ये रहे डिटेल्स जो साबित करते हैं उरी आतंकी हमले में पाक की साजिश
नई दिल्ली। भले ही पाकिस्तान इस बात से इंकार करता रहे कि उरी के आर्मी बेस पर रविवार को हुए आतंकी हमले में उसका कोई हाथ नहीं हैं, भारत के पास ऐसे एक नहीं कई सुबूत हैं जो पाक को बेनकाब करते हैं। ये सुबूत साबित करते हैं कि उरी आतंकी हमले की साजिश पाक में ही रची गई थी।

जीपीएस सबसे अहम
जांच एजेंसियों के पास वह जीपीएस डाटा है जो आतंकियों के पास मिला है। अब इस जीपीएस के डाटा का विश्लेषण कर उस रास्ते की सारी जानकारियां हासिल की जाएंगी। इस रास्ते से होते हुए आतंकी आर्मी बेस तक पहुंचे।
शुरुआती जांच में यह बात साबित हो चुकी है कि आतंकी हाजी पीर पास का रास्ता लेते हुए उरी तक पहुंचे। जीपीएस में गलवामा और राफियाबाद की लोकेशन फीड है। ये दोनों ही जगह एलओसी से करीब छह किमी की दूरी पर हैं।
जीपीएस ने की उरी तक पहुंचने में मदद
आतंकियों ने ग्रामीण इट्रेक्स जीपीएस सेट का प्रयोग किया जिसने उन्हें उरी तक आने के लिए गाइड किया। इस डाटा को नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन को दे दिया गया है।
जांच में यह बात भी सामने आई है कि आतंकी पहले एलओसी से सटे छोटे गांव सुखधार में दाखिल हुए जिसकी आबादी करीब 500 है। जांचकर्ता मानते हैं कि इस इलाके में बोझा ढोने का काम करने वाले मजदूरों ने आतंकियों की मदद की।
दवाईयां मेड इन पाकिस्तान
आतंकियों के पास एक किट भी मिली है और यह बिल्कुल वैसी है जैसी पठानकोट आतंकी हमले में एक आतंकी के पास से मिली थी। इंस्टेंट फूड, सिरींज और पेन किलर्स पर पाकिस्तान की कंपनियों के मार्क मिले हैं।
आतंकियों के पास से हाई प्रोटीन चॉकलेट्स के 26 रैपर्स, रेड बुल एनर्जी ड्रिंक की छह कैन्स और ओआरएस के तीन खाली पैकेट और दूसरी दवाईंया मिली हैं जिन पर मेड इन पाकिस्तान लिखा है।
जांचकर्ताओं का मानना है कि आतंकियों को जैश-ए-मोहम्मद के पाक स्थित बहावलपुर हेडक्वार्टर में ट्रेनिंग दी गई थी।












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