राम चंदेर छत्रपति, वो पत्रकार जिसने खोली थी राम रहीम के रेप केस की पोल

डेरा सच्चा सौदा के चीफ बाबा राम रहीम पर हैं हत्या के दो मामले, लंबे समय से लड़ रहा यह बेटा इंसाफ की लड़ाई

चंडीगढ़। डेरा सच्चा सौदा के चीफ बाबा राम रहीम को दो साध्वियों से रेप के मामले में सीबीआई कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई है। राम रहीम पर इस रेप के अलावा एक हत्या का भी मामला दर्ज है जिसकी कम ही लोगों को जानकारी है। राम रहीम पर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या का भी आरोप है, रामचंद्र के बेटे को आज भी अपने पिता की हत्या के मामले में इंसाफ का इंतजार है। दरअसल रामचंद्र ने अपने अखबार के जरिए राम रहीम के खिलाफ 15 वर्ष पहले साध्वी के साथ रेप का मामला उजागर किया था। दरअसल पत्रकार ने जो चिट्ठी अपने अखबार में छापी थी वह तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, चीफ जस्टिस पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट सहित कई लोगों को भेजी गई थी। यह चिट्ठी एक अज्ञात महिला का था, जिसने बाबा राम रहीम पर रेप का सनसनीखेज आरोप लगाया था।

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    रेप का खुलासा करने वाले की हत्या

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    रामचंदर छत्रपति की 24 अक्टूबर 2002 में उनके घर पर प्वाइंट ब्लैंक पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह हत्या राम रहीम के खिलाफ साध्वी के साथ रेप की खबर अखबार में छपने के कुछ महीने बाद ही की गई थी। अखबार में एक पत्र छापा गया था जिसमें लिखा गया था कि जब दो साध्वी राम रहीम के आश्रम पर शांति के लिए गईं तो बाबा राम रहीम ने उनके साथ रेप किया था। रामचंदेर के बेटे अंशुल ने पिछले 15 साल से अपने पिता की हत्या के खिलाफ इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं।

    पुलिस ने राम रहीम का आरोपी नहीं बनाया, मामला CBI को

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    अंशुल बताते हैं कि जिस वक्त मेरे पिता की हत्या की गई तो मेरी उम्र सिर्फ 21 वर्ष थी और मुझे पता नहीं था कि मैं इंसाफ के लिए कहां जाउं, पुलिस ने अपनी एफआईआर में डेरा चीफ का नाम नहीं दर्ज किया। जिसके बाद मैंने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की और जिसके बाद 2003 में यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। जबसे डेरा चीफ के खिलाफ अंशुल ने अपनी लड़ाई शुरू की उन्हें लगातार जान से मारने की धमकी मिलती रही, यही नहीं बहुत ही मुश्किलों से अंशुल अपने पिता के अखबार पूरा सच को चला रहे हैं। अंशुल कहते हैं कि मेरे पिता ने 28 दिन तक मौत से लड़ाई लड़ी थी, उन्होंने स्थानीय पुलिस को अपने बयान में डेरा चीफ को आरोपी तक बताया था, बावजूद इसके पुलिस ने डेरा चीफ का नाम एफआईआर में दर्ज नहीं किया और तभी से मेरी इंसाफ के लिए लड़ाई शुरू हुई थी।

    डर के मारे घर में लगवाया सीटीवी कैमरा

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    पिछले 15 साल से इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे अंशुल के चेहरे में संघर्ष और चिंता का भाव साफ देखा जा सकता है। बाबा राम रहीम के खिलाफ कोर्ट के फैसले से पहले अंशुल ने अपने घर पर सीसीटीवी कैमरे लगवा लिए हैं। जब उनसे पूछा गया कि आपने सीसीटीवी कैमरे क्यों लगवाएं है तो उन्होंने बताया कि कल फैसला आने वाला है, ऐसे में यह जरूरी है। डेरा चीफ के खिलाफ ना सिर्फ पूरा सच अखबार के संपादक रामचंदेर छत्रपति की हत्या बल्कि डेरा के एक पुराने सदस्य की हत्या का भी आरोप 2002 में लगा था। इस व्यक्ति पर आरोप था कि उसने डेरा के सिरसा स्थित मुख्यालय में गलत कामों को उजागर किया था, जिसमें महिलाओं के साथ यौन शोषण बड़ा मुद्दा था।

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