पीएम मोदी ने देश के सबसे लंबे पुल को दिया गायक भूपेन हजारिका का नाम, क्यों?

मालूम हो कि भूपेन्द्र हजारिका को 'असम रत्न' कहा जाता है, हजारिका का जन्म असम के सादिया में हुआ था

डिब्रूगढ़। शुक्रवार का दिन भारत के इतिहास में दर्ज हो गया है क्योंकि आज के ही दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम में देश के सबसे लंबे नदी पुल ढोला-सदिया का उद्घाटन किया। पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से बना यह पुल तीन लेन का है।

9.15 किलोमीटर लंबे इस पुल का निर्माण ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी लोहित पर किया गया है, जिसका नाम मशहूर गायक भूपेन हजारिका के नाम पर रखा गया है।

'असम रत्न'

'असम रत्न'

मालूम हो कि महान गायक भूपेन्द्र हजारिका को 'असम रत्न' कहा जाता है, हजारिका का जन्म असम के सादिया में हुआ था। बचपन में ही उन्होंने अपना प्रथम गीत लिखा और दस वर्ष की आयु में उसे गाया। साल 2012 में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा था।

1000 गानों को स्वर

1000 गानों को स्वर

साथ ही उन्होंने असमिया चलचित्र की दूसरी फिल्म इंद्रमालती के लिए 1939 में बारह वर्ष की आयु मॆं काम भी किया। हजारिका ने करीब 1000 गानों को स्वर दिया। हजारिका ने 60 साल से ज्यादा काम किया था।

भूपेन हजारिका असम के सच्चे सपूत

भूपेन हजारिका असम के सच्चे सपूत

दादा साहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म भूषण और संगीत-नाटक अकादमी रत्न पुरस्कार से नवाजे जा चुके हजारिका साहब ने कई फिल्मों और भाषाओं में अपना अनुपम संगीत दिया था इसलिए इतने महान हस्ती के नाम पर ढोला-सदिया पुल का नाम रखा गया है। खुद पीएम मोदी ने कहा कि भूपेन हजारिका असम के सच्चे सपूत थे इसलिए ब्रिज उन्हीं के नाम से जाना जाएगा।

असम के ढोला को अरुणाचल के सादिया से

मालूम हो कि यह पुल असम के ढोला को अरुणाचल के सादिया से जोड़ता है। इस पुल के बनने से असम के राष्ट्रीय राजमार्ग-37 में रूपाई और अरुणाचल प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्ग-52 में मेका/रोईंग के बीच 165 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। इन दो स्थानों के बीच यात्रा करने में वर्तमान में छह घंटे का समय लगता है, जो अब घटकर एक घंटा हो जाएगा। इससे प्रतिदिन पेट्रोल और डीजल में 10 लाख रुपये तक की बचत होगी।

 60-टन वजनी युद्ध टैंकों का भार वहन

60-टन वजनी युद्ध टैंकों का भार वहन

पर्यटन को बढ़ावा देने के अलावा 950 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित यह पुल अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के रणनीतिक लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। लोहित नदी पर निर्मित यह पुल 60-टन वजनी युद्ध टैंकों का भार वहन कर सकता है। यह देश की पूर्वी सीमा तक पहुंचने के लिए भारतीय सेना को सुगमता प्रदान करेगा।

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