PM मोदी के बाद सबसे ज्यादा आतंकी खतरे के बावजूद अमित शाह ने क्यों ठुकराई NSG सुरक्षा ?

नई दिल्ली- गृहमंत्रालय की एक कमिटी किसी वीआईपी पर खतरे के आकलन के आधार पर ही उसके लिए जरूरी सुरक्षा तय करती है। इस काम में इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) खुफिया इनपुट मुहैया कराता है। इसी आधार पर निश्चित समय पर किसी वीआईपी की सुरक्षा का आकलन किया जाता है और खतरे के हिसाब से उसे बढ़ाया या घटाया जाता है। आईबी इनपुट के मुताबिक इस वक्त देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद अगर किसी वीआईपी पर सबसे ज्यादा आतंकी हमले का खतरा है तो वे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह हैं। उन्हें जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है और अभी उनकी सुरक्षा सीआरपीएफ के जवानों के हाथों में है। जानकारी के मुताबिक उनपर खतरे की आशंका को देखते हुए गृहमंत्रालय की कमिटी ने उनकी सुरक्षा में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) के कमांडो की तैनाती की सिफारिश की थी, जिसे लेने से खुद गृहमंत्री ने ही मना कर दिया। गौरतलब है कि एनएसजी कमांडो की ट्रेनिंग खास तरह की होती है और वह हर तरह की चुनौतियों का सामना करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित होते हैं।

2014 से सीआरपीएफ की सुरक्षा घेरे में हैं शाह

2014 से सीआरपीएफ की सुरक्षा घेरे में हैं शाह

गृहमंत्रालय की कमिटी आईबी से मिली खुफिया जानकारी के मुताबिक किसी वीआईपी की सुरक्षा पर फैसला लेती है। अमित शाह के मामले में इस कमिटी में इस बात पर विस्तार से चर्चा हुई कि मौजूदा वक्त में गृहमंत्री शाह प्रधानमंत्री मोदी के बाद सबसे ज्यादा आतंकियों के निशाने पर हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि जब मई में अमित शाह गृहमंत्री बने तो वीआईपी की सुरक्षा निर्धारित करने वाली कमिटी में इस बात पर चर्चा हुई कि उनकी सुरक्षा किसके जिम्मे रहनी चाहिए- सीआरपीएफ के या एनएसजी कमांडो के? अमित शाह को 2014 के जुलाई से ही सीआरपीएफ की सुरक्षा मिली हुई है। जबकि, उनसे पहले के गृहमंत्री राजनाथ सिंह के पास एनएसजी कमांडो की सुरक्षा थी।

सीआरपीएफ की सुरक्षा से संतुष्ट हैं शाह

सीआरपीएफ की सुरक्षा से संतुष्ट हैं शाह

गृहमंत्रालय की सुरक्षा कमिटी की उस बैठक में एक अधिकारी ने इस बार पर जोर दिया कि गृहमंत्री को एनएसजी कमांडो की सुरक्षा ही मिलनी चाहिए। आईबी की सूचना के आधार पर कमिटी भी इसी नतीजे पर पहुंची थी की खतरे को देखते हुए उन्हें अत्यधिक सुरक्षा की जरूरत है। लेकिन, जब इस मुद्दे पर खुद शाह से बात की गई और उनसे उनकी पसंद पूछी गई तो उन्होंने कहा कि वे सीआरपीएफ की सुरक्षा से संतुष्ट हैं। यानि, गृहमंत्री की इच्छा के मुताबिक ही उनकी सीआरपीएफ की सुरक्षा बरकरार रखी गई है, जबकि गृहमंत्रालय उनके लिए एनएसजी सुरक्षा की वकालत कर रहा था।

सीआरपीएफ की सुरक्षा लेने वाले पहले गृहमंत्री

सीआरपीएफ की सुरक्षा लेने वाले पहले गृहमंत्री

बता दें कि गृहमंत्री को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है और अब इसमें एएसएल (एडवांस्ड सिक्योरिटी लायजन) को भी शामिल किया गया है। इसका मतलब, उन्हें अर्द्धसैनिक बलों की सुरक्षा उनके आवास, दफ्तर और यात्राओं के दौरान भी मिलेगी। अलबत्ता, शाह पहले गृहमंत्री हैं, जिन्हें सीआरपीएफ की सुरक्षा मिली है। उनसे पहले राजनाथ सिंह, सुशील कुमार शिंदे और शिवराज पाटिल को एनएसजी की सुरक्षा मिली हुई थी। पी चिदंबरम भी जेड-प्लस श्रेणी की सुरक्षा के हकदार हैं, हालांकि उन्हें ज्यादा सुरक्षा घेरे में यात्रा करते हुए कम ही देखा गया है।

सीआरपीएफ के 100 कमांडो करते हैं सुरक्षा

सीआरपीएफ के 100 कमांडो करते हैं सुरक्षा

जेड-प्लस सुरक्षा कवर के तहत अमित शाह को सीआरपीएफ के 100 कमांडो तीन शिफ्टों में उनकी सुरक्षा में तैनात रहते हैं। गृहमंत्री बनने के बाद अब दिल्ली पुलिस भी उनके आवास के बाहरी हिस्से की चौकसी करती है। जब वे राजधानी से बाहर जाते हैं तो स्थानीय पुलिस उनकी सुरक्षा के बाहरी घेरे में मुस्तैद होती है। अगस्त के अंतिम हफ्ते में ही शाह दिल्ली में आवंटित नए आवास 6ए कृष्णा मेनन मार्ग में शिफ्ट हुए हैं, जहां उनकी सुरक्षा में दिल्ली पुलिस के 50 से ज्यादा जवानों को भी तैनात किया गया है। एचटी की खबर के मुताबिक जब इस मसले पर गृहमंत्रालय के प्रवक्ता से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कॉल का जवाब नहीं दिया।

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