये पद दिया जाता है, जो सबसे सीनियर हैं, यानी सबसे ज्यादा बार चुनकर विधानसभा पहुंचे हैं।
ओवैसी के लिए विधानमंडल के नोटिस में क्या लिखा है?
तेलंगाना विधानमंडल की तरफ से इस संबंध में जो नोटिस जारी किया गया है, उसमें लिखा है, 'भारत के संविधान के अनुच्छेद 180 के खंड (1) के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए तेलंगाना के राज्यपाल, विधानसभा का अध्यक्ष चुने जाने तक, अकबरुद्दीन ओवैसी को राज्य की विधानसभा का सदस्य होने के नाते विधानसभा अध्यक्ष के कर्तव्यों का पालन करने के लिए नियुक्त करते हैं। इनके समक्ष विधानसभा के लिए चुने गए सदस्य भारत के संविधान के अनुच्छेद 188 के तहत शपथ लेंगे।'
आपको बता दें कि विधानसभा में प्रोटेम स्पीकर का पद अस्थाई होता है, जिनके समक्ष नवनिर्वाचित विधायक शपथ लेते हैं। विधानसभा अध्यक्ष का चयन होने के बाद प्रोटेम स्पीकर की जिम्मेदारी भी खत्म हो जाती है। इसके बाद सदन की पूरी कार्यवाही विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष ही चलती है।
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